नई दिल्ली. उत्तर प्रदेश में सरकारी नौकरी पाने की प्रक्रिया के तहत चरित्र सत्यापन (Character Verification) के नियमों को सख्त किया गया है। योगी आदित्यनाथ सरकार के नए निर्देशों के अनुसार, मौजूदा सामाजिक व्यवस्था को हिंसक तरीकों से बदलने के उद्देश्य से काम करने वाले संगठनों से जुड़े लोगों को सरकारी नियुक्ति के लिए अयोग्य माना जा सकता है। यह कदम हालिया विरोध प्रदर्शन के दौरान कथित तौर पर ‘सत्ता परिवर्तन’ के लिए हिंसक आह्वान किए जाने को लेकर उठे विवाद के बीच आया है। इस फैसले पर समाजवादी पार्टी और कांग्रेस समेत विपक्षी दलों ने सवाल उठाए हैं।
राजनीतिक विचारधारा के आधार पर नहीं रोकी जाएगी नियुक्ति
राज्य के नियुक्ति विभाग के प्रमुख सचिव एम. देवराज की ओर से जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि किसी उम्मीदवार को केवल उसकी राजनीतिक विचारधारा के आधार पर सरकारी नौकरी के लिए अयोग्य नहीं ठहराया जा सकता। इसी तरह, केवल प्राथमिकी (FIR) दर्ज होने या किसी मामले में जांच लंबित रहने से भी उम्मीदवार की नियुक्ति अपने आप नहीं रोकी जाएगी।
आदेश के मुताबिक, सरकारी नौकरी के लिए चरित्र सत्यापन करते समय इन बातों को अकेले अयोग्यता का आधार नहीं बनाया जाना चाहिए। हालांकि, हिंसक तरीकों से मौजूदा सामाजिक व्यवस्था बदलने के उद्देश्य से काम करने वाले संगठनों से जुड़ाव रखने वाले लोगों की पात्रता पर विचार किया जा सकता है।
21 वर्ष की उम्र के बाद की गतिविधियों पर भी नजर
नए निर्देशों में गतिविधियों के समय और उम्मीदवार की उम्र को लेकर भी प्रावधान किया गया है। यदि कोई व्यक्ति 21 वर्ष की आयु पूरी करने के बाद और चरित्र सत्यापन की तारीख से पहले के तीन वर्षों के भीतर ऐसी गतिविधियों में शामिल रहा है, तो इसे उसके सक्रिय रूप से उनसे जुड़े रहने का संकेत माना जा सकता है।
हालांकि, आदेश में यह भी कहा गया है कि यदि इस अवधि के दौरान उम्मीदवार के आचरण में बदलाव के ठोस और सकारात्मक प्रमाण उपलब्ध हों, तो उन पर विचार किया जा सकता है। यानी संबंधित गतिविधियों में पूर्व भागीदारी को लेकर परिस्थितियों और उपलब्ध साक्ष्यों का आकलन महत्वपूर्ण होगा।
FIR या जांच लंबित होने से अपने आप नहीं कटेगा नौकरी का रास्ता
सरकार ने स्पष्ट किया है कि किसी उम्मीदवार के खिलाफ FIR दर्ज होना या पुलिस जांच जारी रहना अपने आप में सरकारी नियुक्ति के लिए अयोग्यता नहीं है। चरित्र सत्यापन के दौरान केवल लंबित जांच के आधार पर उम्मीदवार को खारिज नहीं किया जाना चाहिए।
इस प्रावधान का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि नियुक्ति प्रक्रिया में उम्मीदवारों के मामलों का आकलन निर्धारित नियमों के अनुसार हो और केवल जांच लंबित होने के कारण उनकी उम्मीदवारी स्वतः समाप्त न हो।
पुलिस को 30 दिन में देनी होगी सत्यापन रिपोर्ट
संशोधित प्रक्रिया के तहत पुलिस को उम्मीदवारों की चरित्र सत्यापन रिपोर्ट 30 दिनों के भीतर प्रस्तुत करनी होगी। यह नियम राज्य सरकार के विभिन्न विभागों और आदेश के दायरे में आने वाले अन्य सार्वजनिक संस्थानों में सीधी भर्ती के जरिए चयनित उम्मीदवारों पर लागू होगा।
निर्धारित समयसीमा से चरित्र सत्यापन की प्रक्रिया को व्यवस्थित करने और नियुक्तियों में होने वाली देरी कम करने का लक्ष्य है।
पहले से सरकारी सेवा में कार्यरत कर्मचारियों को राहत
आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि जो कर्मचारी पहले से सरकारी सेवा में कार्यरत हैं, उन्हें इसी प्रक्रिया के तहत दोबारा चरित्र सत्यापन कराने की आवश्यकता नहीं होगी। हालांकि, जरूरत पड़ने पर उनके पूर्व विभागों से आचरण और सेवा रिकॉर्ड से संबंधित जानकारी मांगी जा सकती है।
सरकार के इस फैसले ने सरकारी भर्ती में चरित्र सत्यापन के मानकों और उनके इस्तेमाल को लेकर नई चर्चा शुरू कर दी है। जहां आदेश राजनीतिक विचारधारा और केवल FIR के आधार पर अयोग्यता से सुरक्षा देता है, वहीं हिंसक तरीकों से सामाजिक व्यवस्था बदलने के उद्देश्य वाली गतिविधियों में शामिल लोगों की पात्रता को लेकर अलग प्रावधान भी करता है।

