नई दिल्ली. हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री Sukhvinder Singh Sukhu ने राज्य में महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार क्लास-III सरकारी नौकरियों में महिलाओं को 25 प्रतिशत आरक्षण देने जा रही है। मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि महिलाओं का कल्याण सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और राज्य की हर नीति में महिलाओं को केंद्र में रखा गया है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकार ने पैतृक संपत्ति में बेटियों को बेटों के बराबर अधिकार सुनिश्चित किए हैं। अब बेटियों को 150 बीघा तक की पैतृक संपत्ति में समान अधिकार मिलेंगे।
इसके अलावा Mukhyamantri Sukh Shiksha Yojana के तहत विधवा महिलाओं के बच्चों की उच्च शिक्षा का पूरा खर्च राज्य सरकार उठा रही है।
30 प्रतिशत आरक्षण महिलाओं को दिया जा रहा है
मुख्यमंत्री ने कहा कि महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए प्रशासन में भी कई अहम जिम्मेदारियां उन्हें दी गई हैं। वर्तमान में लाहौल-स्पीति जिले का पूरा प्रशासनिक नेतृत्व महिलाओं के हाथों में है, जबकि सिरमौर और हमीरपुर जिलों में भी महिला डिप्टी कमिश्नर तैनात हैं।
उन्होंने यह भी बताया कि राज्य में पुलिस भर्ती में पहले से ही 30 प्रतिशत आरक्षण महिलाओं को दिया जा रहा है। इसके साथ ही सरकार अगले साल से राज्य की महिलाओं को हर महीने ₹1,500 पेंशन देने की योजना पर भी विचार कर रही है।
RDG बंद होने पर केंद्र सरकार पर निशाना
मुख्यमंत्री सुक्खू ने Bharatiya Janata Party (BJP) पर निशाना साधते हुए कहा कि 1 फरवरी 2026 हिमाचल के इतिहास में “काला दिन” के रूप में याद किया जाएगा, क्योंकि केंद्र सरकार ने राज्य को मिलने वाली 10,000 करोड़ रुपये की वार्षिक Revenue Deficit Grant (RDG) बंद कर दी।
उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश एक छोटा राज्य है और आय के स्रोत सीमित हैं। इसके बावजूद राज्य उत्तरी भारत को पानी उपलब्ध कराता है, पंजाब के खेतों की सिंचाई करता है और बड़े पैमाने पर जंगलों का संरक्षण करता है, लेकिन अक्सर राज्य के अधिकारों की अनदेखी की जाती है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने इस मुद्दे को उठाने के लिए भाजपा नेताओं के साथ दिल्ली जाने का प्रस्ताव भी दिया था, लेकिन उन्होंने इसे प्रभावी तरीके से नहीं उठाया। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश के लोगों को अपने अधिकारों के लिए दृढ़ता से लड़ना होगा।
