नई दिल्ली. ओडिशा सरकार ने उच्च और तकनीकी शिक्षा में अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और सामाजिक व शैक्षणिक रूप से पिछड़ा वर्ग (SEBC) के लिए कुल 50 प्रतिशत आरक्षण को मंजूरी दे दी है। यह अहम फैसला शनिवार को हुई राज्य कैबिनेट बैठक में लिया गया।
नई नीति के तहत ST वर्ग के लिए आरक्षण 12 प्रतिशत से बढ़ाकर 22.5 प्रतिशत, SC वर्ग के लिए 8 प्रतिशत से बढ़ाकर 16.25 प्रतिशत कर दिया गया है। वहीं, SEBC छात्रों के लिए पहली बार 11.25 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया गया है।
मेडिकल, इंजीनियरिंग से लेकर आईटीआई-पॉलीटेक्निक तक लागू होगी नीति
राज्य सरकार की ओर से जारी नई व्यवस्था सभी राज्य विश्वविद्यालयों, संबद्ध कॉलेजों और तकनीकी संस्थानों में लागू होगी। इसमें आईटीआई, पॉलीटेक्निक, मेडिकल, इंजीनियरिंग और अन्य प्रोफेशनल कोर्स भी शामिल हैं।
यह आरक्षण नीति जिन पाठ्यक्रमों पर लागू होगी, उनमें शामिल हैं
इंजीनियरिंग
टेक्नोलॉजी
मैनेजमेंट
कंप्यूटर एप्लीकेशन
मेडिसिन और सर्जरी
डेंटल
नर्सिंग
फार्मेसी
एलाइड हेल्थ साइंसेज
वेटरनरी साइंस
आयुर्वेद
होम्योपैथी
एग्रीकल्चर और संबद्ध विज्ञान
आर्किटेक्चर
प्लानिंग
सिनेमैटिक आर्ट एंड टेक्नोलॉजी
अन्य अधिसूचित स्नातक और स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम
मेडिकल और इंजीनियरिंग सीटों का नया आरक्षण बंटवारा
नई आरक्षण व्यवस्था के बाद ओडिशा में कुल 2,421 मेडिकल सीटों (UG और PG) में से—
545 सीटें ST छात्रों के लिए आरक्षित होंगी
393 सीटें SC छात्रों के लिए आरक्षित होंगी
272 सीटें SEBC छात्रों के लिए आरक्षित होंगी
वहीं, 44,579 इंजीनियरिंग सीटों में से—
10,030 सीटें ST वर्ग के लिए
7,244 सीटें SC वर्ग के लिए
5,015 सीटें SEBC वर्ग के लिए आरक्षित की जाएंगी
सामाजिक न्याय और प्रतिनिधित्व की दिशा में बड़ा कदम सरकार का कहना है कि यह फैसला सामाजिक न्याय, समान अवसर और शैक्षणिक सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के लिए लिया गया है।
पहले जहां SC समुदाय की आबादी 17 प्रतिशत से अधिक होने के बावजूद केवल 8 प्रतिशत आरक्षण दिया जा रहा था, वहीं SEBC वर्ग के लिए कोई अलग आरक्षण व्यवस्था नहीं थी। इससे शिक्षा के क्षेत्र में प्रतिनिधित्व और अवसरों को लेकर असमानता बनी हुई थी।
मुख्यमंत्री मोहन माझी ने क्या कहा
मुख्यमंत्री मोहन माझी ने इस फैसले को सामाजिक न्याय की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताते हुए कहा कि राज्य सरकार ने लंबे समय से चली आ रही असमानता को दूर करने का प्रयास किया है।
उन्होंने कहा,
“ओडिशा में अनुसूचित जनजाति को 22.5 प्रतिशत, अनुसूचित जाति को 16.25 प्रतिशत और सामाजिक व शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्ग को 11.25 प्रतिशत आरक्षण मिलेगा। SEBC वर्ग के लिए पहले कोई आरक्षण नहीं था, जिससे उन्हें कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता था। पिछली सरकार ने इस समस्या के समाधान और न्याय दिलाने की दिशा में कोई ठोस पहल नहीं की थी।”
क्या बदलेगा इस फैसले से?
नई आरक्षण नीति लागू होने के बाद -पिछड़े और वंचित वर्गों की उच्च शिक्षा में भागीदारी बढ़ेगी। मेडिकल और तकनीकी संस्थानों में सामाजिक प्रतिनिधित्व मजबूत होगा SC, ST और SEBC छात्रों को अधिक अवसर मिलेंगे।
राज्य की शिक्षा व्यवस्था में समावेशी विकास को बढ़ावा मिलेगा
ओडिशा कैबिनेट का यह फैसला राज्य की शिक्षा नीति में एक बड़ा सामाजिक और राजनीतिक बदलाव माना जा रहा है। खासकर SEBC वर्ग को पहली बार आरक्षण दिए जाने और SC-ST को बढ़ी हुई हिस्सेदारी मिलने से यह कदम आने वाले समय में राज्य की शैक्षणिक और सामाजिक संरचना पर बड़ा असर डाल सकता है।
