नई दिल्ली: स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने और कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करने की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने 22 प्रतिशत से 30 प्रतिशत तक इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल पर केंद्रीय उत्पाद शुल्क (एक्साइज ड्यूटी) पूरी तरह समाप्त कर दिया है। हालांकि इस फैसले का तत्काल असर आम उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ता नहीं दिख रहा है।
उच्च इथेनॉल मिश्रण वाले ईंधन को मिलेगा बढ़ावा
वित्त मंत्रालय के राजस्व विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, 22%, 25%, 27% और 30% इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल पर अब कोई केंद्रीय उत्पाद शुल्क नहीं लगेगा। इसके लिए जून 2017 की मूल एक्साइज अधिसूचना में संशोधन किया गया है।
सरकार का मानना है कि इस कर छूट से अधिक इथेनॉल मिश्रण वाले ईंधनों का उत्पादन और आपूर्ति बढ़ेगी, जिससे वैकल्पिक और पर्यावरण-अनुकूल ईंधन के उपयोग को बढ़ावा मिलेगा।
एक्साइज ड्यूटी हटाने का क्या है मतलब?
एक्साइज ड्यूटी एक अप्रत्यक्ष कर है, जो सरकार विशेष वस्तुओं के उत्पादन और बिक्री पर लगाती है। आमतौर पर कंपनियां इस कर का बोझ अंतिम उपभोक्ताओं पर डालती हैं, जिससे उत्पाद की कीमत बढ़ जाती है।
अब उच्च इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल पर यह कर हटाने से तेल कंपनियों और आपूर्तिकर्ताओं के लिए ऐसे ईंधन का उत्पादन और वितरण अधिक किफायती हो जाएगा।
क्या पेट्रोल के खर्च में आएगी कमी?
यदि आप यह सोच रहे हैं कि इस फैसले से पेट्रोल सस्ता हो जाएगा या मासिक ईंधन खर्च कम होगा, तो फिलहाल इसका जवाब ‘नहीं’ है।
देशभर के अधिकांश पेट्रोल पंपों पर वर्तमान में E20 पेट्रोल उपलब्ध है, जिसमें 20 प्रतिशत इथेनॉल और 80 प्रतिशत पेट्रोल होता है। सरकार द्वारा दी गई नई छूट E20 पर नहीं, बल्कि 22 से 30 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण वाले ईंधनों पर लागू होगी, जो अभी व्यापक रूप से बाजार में उपलब्ध नहीं हैं।
आम वाहनों के लिए उपयुक्त नहीं है यह ईंधन
विशेषज्ञों के अनुसार, भारत में चलने वाले अधिकांश वाहन उच्च इथेनॉल मिश्रण वाले ईंधन पर चलने के लिए डिज़ाइन नहीं किए गए हैं। ऐसे ईंधन का उपयोग करने के लिए फ्लेक्स-फ्यूल व्हीकल (FFV) की आवश्यकता होती है।
वर्तमान में भारतीय बाजार में फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक वाले वाहनों की संख्या बेहद सीमित है। इनमें प्रमुख रूप से Maruti Suzuki WagonR Flex Fuel, Hero Splendor+ Flex Fuel और Hero HF Deluxe Flex Fuel शामिल हैं।
ऊर्जा सुरक्षा और हरित ईंधन की दिशा में कदम
सरकार लंबे समय से पेट्रोल में इथेनॉल मिश्रण बढ़ाने की नीति पर काम कर रही है। इसका उद्देश्य कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करना, किसानों को अतिरिक्त आय के अवसर देना और कार्बन उत्सर्जन में कमी लाना है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला भविष्य में उच्च इथेनॉल मिश्रित ईंधन के प्रसार का रास्ता तैयार करेगा, लेकिन आम उपभोक्ताओं को इसका सीधा आर्थिक लाभ मिलने में अभी समय लग सकता है।

