नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया ने आज एक याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें केंद्र सरकार को जातिगत जनगणना रोकने और एकल संतान वाले परिवारों को आर्थिक प्रोत्साहन देने की नीति बनाने के निर्देश देने की मांग की गई थी।
अदालत का फैसला क्या रहा?
अदालत ने स्पष्ट रूप से कहा कि इस याचिका में कोई ठोस आधार नहीं पाया गया, जिसके चलते इसे खारिज कर दिया गया। याचिका में जातिगत जनगणना की प्रक्रिया पर रोक लगाने और उससे जुड़ी नीतियों में हस्तक्षेप की मांग की गई थी।
पिछली याचिका पर भी नहीं मिली थी राहत
इससे पहले 2 फरवरी को भी सुप्रीम कोर्ट ने एक अन्य जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई से इनकार कर दिया था। उस याचिका में 2027 की जनगणना में जातिगत आंकड़ों को दर्ज, वर्गीकृत और सत्यापित करने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए थे।
2027 की जनगणना की खास बातें
2027 की जनगणना देश की 16वीं राष्ट्रीय जनगणना होगी, यह स्वतंत्र भारत की पहली पूरी तरह डिजिटल जनगणना होगी,इसमें पहली बार 1931 के बाद व्यापक स्तर पर जातिगत गणना शामिल किए जाने की तैयारी है
क्यों महत्वपूर्ण है यह मामला?
जातिगत जनगणना को लेकर देश में लंबे समय से बहस चल रही है। इसके समर्थकों का कहना है कि इससे सामाजिक-आर्थिक नीतियां अधिक प्रभावी बनेंगी, जबकि विरोधियों को आशंका है कि इससे सामाजिक विभाजन बढ़ सकता है। अब सरकार की ओर से 2027 की डिजिटल जनगणना की तैयारी तेज होने की उम्मीद है, जिसमें डेटा संग्रह और वर्गीकरण की नई तकनीकों का इस्तेमाल किया जाएगा।
