नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत में गरीबी के स्तर में आई बड़ी गिरावट को ऐतिहासिक बताते हुए वर्ल्ड बैंक की रिपोर्ट का हवाला दिया है। उन्होंने कहा कि साल 2011 से 2023 के बीच देश के 49.6 करोड़ लोग गरीबी से बाहर निकले हैं। इस दौरान अत्यधिक गरीबी की दर में करीब 90 फीसदी की कमी दर्ज की गई। पीएम मोदी ने इस उपलब्धि को देश में अवसरों के विस्तार और रोजगार के बढ़ते अवसरों से जोड़ते हुए कहा कि भारत में गरीबी में कमी दुनिया की सबसे तेज गिरावटों में से एक है।
पीएम मोदी ने इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट साझा की, जिसमें बॉलीवुड फिल्म ‘दसवीं’ के गीत ‘ठान लिया’ को बैकग्राउंड म्यूजिक के तौर पर इस्तेमाल किया गया। पोस्ट में उन्होंने बताया कि भारत में अत्यधिक गरीबी की दर पहले जहां चार में से एक व्यक्ति से अधिक थी, वहीं अब यह घटकर करीब 38 लोगों में से एक रह गई है। उन्होंने यह भी कहा कि केवल छह वर्षों में रोजगार में 13.4 करोड़ की वृद्धि हुई, जो इसी अवधि में कामकाजी उम्र की आबादी में हुई बढ़ोतरी से लगभग दोगुनी है।
गिनी इंडेक्स में भी आई गिरावट
प्रधानमंत्री ने आय असमानता में कमी का भी जिक्र किया। उनके मुताबिक, भारत का गिनी इंडेक्स 20 फीसदी से अधिक गिरकर 23.0 पर आ गया है। गिनी इंडेक्स का इस्तेमाल किसी देश में आय के वितरण और आर्थिक असमानता को मापने के लिए किया जाता है। पीएम मोदी ने कांग्रेस के पुराने ‘गरीबी हटाओ’ नारे पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि गरीबी खत्म करना उनकी सरकार के लिए केवल नारा नहीं, बल्कि एक दृढ़ संकल्प है।
वर्ल्ड बैंक की रिपोर्ट में गरीबी को लेकर क्या कहा गया?
वर्ल्ड बैंक की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में आर्थिक और गैर-आर्थिक, दोनों तरह की गरीबी में कमी आई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि निचली-मध्यम आय वाली अर्थव्यवस्थाओं के लिए निर्धारित गरीबी रेखा के आधार पर गरीबी का स्तर 2011 में 57.7 फीसदी था, जो 2023 में घटकर 16.1 फीसदी रह गया। रिपोर्ट के अनुमानों के अनुसार, गरीबी दर 2026 में 14.2 फीसदी से घटकर 2028 तक 12.1 फीसदी हो सकती है।
रिपोर्ट में गरीबी घटने के पीछे कई वजहें बताई गई हैं। इनमें सरकार की मुफ्त और रियायती खाद्यान्न वितरण योजनाएं, घरेलू खपत में वृद्धि, रोजगार के अवसरों का विस्तार और महिलाओं की बढ़ती रोजगार भागीदारी शामिल हैं। रिपोर्ट के अनुसार, खाद्य सहायता कार्यक्रमों ने खास तौर पर ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच गरीबी के अंतर को कम करने में भूमिका निभाई है।
बहुआयामी गरीबी में भी आई कमी
वर्ल्ड बैंक की रिपोर्ट में गैर-आर्थिक यानी बहुआयामी गरीबी में आई गिरावट का भी जिक्र किया गया है। ऑक्सफोर्ड पावर्टी एंड ह्यूमन डेवलपमेंट इनिशिएटिव (OPHI) के मल्टीडायमेंशनल पावर्टी इंडेक्स (MPI) के मुताबिक, भारत में बहुआयामी गरीबी की दर 2005-06 में 53.8 फीसदी थी, जो 2019-21 में घटकर 16.4 फीसदी रह गई।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि देश की करीब 57 फीसदी गरीब आबादी उत्तर प्रदेश से पश्चिम बंगाल तक फैले क्षेत्र में रहती है। इससे पता चलता है कि गरीबी में राष्ट्रीय स्तर पर गिरावट के बावजूद कुछ क्षेत्रों में गरीबी की चुनौती बनी हुई है।
रोजगार बढ़ा, लेकिन युवाओं की बेरोजगारी भी चिंता
रिपोर्ट में रोजगार के मोर्चे पर बढ़ोतरी का उल्लेख किया गया है। हालांकि, इसके साथ युवाओं की बेरोजगारी को लेकर चिंता भी जताई गई है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, रोजगार में वृद्धि के बावजूद वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में युवा बेरोजगारी दर बढ़कर 15.9 फीसदी हो गई, जबकि वित्त वर्ष 2025-26 की पहली तिमाही में यह 14.6 फीसदी थी। खास तौर पर ग्रामीण क्षेत्रों की युवा महिलाओं के बीच बेरोजगारी में बढ़ोतरी का जिक्र किया गया है।
इस तरह वर्ल्ड बैंक की रिपोर्ट भारत में गरीबी घटने की तस्वीर के साथ रोजगार और क्षेत्रीय असमानता जैसी चुनौतियों की ओर भी ध्यान दिलाती है।

