नई दिल्ली. भारत में गेहूं के निर्यात पर लगी पाबंदियों में ढील दिए जाने के बाद घरेलू बाजार में गेहूं की कीमतों में तेजी देखने को मिली है। रिपोर्ट के मुताबिक, गेहूं के दाम में करीब 150 रुपये प्रति क्विंटल तक की बढ़ोतरी हुई है। वहीं, भारत के लिए वैश्विक गेहूं बाजार में एक बड़ा निर्यात अवसर भी बनता नजर आ रहा है। एक रिपोर्ट के अनुसार, देश आने वाले समय में 1.5 अरब डॉलर से अधिक का गेहूं निर्यात कर सकता है।
रिकॉर्ड उत्पादन ने बढ़ाई निर्यात की गुंजाइश
रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में गेहूं का रिकॉर्ड उत्पादन और पर्याप्त सरकारी भंडार देश को घरेलू खाद्य सुरक्षा बनाए रखते हुए निर्यात बढ़ाने की बेहतर स्थिति में ला रहा है। वर्ष 2025-26 में देश में करीब 120.7 मिलियन टन गेहूं का उत्पादन हुआ है। इस रिकॉर्ड उत्पादन के साथ भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा गेहूं उत्पादक देश बना हुआ है।
करीब चार साल बाद निर्यात नीति में बड़ा बदलाव
ASSOCHAM ने कहा है कि भारत करीब चार साल तक निर्यात प्रतिबंधों के बाद वर्ष 2026 में धीरे-धीरे वैश्विक गेहूं व्यापार में दोबारा अपनी स्थिति मजबूत करने की दिशा में बढ़ रहा है। सरकार ने गेहूं की कुछ निर्धारित किस्मों के साथ गेहूं के आटे और उससे जुड़े उत्पादों की Export Policy में भी बदलाव किया है। इन उत्पादों को पहले ‘Prohibited’ श्रेणी में रखा गया था, जबकि अब इन्हें ‘Free’ श्रेणी में शामिल किया गया है।
इस बदलाव के दायरे में गेहूं, ड्यूरम गेहूं, आटा, मैदा और सूजी या रवा जैसे उत्पाद शामिल हैं। इससे भारतीय कारोबारियों और निर्यातकों के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में गेहूं और इससे जुड़े उत्पादों की बिक्री के अवसर बढ़ सकते हैं।
सरकारी भंडार में भी गेहूं की पर्याप्त मात्रा
देश में गेहूं के पर्याप्त उत्पादन के साथ सरकारी भंडार की स्थिति भी मजबूत बताई गई है। 28 मई 2026 तक Central Pool में करीब 51.3 मिलियन टन गेहूं का स्टॉक मौजूद था। यह मात्रा 1 जुलाई के लिए निर्धारित 27.58 मिलियन टन के Buffer Norm से काफी अधिक है। ASSOCHAM के मुताबिक, मौजूदा उत्पादन और स्टॉक की स्थिति को देखते हुए भारत के पास घरेलू जरूरतों को पूरा करने के साथ निर्यात बढ़ाने की भी पर्याप्त गुंजाइश है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारत को मिल रहा कीमत का फायदा
रिपोर्ट के मुताबिक, वैश्विक बाजार में भारत को गेहूं की कीमत के मामले में भी फायदा मिल सकता है। वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत का गेहूं MSP करीब 268 डॉलर प्रति टन के बराबर है, जबकि मई 2026 में अंतरराष्ट्रीय गेहूं की कीमत लगभग 303 डॉलर प्रति टन थी। यानी दोनों के बीच करीब 35 डॉलर प्रति टन का अंतर रहा, जिससे भारतीय गेहूं को वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त मिल सकती है।
बांग्लादेश में भारतीय गेहूं की सबसे ज्यादा संभावना
ASSOCHAM की रिपोर्ट में बांग्लादेश को भारतीय गेहूं के लिए सबसे महत्वपूर्ण संभावित बाजार बताया गया है। इसके अलावा मिस्र, इंडोनेशिया, अल्जीरिया, मोरक्को और फिलीपींस जैसे देशों में भी धीरे-धीरे निर्यात बढ़ाने की संभावना जताई गई है। बांग्लादेश ने 2024-25 में करीब 6.7 मिलियन टन गेहूं का आयात किया था और भारत पहले से ही उसके प्रमुख गेहूं आपूर्तिकर्ताओं में शामिल है।
वैश्विक उत्पादन घटने से भारत के लिए अवसर
रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2026-27 में वैश्विक गेहूं उत्पादन करीब 819 मिलियन टन रहने का अनुमान है, जबकि 2025-26 में यह रिकॉर्ड 843.8 मिलियन टन था। प्रमुख गेहूं उत्पादक देशों में मौसम से जुड़ी चुनौतियों के कारण वैश्विक उत्पादन में कमी आने का अनुमान है। ऐसे में आयात पर निर्भर देश गेहूं की आपूर्ति के लिए नए और भरोसेमंद स्रोत तलाश रहे हैं। यह स्थिति भारत के लिए Global Wheat Market में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने का अवसर पैदा कर सकती है।
निर्यात बढ़ाने के लिए गुणवत्ता और लॉजिस्टिक्स जरूरी
हालांकि, ASSOCHAM ने यह भी स्पष्ट किया है कि लंबे समय तक वैश्विक गेहूं बाजार में मजबूत स्थिति बनाने के लिए केवल उत्पादन बढ़ना पर्याप्त नहीं होगा। भारत को गेहूं की Consistent Quality बनाए रखने के साथ बेहतर Logistics, Storage और Testing Facilities पर भी निवेश करना होगा। इसके अलावा Export Policy में स्पष्टता और स्थिरता भी जरूरी होगी।
भारत बन सकता है भरोसेमंद वैश्विक गेहूं आपूर्तिकर्ता
रिपोर्ट के अनुसार, यदि भारत गेहूं निर्यात को धीरे-धीरे और पूर्वानुमान के अनुरूप आगे बढ़ाता है तथा Storage, Transportation और Port Infrastructure को मजबूत करता है, तो देश वैश्विक बाजार में एक Reliable Wheat Supplier के रूप में अपनी स्थिति मजबूत कर सकता है। रिकॉर्ड उत्पादन, पर्याप्त स्टॉक और अंतरराष्ट्रीय बाजार में बदलती मांग भारत के लिए गेहूं निर्यात का नया अवसर खोल सकती है।

