नई दिल्ली. भारत की BRICS अध्यक्षता के तहत इंदौर में आयोजित BRICS देशों के कृषि मंत्रियों के सम्मेलन में सदस्य देशों ने सर्वसम्मति से ‘इंदौर घोषणा पत्र’ (Indore Declaration) को अपनाया। यह घोषणा पत्र वैश्विक खाद्य सुरक्षा, जलवायु अनुकूल खेती, डिजिटल कृषि और कृषि व्यापार को अधिक पारदर्शी एवं न्यायसंगत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। सम्मेलन की अध्यक्षता केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री Shivraj Singh Chouhan ने की।
बैठक के समापन पर शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि यह घोषणा पत्र वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच आशा, सहयोग और साझा जिम्मेदारी का संदेश देता है। उन्होंने कहा कि BRICS देशों ने किसानों को नीति निर्माण के केंद्र में रखने का संकल्प लिया है, ताकि कृषि विकास का लाभ सीधे किसानों तक पहुंच सके।
छोटे किसानों, महिलाओं और युवाओं पर विशेष फोकस
इंदौर घोषणा पत्र में छोटे और सीमांत किसानों, महिलाओं तथा युवाओं को कृषि विकास का प्रमुख आधार माना गया है। BRICS समूह दुनिया की लगभग आधी आबादी का प्रतिनिधित्व करता है और वैश्विक खाद्यान्न उत्पादन में 40 प्रतिशत से अधिक योगदान देता है। ऐसे में सदस्य देशों ने खाद्य सुरक्षा, पोषण, जलवायु परिवर्तन और कृषि व्यापार से जुड़े मुद्दों पर साझा रोडमैप तैयार करने पर सहमति जताई है।
भारत ने इस वर्ष प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में BRICS की अध्यक्षता संभाली है। इसी क्रम में इंदौर में आयोजित इस सम्मेलन में विभिन्न देशों के करीब 60 प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
चार नई पहलें बनीं सम्मेलन की बड़ी उपलब्धि
सम्मेलन की सबसे बड़ी उपलब्धियों में चार नई संस्थागत पहलों की शुरुआत रही। इनमें कृषि पारिस्थितिकी और पुनर्योजी खेती (Regenerative Agriculture) के लिए उत्कृष्टता केंद्रों का BRICS नेटवर्क, डिजिटल कृषि नेटवर्क, बीज प्रणाली में किसानों के अधिकारों पर वैश्विक मंच और कृषि आदानों तथा आनुवंशिक संसाधनों पर सहयोग मंच शामिल हैं।
इन पहलों का उद्देश्य कृषि क्षेत्र में अनुसंधान, तकनीक और ज्ञान के आदान-प्रदान को बढ़ावा देना है, ताकि किसानों को आधुनिक और टिकाऊ खेती के साधन उपलब्ध हो सकें।
भारत निभाएगा महत्वपूर्ण समन्वयक की भूमिका
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि भारत इन नई पहलों में प्रमुख समन्वयक की भूमिका निभाएगा। भारतीय कृषि प्रणाली अनुसंधान संस्थान (Indian Institute of Farming Systems Research) को प्राकृतिक खेती के लिए उत्कृष्टता केंद्र के रूप में नामित किया गया है। वहीं, डिजिटल कृषि नेटवर्क के समन्वय की जिम्मेदारी IIT दिल्ली को सौंपी गई है।
उन्होंने कहा कि भारत का लक्ष्य कृषि नवाचारों को प्रयोगशालाओं से खेतों तक पहुंचाना है, ताकि किसानों को नई तकनीकों का सीधा लाभ मिल सके।
खाद्य सुरक्षा और जलवायु चुनौतियों पर साझा रणनीति
इंदौर घोषणा पत्र में निष्पक्ष और पारदर्शी कृषि व्यापार को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता दोहराई गई है। इसके साथ ही खाद्य नुकसान को कम करने, एल नीनो जैसी जलवायु चुनौतियों से निपटने और कृषि क्षेत्र को अधिक लचीला बनाने पर भी जोर दिया गया है।
सम्मेलन के दौरान कार्बन क्रेडिट, स्वदेशी बीजों के संरक्षण और छोटे किसानों तक तकनीक पहुंचाने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर भी चर्चा हुई।
उर्वरकों की कीमतों पर किसानों को राहत देने का भरोसा
बढ़ती उर्वरक कीमतों को लेकर पूछे गए सवालों के जवाब में शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि भारत सरकार किसानों को वैश्विक मूल्य वृद्धि का बोझ नहीं उठाने देगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि यूरिया और डीएपी जैसे उर्वरकों पर सब्सिडी जारी रहेगी और अतिरिक्त लागत का भार सरकार वहन करेगी।
तकनीक आधारित और टिकाऊ कृषि की दिशा में बड़ा कदम
सम्मेलन में कृषि क्षेत्र में महिलाओं, युवाओं और एग्री-स्टार्टअप्स की भूमिका पर भी विशेष चर्चा हुई। सदस्य देशों ने माना कि भविष्य की कृषि व्यवस्था अधिक टिकाऊ, तकनीक आधारित और नवाचार केंद्रित होनी चाहिए।
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि इंदौर घोषणा पत्र केवल एक औपचारिक दस्तावेज नहीं है, बल्कि किसानों के हित में ठोस कदम उठाने की प्रतिबद्धता है। उन्होंने विश्वास जताया कि BRICS देशों का यह सहयोग वैश्विक कृषि क्षेत्र को नई दिशा देगा और खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
