नई दिल्ली. भारत और अमेरिका के बीच जारी “interim bilateral trade agreement” के संयुक्त बयान के अनुसार, भारत ने soyabean, corn (maize), fuel ethanol, cotton, dairy और poultry products के आयात के लिए अपने बाजार नहीं खोले हैं।
इसके बजाय भारत ने कुछ अमेरिकी कृषि उत्पादों के लिए tariff कम करने या समाप्त करने के जरिए अधिक market access देने पर सहमति जताई है। इनमें Distiller’s Dried Grains with Solubles (DDGS), soyabean oil, पशु चारे के लिए red sorghum, tree nuts, ताजे और processed fruits, wine और spirits तथा कुछ अन्य उत्पाद शामिल हैं।
पहली नजर में ये रियायतें भारतीय किसानों के लिए बड़ा खतरा नहीं लगतीं, क्योंकि इन उत्पादों का देश में उत्पादन सीमित है। हालांकि मामला इतना सरल भी नहीं है, क्योंकि “additional products” का स्पष्ट उल्लेख नहीं किया गया है।
DDGS क्या है और क्यों अहम है
DDGS दरअसल corn या अन्य अनाज से बने ethanol का byproduct होता है। ethanol बनने के बाद बचा हुआ अनाज-मिश्रण सुखाकर तैयार किया जाता है। यह protein-rich और कम कीमत वाला livestock feed ingredient माना जाता है।
भारत में poultry, cattle और aqua feed उद्योग आमतौर पर soyabean, cottonseed, groundnut, mustardseed या rice bran से बने de-oiled cake (DOC) का उपयोग करते हैं, जो DDGS की तुलना में महंगे होते हैं।
उदाहरण के तौर पर, भारत में soyabean DOC (46% protein) की कीमत लगभग ₹43-44 प्रति किलो है, जबकि rice-based DDGS (42% protein) करीब ₹30 प्रति किलो और corn DDGS (27% protein) लगभग ₹24-24.5 प्रति किलो मिल जाता है। अमेरिकी आयात के बाद इसकी कीमत और कम हो सकती है।
अमेरिका दुनिया का सबसे बड़ा corn, ethanol और DDGS उत्पादक-निर्यातक है। भारत ने भले ही अमेरिकी corn और fuel ethanol के आयात को अनुमति नहीं दी है, लेकिन DDGS आयात के लिए बाजार खोल दिया है।
पशुपालन क्षेत्र को फायदा
विशेषज्ञों के अनुसार, इससे poultry, dairy और aqua industry को सस्ता और बेहतर गुणवत्ता वाला चारा मिल सकता है। अमेरिकी DDGS में aflatoxin का स्तर कम होने से यह अधिक सुरक्षित माना जाता है।
इसके अलावा red sorghum (ज्वार) के आयात पर शुल्क कम होने से livestock sector को भी लाभ मिल सकता है।
सोयाबीन किसानों पर असर संभव
इस समझौते का संभावित नुकसान soyabean किसानों और oilseed processing industry को हो सकता है। भारत में करीब 13 मिलियन हेक्टेयर क्षेत्र में सोयाबीन की खेती होती है, मुख्यतः मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और राजस्थान में।
समझौते के तहत DDGS आयात और soyabean oil पर कम शुल्क से घरेलू बाजार में कीमतों पर दबाव पड़ सकता है। वर्तमान में crude soyabean oil पर प्रभावी आयात शुल्क लगभग 16.5% है।
GM फसल और गैर-टैरिफ बाधाएं
भारत ने अभी भी GM corn, GM soyabean और dairy imports को लेकर अपनी स्थिति नहीं बदली है। हालांकि संयुक्त बयान में “non-tariff barriers” को दूर करने पर सहमति का उल्लेख किया गया है, जिससे भविष्य में नीति बदलाव की संभावना पर चर्चा हो रही है।
ड्राई फ्रूट आयात पर असर सीमित
भारत ने walnuts, almonds और pistachios जैसे tree nuts पर आयात शुल्क कम करने की बात मानी है। चूंकि भारत इनका बड़ा उत्पादक नहीं है, इसलिए किसानों पर इसका असर सीमित रहने की संभावना है।
भारत पहले से ही अमेरिकी tree nuts का सबसे बड़ा बाजार है। 2025 में अमेरिका ने लगभग 10 अरब डॉलर के tree nuts निर्यात किए, जिनमें से करीब 1.5 अरब डॉलर का निर्यात भारत को हुआ।
