नई दिल्ली: Dharmendra Pradhan ने आज कहा कि चालू शैक्षणिक सत्र तक करीब 19 विदेशी विश्वविद्यालय भारत में अपने कैंपस स्थापित करने जा रहे हैं। वे नई दिल्ली में आयोजित ‘स्टडी इन इंडिया’ एजु-डिप्लोमैटिक कॉन्क्लेव 2026 को संबोधित कर रहे थे।
शिक्षा मंत्री ने कहा कि भारत वैश्विक शिक्षा का प्रमुख केंद्र बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि भारतीय संस्थान सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), बायोटेक्नोलॉजी, क्रिटिकल मिनरल्स, कृषि और सतत प्रबंधन जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के साथ सहयोग कर रहे हैं।
गुणवत्ता और वैश्विक रैंकिंग पर फोकस
धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि सरकार का मुख्य उद्देश्य उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा प्रदान करना और वैश्विक रैंकिंग में भारतीय संस्थानों की स्थिति को मजबूत करना है। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति के तहत शोध, नवाचार और उद्योग से जुड़ी शिक्षा को बढ़ावा दिया जा रहा है, ताकि युवाओं के लिए अधिक आर्थिक अवसर सृजित किए जा सकें।
युवाशक्ति है भारत की सबसे बड़ी ताकत
शिक्षा मंत्री ने कहा कि भारत की 65 प्रतिशत आबादी 35 वर्ष से कम आयु वर्ग की है, जो देश की सबसे बड़ी पूंजी है। उन्होंने कहा कि इसी युवाशक्ति के बल पर भारत ज्ञान-आधारित अर्थव्यवस्था की ओर तेजी से बढ़ रहा है।
‘ग्लोबल साउथ’ के लिए विकास मॉडल
प्रधान ने कहा कि भारत विभिन्न देशों और सभ्यताओं के बीच “नॉलेज ब्रिज” (ज्ञान सेतु) बनाने का प्रयास कर रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि भारत ‘ग्लोबल साउथ’ देशों के लिए एक समावेशी और सतत विकास मॉडल तैयार करने की दिशा में काम कर रहा है, जिससे शिक्षा और तकनीक के क्षेत्र में साझा प्रगति सुनिश्चित हो सके।
विदेशी छात्रों को भारत आने का निमंत्रण
कार्यक्रम में शिक्षा मंत्री ने दुनिया भर के छात्रों को भारत में अध्ययन के लिए आमंत्रित किया। उन्होंने कहा कि भारत न केवल किफायती और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करता है, बल्कि यहां की सांस्कृतिक विविधता और शैक्षणिक परंपरा भी अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए आकर्षण का केंद्र है।
सरकार का मानना है कि विदेशी विश्वविद्यालयों के भारत में कैंपस खुलने से न केवल भारतीय छात्रों को विश्वस्तरीय शिक्षा देश में ही उपलब्ध होगी, बल्कि भारत एक वैश्विक शिक्षा हब के रूप में अपनी पहचान भी मजबूत करेगा।
