नई दिल्ली. नई दिल्ली में मंगलवार को आयोजित राष्ट्रीय पंचायत पुरस्कार 2025 समारोह में देशभर की 42 पंचायतों को समावेशी, सहभागी और सतत ग्रामीण विकास में उत्कृष्ट योगदान के लिए सम्मानित किया गया। केंद्रीय पंचायती राज, मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्री Rajiv Ranjan Singh ने विजेता पंचायतों को पुरस्कार प्रदान किए। इस अवसर पर केंद्रीय राज्य मंत्री S. P. Singh Baghel, असम सरकार के मंत्री Rameswar Teli, पंचायती राज मंत्रालय के सचिव Vivek Bharadwaj सहित कई वरिष्ठ अधिकारी और जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।
ग्रामीण विकास और सुशासन में उत्कृष्ट योगदान का सम्मान
राष्ट्रीय पंचायत पुरस्कारों का उद्देश्य जमीनी स्तर पर बेहतर शासन व्यवस्था को बढ़ावा देना और विकसित भारत 2047 के लक्ष्य में पंचायतों की भूमिका को प्रोत्साहित करना है। समारोह के दौरान मंत्रालय ने पुरस्कार विजेता पंचायतों की उपलब्धियों और श्रेष्ठ कार्यप्रणालियों पर आधारित एक ई-बुक तथा राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों की बेहतरीन पहल का संकलन भी जारी किया।
‘ग्रामोदय से भारत उदय’ की सोच को मजबूत कर रहीं पंचायतें
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राजीव रंजन सिंह ने कहा कि पुरस्कार प्राप्त पंचायतों की उपलब्धियां देश में लोकतंत्र की जड़ों के और मजबूत होने का प्रमाण हैं। उन्होंने कहा कि Narendra Modi के विकसित भारत के विजन को साकार करने का मार्ग सशक्त गांवों और स्थानीय स्वशासन से होकर गुजरता है। उन्होंने “ग्रामोदय से भारत उदय” के मंत्र को ग्रामीण विकास की आधारशिला बताया।
महिलाओं की बढ़ती भागीदारी बनी प्रेरणा
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि सम्मानित 42 पंचायतों में से 22 का नेतृत्व महिलाएं कर रही हैं। उन्होंने इसे ग्रामीण प्रशासन और विकास में महिलाओं की बढ़ती भूमिका का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि पंचायतों में महिला नेतृत्व नई ऊर्जा और सकारात्मक बदलाव लेकर आ रहा है।
तकनीक से मजबूत हो रहा पंचायत शासन
राजीव रंजन सिंह ने पंचायत एडवांसमेंट इंडेक्स (PAI) 2.0, ई-ग्रामस्वराज और एआई आधारित सभासार (SabhaSaar) जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म का उल्लेख करते हुए कहा कि ये पहलें पंचायतों में पारदर्शिता, जवाबदेही और जन-केंद्रित शासन को मजबूत कर रही हैं। उन्होंने विजेता पंचायतों से अपने सफल मॉडल अन्य पंचायतों के साथ साझा करने और नवाचार को बढ़ावा देने का आह्वान किया।
स्थानीय निकायों के लिए रिकॉर्ड वित्तीय सहायता की सिफारिश
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि 16वें वित्त आयोग ने स्थानीय निकायों के लिए 4.35 लाख करोड़ रुपये की सिफारिश की है, जो 15वें वित्त आयोग की तुलना में 84 प्रतिशत अधिक है। उन्होंने कहा कि इससे पंचायतों को विकास कार्यों को गति देने में मदद मिलेगी।
ढाई लाख से अधिक पंचायतों में से हुआ चयन
राज्य मंत्री एस.पी. सिंह बघेल ने कहा कि देश की 2.5 लाख से अधिक पंचायतों में से विजेताओं का चयन एक पारदर्शी और कठोर मूल्यांकन प्रक्रिया के आधार पर किया गया है। उन्होंने बताया कि पुरस्कारों का निर्धारण स्थानीयकृत सतत विकास लक्ष्यों (LSDGs) और पंचायत एडवांसमेंट इंडेक्स के मानकों के अनुसार किया गया।
डेटा आधारित और जवाबदेह संस्थाओं में बदलीं पंचायतें
पंचायती राज मंत्रालय के सचिव विवेक भारद्वाज ने कहा कि पंचायत राज संस्थाएं अब डेटा आधारित और अधिक जवाबदेह संस्थाओं के रूप में विकसित हो चुकी हैं। उन्होंने अन्य पंचायतों से भी पुरस्कार विजेता पंचायतों के मॉडल अपनाने और जनभागीदारी आधारित शासन को मजबूत करने की अपील की।
दो श्रेणियों में दिए गए पुरस्कार
इस वर्ष राष्ट्रीय पंचायत पुरस्कार दो प्रमुख श्रेणियों में प्रदान किए गए। 17 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की 34 ग्राम पंचायतों को सतत विकास से जुड़े विभिन्न विषयों पर उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए दीनदयाल उपाध्याय पंचायत सतत विकास पुरस्कार दिया गया। वहीं जिला, ब्लॉक और ग्राम स्तर की आठ पंचायतों को समग्र उत्कृष्टता के लिए नानाजी देशमुख सर्वोत्तम पंचायत सतत विकास पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
50 लाख से 5 करोड़ रुपये तक की प्रोत्साहन राशि
पुरस्कार विजेता पंचायतों को राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान के तहत पंचायत प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत 50 लाख रुपये से लेकर 5 करोड़ रुपये तक की वित्तीय सहायता प्रदान की गई। यह राशि पंचायतों द्वारा आगे के विकास कार्यों और जनकल्याणकारी योजनाओं में उपयोग की जाएगी।
