नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महिला आरक्षण कानून (Women Reservation Act) में प्रस्तावित संशोधनों के समर्थन में सभी सांसदों से आगे आने की अपील की है। उन्होंने कहा कि यह केवल एक विधायी प्रक्रिया नहीं, बल्कि भारत की करोड़ों महिलाओं की आकांक्षाओं और देश की लोकतांत्रिक प्रतिबद्धता का प्रतीक है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की ‘नारी शक्ति’ ने देश के विकास, सामाजिक परिवर्तन और आर्थिक उन्नति में हमेशा महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। ऐसे में अब समय आ गया है कि उनकी भागीदारी राजनीति और विधायी संस्थाओं में भी उसी अनुपात में दिखाई दे।
‘यह सिर्फ कानून नहीं, देश की सोच का विस्तार’
प्रधानमंत्री मोदी ने गुरुवार को अपनी वेबसाइट narendramodi.in पर प्रकाशित एक हस्ताक्षरित लेख में महिला आरक्षण कानून में बदलावों को लेकर विस्तार से अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि इस विषय को सिर्फ एक कानूनी संशोधन के रूप में देखना गलत होगा। उनके अनुसार, यह भारत की उस सभ्यतागत सोच का विस्तार है, जिसमें महिलाओं को सदैव सम्मान, भागीदारी और नेतृत्व का स्थान दिया गया है। PM मोदी ने कहा कि महिलाओं के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य, आर्थिक सहायता और सामाजिक सुरक्षा के क्षेत्र में पिछले वर्षों में कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं, जिससे उनकी सामाजिक और आर्थिक भागीदारी मजबूत हुई है।
‘राजनीति में महिलाओं की भागीदारी अभी भी कम’
प्रधानमंत्री ने इस बात पर चिंता जताई कि देश की करीब आधी आबादी महिलाएं हैं, लेकिन राजनीति और विधानमंडलों में उनकी भागीदारी अभी भी उनकी वास्तविक भूमिका के अनुरूप नहीं है।
उन्होंने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि वर्षों से महिलाओं को लोकतांत्रिक संस्थाओं में उनका उचित प्रतिनिधित्व दिलाने की बात होती रही, लेकिन यह लक्ष्य लंबे समय तक अधूरा ही रहा।
PM मोदी ने कहा:
महिलाओं ने देश निर्माण में हमेशा मजबूत भूमिका निभाई
लेकिन संसद और विधानसभाओं में उनका प्रतिनिधित्व सीमित रहा
यह अंतर अब खत्म किया जाना चाहिए
‘कई बार बिल आए, लेकिन मंजिल तक नहीं पहुंचे’
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने लेख में याद दिलाया कि महिलाओं को आरक्षण देने के लिए अतीत में कई बार प्रयास किए गए। उन्होंने कहा: “कमेटियां बनीं, बिल के ड्राफ्ट लाए गए, लेकिन वे कभी मंजिल तक नहीं पहुंच सके।” हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि इस पूरे मुद्दे पर हमेशा एक व्यापक सहमति रही कि महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी बढ़नी चाहिए।
2023 में संसद ने पास किया था ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’
प्रधानमंत्री मोदी ने सितंबर 2023 में संसद द्वारा पारित ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ का भी उल्लेख किया। उन्होंने इसे अपने जीवन के सबसे विशेष क्षणों में से एक बताया। उन्होंने कहा कि यह कानून सर्वसम्मति और राष्ट्रीय भावना के साथ आगे बढ़ाया गया था और अब उसके प्रभावी क्रियान्वयन तथा उससे जुड़े संशोधनों को भी उसी भावना से देखा जाना चाहिए।
क्या है नारी शक्ति वंदन अधिनियम?
