नई दिल्ली. रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने शनिवार को अग्नि MIRV इंटर-कॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) का सफल परीक्षण किया। यह परीक्षण शुक्रवार को ओडिशा तट के पास स्थित डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से किया गया।DRDO के अनुसार, मिसाइल का परीक्षण मल्टीपल पेलोड्स के साथ किया गया, जिसमें अलग-अलग स्थानों पर मौजूद कई लक्ष्यों को निशाना बनाया गया। ये लक्ष्य हिंद महासागर क्षेत्र में बड़े भौगोलिक दायरे में फैले हुए थे। रक्षा मंत्री Rajnath Singh ने इस उपलब्धि पर DRDO को बधाई देते हुए कहा कि यह परीक्षण देश की रक्षा तैयारियों को नई मजबूती देगा और बढ़ते सुरक्षा खतरों से निपटने की क्षमता को बढ़ाएगा।
अग्नि-6 कार्यक्रम को मंजूरी का इंतजार
यह सफलता ऐसे समय आई है जब हाल ही में DRDO प्रमुख Samir V Kamat ने कहा था कि अग्नि-6 मिसाइल कार्यक्रम सरकार की मंजूरी का इंतजार कर रहा है। उन्होंने बताया कि इस परियोजना के लिए सभी जरूरी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं और सरकार से हरी झंडी मिलते ही काम शुरू कर दिया जाएगा। अग्नि-6 मिसाइल की रेंज 6,000 से 10,000 किलोमीटर के बीच होने की संभावना है। यह मिसाइल भारत की लंबी दूरी की मारक क्षमता को बढ़ाने के साथ-साथ परमाणु प्रतिरोधक क्षमता को भी मजबूत करेगी। इसमें MIRV यानी मल्टीपल इंडिपेंडेंटली टार्गेटेबल री-एंट्री व्हीकल तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा, जिससे यह अलग-अलग लक्ष्यों पर कई परमाणु वारहेड दाग सकेगी।
DRDO ने स्वदेशी ग्लाइड वेपन सिस्टम का भी किया सफल परीक्षण
इसी बीच, शुक्रवार को ओडिशा तट के पास स्वदेशी रूप से विकसित ग्लाइड वेपन सिस्टम का पहला सफल फ्लाइट ट्रायल भी किया गया। रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, टैक्टिकल एडवांस्ड रेंज ऑगमेंटेशन (TARA) सिस्टम को बिना गाइडेड वारहेड्स को प्रिसिजन गाइडेड हथियारों में बदलने के लिए विकसित किया गया है। इस सिस्टम को हैदराबाद स्थित रिसर्च सेंटर इमारत (RCI) और DRDO ने मिलकर तैयार किया है। इसका उद्देश्य कम लागत वाले हथियारों की सटीकता और मारक क्षमता को बढ़ाना है, ताकि जमीनी लक्ष्यों को प्रभावी तरीके से नष्ट किया जा सके। रक्षा मंत्रालय ने बताया कि यह अत्याधुनिक और कम लागत वाली तकनीक का इस्तेमाल करने वाला देश का पहला ग्लाइड वेपन सिस्टम है। इसके उत्पादन के लिए भारतीय उद्योगों और डेवलपमेंट कम प्रोडक्शन पार्टनर्स (DcPP) के साथ मिलकर काम शुरू कर दिया गया है।
