नई दिल्ली: केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि देश के 19 राज्यों में अब तक 9.25 करोड़ किसान आईडी बनाई जा चुकी हैं। उन्होंने यह जानकारी विभिन्न राज्यों के कृषि मंत्रियों के साथ हुई एक समीक्षा बैठक के दौरान दी।
बैठक में केंद्रीय मंत्री ने राज्यों को निर्देश दिया कि उर्वरकों की जमाखोरी और कालाबाजारी के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएं, ताकि किसानों को समय पर और उचित दर पर खाद उपलब्ध हो सके।
किसानों को फसल का उचित दाम मिले, शिकायतों का समय पर हो समाधान
शिवराज सिंह चौहान बोले- खरीद सीधे किसानों से होनी चाहिए समीक्षा बैठक के दौरान केंद्रीय मंत्री ने कहा कि किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिलना चाहिए और उनकी शिकायतों का समय पर निपटारा होना जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकारी खरीद की प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने के लिए फसलों की खरीद सीधे किसानों से की जानी चाहिए।
शिवराज सिंह चौहान ने स्पष्ट किया कि कृषि व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए राज्यों को जमीनी स्तर पर निगरानी बढ़ानी होगी।
FAQ गुणवत्ता वाली उपज की ही हो खरीद
राज्यों को मंजूरी वाली फसलों की खरीद में गुणवत्ता मानकों का पालन करने का निर्देश केंद्रीय कृषि मंत्री ने राज्यों को यह भी निर्देश दिया कि जिन फसलों की खरीद के लिए मंजूरी दी गई है, उनकी खरीद केवल FAQ (Fair Average Quality) यानी मानक गुणवत्ता वाली उपज तक ही सीमित रहे।
उन्होंने कहा कि खरीद प्रक्रिया में गुणवत्ता से समझौता नहीं होना चाहिए, ताकि किसानों और उपभोक्ताओं दोनों के हित सुरक्षित रह सकें।
आधार लिंक पोर्टल पर होगा किसान पंजीकरण
खरीद केंद्रों पर बायोमेट्रिक या फेस ऑथेंटिकेशन अनिवार्य करने के निर्देश शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि किसानों का पंजीकरण आधार-लिंक्ड पोर्टल पर किया जाना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने निर्देश दिया कि खरीद केंद्रों पर बायोमेट्रिक या फेस ऑथेंटिकेशन को अनिवार्य बनाया जाए। इस कदम का उद्देश्य खरीद प्रक्रिया को पारदर्शी, डिजिटल और धांधली-मुक्त बनाना है। सरकार का मानना है कि इससे फर्जी पंजीकरण और बिचौलियों की भूमिका को काफी हद तक कम किया जा सकेगा।
देश को 5 कृषि-जलवायु क्षेत्रों में बांटकर होंगी क्षेत्रीय कृषि कॉन्फ्रेंस
पश्चिमी क्षेत्र की पहली कॉन्फ्रेंस 7 अप्रैल को जयपुर में होगी आयोजित केंद्रीय मंत्री ने क्षेत्रीय कृषि कॉन्फ्रेंस के आयोजन की भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि देश को 5 कृषि-जलवायु (Agro-Climatic) क्षेत्रों में बांटा जाएगा और हर क्षेत्र की जरूरतों तथा चुनौतियों पर विस्तृत चर्चा की जाएगी। उन्होंने कहा कि इस श्रृंखला के तहत पश्चिमी क्षेत्र की पहली कृषि कॉन्फ्रेंस 7 अप्रैल को जयपुर में आयोजित होगी।
इस सम्मेलन में कृषि उत्पादन, फसल विविधीकरण, जल प्रबंधन, उर्वरक उपयोग और किसानों की आय बढ़ाने जैसे मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है।
किसानों के लिए डिजिटल और पारदर्शी व्यवस्था पर सरकार का जोर
कृषि खरीद, पंजीकरण और निगरानी व्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा कदम केंद्रीय कृषि मंत्री के इस बयान से साफ है कि सरकार अब किसानों की पहचान, खरीद व्यवस्था और कृषि प्रशासन को और ज्यादा डिजिटल और पारदर्शी बनाने पर जोर दे रही है। 9.25 करोड़ किसान आईडी का आंकड़ा इस दिशा में एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। वहीं, उर्वरक वितरण और फसल खरीद में सख्ती लाने के निर्देश से किसानों को राहत मिलने की उम्मीद है।
