नई दिल्ली. भारत का Semiconductor Market आने वाले वर्षों में तेजी से बढ़ने की संभावना है। EY और India Electronics and Semiconductor Association (IESA) की रिपोर्ट के अनुसार, भारत का सेमीकंडक्टर बाजार वर्ष 2026 के करीब 64 अरब डॉलर से बढ़कर 2035 तक 200 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि बढ़ती घरेलू मांग भारत के लिए स्थानीय उत्पादन, innovation और मजबूत supply chain तैयार करने का अवसर है।
पांच साल में तेजी से बढ़ा सेमीकंडक्टर बाजार
रिपोर्ट के मुताबिक, भारत का semiconductor market 2021 में करीब 27 अरब डॉलर का था, जो 2026 में बढ़कर लगभग 64 अरब डॉलर हो गया। इस बढ़ोतरी के पीछे इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और नई तकनीकों की बढ़ती मांग प्रमुख कारणों में शामिल है।
हालांकि घरेलू मांग बढ़ने के साथ भारत का semiconductor import bill भी तेजी से बढ़ा है। रिपोर्ट के अनुसार, semiconductor imports वित्त वर्ष 2017 के 5.7 अरब डॉलर से बढ़कर वित्त वर्ष 2025 में 30.3 अरब डॉलर हो गए। यह पांच गुना से अधिक की वृद्धि है और इस दौरान imports की compound annual growth rate करीब 23 प्रतिशत रही।
बढ़ते आयात से सामने आई घरेलू मैन्युफैक्चरिंग की जरूरत
रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती बढ़ती मांग को घरेलू manufacturing capacity में बदलने की है। इसके लिए chip design, fabrication, packaging, specialised talent और supply-chain partnerships के बीच बेहतर तालमेल जरूरी होगा।
भारत के पास इस क्षेत्र में एक मजबूत talent base भी है। रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया के करीब 20 प्रतिशत chip design talent का संबंध भारत से है। ऐसे में design capability को manufacturing और commercialisation के साथ जोड़ना अगले चरण के विकास के लिए महत्वपूर्ण माना गया है।
Consumer Electronics सबसे बड़ा demand segment
भारत के semiconductor market में फिलहाल consumer electronics की हिस्सेदारी करीब 30 प्रतिशत है। इसके बाद automotive sector करीब 16 प्रतिशत और industrial applications लगभग 15 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ प्रमुख क्षेत्रों में हैं।
इसके अलावा Artificial Intelligence, data centres, telecommunications, electric mobility और advanced manufacturing जैसे क्षेत्र भविष्य में chips की मांग को और बढ़ा सकते हैं। इन क्षेत्रों के विस्तार के साथ advanced components, packaging technologies और system-level integration की जरूरत भी बढ़ने की उम्मीद है।
Semicon 2.0 से पूरे Ecosystem पर फोकस
सरकार ने semiconductor sector को केवल manufacturing capacity तक सीमित रखने के बजाय पूरे ecosystem को मजबूत करने के लिए Semicon 2.0 को मंजूरी दी है। जुलाई 2026 में मंजूर इस कार्यक्रम के लिए ₹1,27,500 करोड़ का कुल बजट रखा गया है। इसमें chip design, machines and materials, fabs, advanced packaging, research और talent development जैसे क्षेत्रों पर जोर दिया गया है।
सरकार के मुताबिक, Semicon 2.0 का मकसद semiconductor value chain को देश में ज्यादा व्यापक बनाना और long-term policy support उपलब्ध कराना है।
Semicon 1.0 में 12 प्रोजेक्ट को मिली मंजूरी
रिपोर्ट के अनुसार, पहले चरण यानी India Semiconductor Mission/ Semicon 1.0 के लिए ₹76,000 करोड़ का प्रावधान किया गया था। इसके तहत अब तक 12 semiconductor manufacturing projects को मंजूरी मिली है, जिनमें कुल निवेश करीब ₹1.64 लाख करोड़ बताया गया है।
सरकारी जानकारी के अनुसार, इनमें से तीन कंपनियों—Micron, Kaynes और CG Semi—ने वाणिज्यिक उत्पादन शुरू कर दिया है। वहीं सरकार ने semiconductor design ecosystem में भी कई परियोजनाओं को समर्थन दिया है।
Advanced Packaging और Photonics पर भी नजर
EY-IESA रिपोर्ट में advanced packaging, compound semiconductors, photonics और chip-to-system integration को ऐसे क्षेत्र बताया गया है, जहां भारत के लिए आगे बढ़ने की संभावनाएं हैं।
रिपोर्ट ने राज्य सरकारों की semiconductor policies को Semicon India 2.0 के साथ जोड़ने और साझा infrastructure वाले integrated manufacturing clusters विकसित करने की जरूरत पर भी जोर दिया है। इससे अलग-अलग कंपनियों और suppliers के बीच ecosystem मजबूत करने में मदद मिल सकती है।
Skilled Talent तैयार करना भी जरूरी
सेमीकंडक्टर उद्योग के विस्तार के साथ specialised manpower की जरूरत भी बढ़ेगी। रिपोर्ट में semiconductor design, fabrication और advanced packaging के लिए विशेष talent-certification programmes विकसित करने की सिफारिश की गई है।
रिपोर्ट के अनुसार, अगले चरण में केवल manufacturing capacity बढ़ाना पर्याप्त नहीं होगा। भारत को innovation, technology commercialisation, indigenous intellectual property और मजबूत supply-chain ecosystem पर भी काम करना होगा।
Electronics Manufacturing में भी तेज विस्तार
सेमीकंडक्टर के अलावा भारत के broader electronics manufacturing sector में भी पिछले दशक में बड़ा विस्तार हुआ है। EY-IESA रिपोर्ट के अनुसार, देश का electronics production वित्त वर्ष 2015 के ₹1.9 लाख करोड़ से बढ़कर वित्त वर्ष 2025 में करीब ₹11.3 लाख करोड़ हो गया।
रिपोर्ट के मुताबिक, इसी अवधि में domestic electronics manufacturing करीब सात गुना और electronics exports करीब 11 गुना बढ़े।
भारत के सामने बड़ा अवसर
रिपोर्ट का निष्कर्ष है कि भारत के पास semiconductor sector में बड़ी घरेलू मांग, engineering talent, बढ़ता electronics ecosystem और सरकार की policy support मौजूद है। चुनौती यह है कि इन क्षमताओं को एक-दूसरे से जोड़कर ज्यादा घरेलू value addition और manufacturing तैयार की जाए।
अगर projected growth के अनुरूप बाजार का विस्तार होता है, तो 2035 तक 200 अरब डॉलर का semiconductor market भारत के लिए manufacturing, design, technology और supply-chain development के नए अवसर पैदा कर सकता है।
