नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमनाथ मंदिर के पुनर्स्थापन के 75 वर्ष पूरे होने पर कहा कि भारत का हर हिस्सा पवित्र है और देश को एकता की गहरी भावना से जोड़ता है। उन्होंने कहा कि आज दुनिया जब संघर्ष और मतभेदों से जूझ रही है, तब यह भावना पहले से ज्यादा महत्वपूर्ण हो गई है। प्रधानमंत्री ने गुजरात स्थित Somnath Temple के पुनर्निर्माण और श्रद्धालुओं के लिए दोबारा खोले जाने के 75 वर्ष पूरे होने के अवसर पर एक हस्ताक्षरित लेख लिखा।
सोमनाथ देता है सभ्यता और पुनर्जागरण का संदेश
पीएम मोदी ने कहा कि सोमनाथ मंदिर भारत की सभ्यता और सांस्कृतिक चेतना का प्रतीक है। उन्होंने मंदिर के सामने फैले समुद्र और उसकी लहरों का जिक्र करते हुए कहा कि यह हमें सिखाता है कि चाहे कितने भी बड़े तूफान आएं, इंसान फिर से मजबूती और सम्मान के साथ खड़ा हो सकता है। उन्होंने लिखा कि समुद्र की लहरें हर पीढ़ी को यह याद दिलाती हैं कि लोगों की आत्मा और संस्कृति को लंबे समय तक दबाया नहीं जा सकता।
इतिहास के संघर्षों के बावजूद कायम रही आस्था
प्रधानमंत्री ने कहा कि इतिहास में कई साम्राज्य आए और गए, आक्रमण हुए और समय बदला, लेकिन सोमनाथ लोगों की चेतना और आस्था में हमेशा जीवित रहा। उन्होंने प्राचीन शास्त्रों का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रभास क्षेत्र की परिक्रमा पूरी पृथ्वी की परिक्रमा के समान मानी गई है। लोग यहां केवल पूजा के लिए नहीं आते, बल्कि एक ऐसी सभ्यता की निरंतरता को महसूस करने आते हैं जिसकी ज्योति कभी बुझी नहीं।
मंदिर की रक्षा और पुनर्निर्माण करने वालों को किया याद
पीएम मोदी ने उन सभी महान व्यक्तित्वों को याद किया जिन्होंने अलग-अलग समय में सोमनाथ मंदिर की रक्षा, पुनर्निर्माण और सांस्कृतिक विरासत को बचाने में योगदान दिया। उन्होंने लक्षुलीश, सोम शर्मा, धारासेन चतुर्थ, भीमदेव, जयपाल और आनंदपाल जैसे शासकों और विद्वानों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन लोगों ने आक्रमणों के खिलाफ सभ्यता और संस्कृति की रक्षा की।
अहिल्याबाई होल्कर और वीर योद्धाओं के योगदान का उल्लेख
प्रधानमंत्री ने Ahilyabai Holkar को भी याद किया और कहा कि कठिन समय में उन्होंने सोमनाथ में आस्था की परंपरा को जीवित रखा। इसके साथ ही उन्होंने बड़ौदा के गायकवाड़ शासकों, वीर हमीरजी गोहिल और वीर वेगड़ाजी भील जैसे योद्धाओं के साहस और बलिदान को भी श्रद्धांजलि दी। पीएम मोदी ने कहा कि इन सभी का योगदान सोमनाथ की जीवंत स्मृति का हिस्सा बन चुका है।
एकता और सांस्कृतिक चेतना का प्रतीक है सोमनाथ
प्रधानमंत्री ने कहा कि सोमनाथ केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक शक्ति, आध्यात्मिक चेतना और एकता का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि यह मंदिर आने वाली पीढ़ियों को संघर्षों के बीच भी अपनी पहचान और मूल्यों को बनाए रखने की प्रेरणा देता रहेगा।