यह कानून महिलाओं को लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में आरक्षण देने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जाता है।
प्रधानमंत्री का मानना है कि यह कानून भारत के लोकतंत्र को और अधिक समावेशी, प्रतिनिधिक और मजबूत बनाएगा।
संविधान की भावना से जुड़ा है यह कदम
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि महिलाओं के लिए राजनीतिक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना भारतीय संविधान की मूल भावना से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि संविधान निर्माताओं ने ऐसे भारत की कल्पना की थी, जहां समानता सिर्फ कागजों में नहीं, बल्कि व्यवहार में भी दिखे। PM मोदी के मुताबिक महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी बढ़ाना,लोकतंत्र की गुणवत्ता को मजबूत करना समावेशी शासन व्यवस्था बनाना ये सभी कदम संविधान के उस विजन को आगे बढ़ाते हैं, जिसमें समान अवसर और समान प्रतिनिधित्व शामिल है।
‘हर देरी लोकतंत्र को कमजोर करेगी’
प्रधानमंत्री मोदी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि महिलाओं के प्रतिनिधित्व को आगे बढ़ाने में हर देरी, भारत के लोकतंत्र की गुणवत्ता और समावेशिता को कमजोर करेगी। उन्होंने कहा कि जब भारत आज तेजी से विकास और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहा है, तब महिलाओं की भागीदारी को टालना एक असंतुलन पैदा करेगा। उनके अनुसार, अगर समय रहते यह कदम नहीं उठाया गया, तो भारत की प्रगति की रफ्तार और लोकतांत्रिक मजबूती दोनों प्रभावित हो सकती हैं।
‘यह समय राजनीति से ऊपर उठने का है’
प्रधानमंत्री मोदी ने सभी सांसदों से अपील करते हुए कहा कि यह मुद्दा किसी एक दल, सरकार या विपक्ष का नहीं, बल्कि राष्ट्रहित और भविष्य की पीढ़ियों का है। उन्होंने कहा कि ऐसे ऐतिहासिक अवसर नेताओं को यह याद दिलाते हैं कि लोकतंत्र की असली ताकत उसकी विकासशील और समावेशी प्रकृति में होती है।
PM मोदी का संदेश
यह समय सामूहिक जिम्मेदारी निभाने का है
संसद को महिलाओं के अधिकारों पर एकजुटता दिखानी चाहिए
संशोधन व्यापक सहमति और राष्ट्रीय हित से प्रेरित होने चाहिए
‘नारी शक्ति’ के प्रति देश का कर्तव्य
प्रधानमंत्री ने कहा कि यह क्षण सिर्फ एक राजनीतिक फैसला नहीं, बल्कि यह उस कर्ज को चुकाने जैसा है जो देश अपनी ‘नारी शक्ति’ पर वर्षों से महसूस करता आया है। उन्होंने कहा कि महिलाओं ने हर क्षेत्र में अपनी क्षमता साबित की है, चाहे वह शिक्षा हो, विज्ञान हो, प्रशासन हो, सेना हो, खेल हो या उद्यमिता। अब देश की जिम्मेदारी है कि उन्हें नीति निर्माण और कानून निर्माण में भी पर्याप्त जगह दी जाए।
‘एकजुट होकर आगे बढ़ें’
अपने लेख के अंत में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत ने हमेशा राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर मतभेदों से ऊपर उठकर एकता दिखाई है। उन्होंने इसे भी वैसा ही एक अवसर बताया और कहा कि हम सब मिलकर संवैधानिक मूल्यों को और मजबूत करें और राष्ट्रीय प्रगति के लिए अपनी नारी शक्ति को सशक्त बनाएं।
क्यों अहम है यह बयान?
प्रधानमंत्री मोदी का यह बयान ऐसे समय में आया है जब महिला प्रतिनिधित्व, लोकतांत्रिक भागीदारी और राजनीतिक सुधार जैसे मुद्दे एक बार फिर राष्ट्रीय चर्चा के केंद्र में हैं।
उनकी यह अपील आने वाले समय में महिला आरक्षण कानून के प्रभावी क्रियान्वयन और उससे जुड़े राजनीतिक विमर्श को नई दिशा दे सकती है।
महिला आरक्षण कानून में संशोधनों को लेकर प्रधानमंत्री मोदी की यह अपील सिर्फ एक राजनीतिक संदेश नहीं, बल्कि महिलाओं की लोकतांत्रिक हिस्सेदारी को मजबूत करने का राष्ट्रीय आह्वान है।
यदि इस दिशा में व्यापक सहमति बनती है, तो यह भारत के लोकतंत्र को अधिक प्रतिनिधिक, संतुलित और सशक्त बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम साबित हो सकता है।
