नई दिल्ली: मतदाता सूची (Electoral Roll) में किसी व्यक्ति के नाम पर आपत्ति दर्ज कराने और नाम हटाने की मांग करने वालों के लिए चुनाव आयोग ने नए नियम लागू किए हैं। Election Commission of India (ECI) ने Form 7 के जरिए दाखिल की जाने वाली आपत्तियों की संख्या सीमित कर दी है। आयोग का उद्देश्य बिना ठोस आधार के बड़ी संख्या में आवेदन दाखिल करने की प्रवृत्ति पर रोक लगाना और मतदाताओं को होने वाली परेशानी कम करना है। चुनाव आयोग ने 9 अक्टूबर 2026 को इस संबंध में निर्देश जारी किए।
अब एक व्यक्ति कितने Form 7 आवेदन कर सकेगा?
नए दिशा-निर्देशों के अनुसार, मतदाता सूची में दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की निर्धारित अवधि के दौरान कोई व्यक्ति अधिकतम 10 Form 7 आवेदन ही दाखिल कर सकेगा। वहीं, मतदाता सूची के नियमित अपडेट यानी Continuous Updation के दौरान एक महीने में अधिकतम पांच आवेदन जमा करने की अनुमति होगी। ये सीमाएं ऑनलाइन और ऑफलाइन, दोनों माध्यमों से किए जाने वाले आवेदनों पर लागू होंगी।
चुनाव आयोग ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों (Chief Electoral Officers) को इन निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने को कहा है। इस व्यवस्था का मकसद आपत्तियों की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बनाना और निर्वाचन अधिकारियों पर अनावश्यक काम का बोझ कम करना है।
Form 7 पर सीमा लगाने की जरूरत क्यों पड़ी?
चुनाव आयोग के मुताबिक, ऐसी शिकायतें मिली थीं कि कुछ मतदाता बिना पर्याप्त आधार के बड़ी संख्या में Form 7 आवेदन दाखिल कर रहे थे। इन आपत्तियों के कारण उन लोगों को परेशानी उठानी पड़ रही थी, जिनके नाम मतदाता सूची से हटाने की मांग की गई थी। साथ ही, प्रत्येक आवेदन की जांच करने की जिम्मेदारी निभाने वाले चुनाव अधिकारियों का काम भी बढ़ रहा था।
नई व्यवस्था के जरिए आयोग का प्रयास है कि मतदाता सूची में गलत, दोहराए गए या नियमों के तहत अयोग्य नामों को हटाने की प्रक्रिया जारी रहे, लेकिन वास्तविक मतदाताओं के नामों को अनुचित तरीके से चुनौती न दी जा सके।
क्या है Form 7 और इसका इस्तेमाल कौन कर सकता है?
Form 7 का उपयोग मतदाता सूची में किसी नाम को शामिल किए जाने पर आपत्ति दर्ज कराने या पहले से दर्ज नाम को हटाने की मांग करने के लिए किया जाता है। Registration of Electors Rules, 1960 के Rule 13(2) के तहत संबंधित विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची में पहले से पंजीकृत व्यक्ति निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार आपत्ति दाखिल कर सकता है।
इस फॉर्म के जरिए किसी मतदाता की मृत्यु, स्थायी रूप से दूसरे स्थान पर चले जाने, एक से अधिक जगह नाम दर्ज होने या लागू नियमों के तहत अपात्रता जैसे निर्धारित कारणों के आधार पर नाम हटाने की मांग की जा सकती है। हालांकि, केवल Form 7 दाखिल कर देने से किसी व्यक्ति का नाम मतदाता सूची से अपने आप नहीं हट जाता।
नाम हटाने से पहले होगी जांच
चुनाव आयोग के निर्देशों के अनुसार, किसी भी आपत्ति पर फैसला लेने से पहले Electoral Registration Officer (ERO) को उसकी जांच करनी होगी। अधिकारी आवेदन में दी गई जानकारी और संबंधित तथ्यों का सत्यापन करेंगे। जरूरत पड़ने पर आपत्ति दर्ज कराने वाले व्यक्ति को भी सुना जाएगा।
जिस मतदाता के नाम को हटाने की मांग की गई है, उसे भी लागू नियमों के अनुसार अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाना चाहिए। इसके बाद ही ERO यह तय करेगा कि आपत्ति स्वीकार की जाए या खारिज कर दी जाए। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि अपुष्ट आरोपों के आधार पर किसी योग्य मतदाता का नाम सूची से न हटाया जाए।
मतदाता सूची में पारदर्शिता और वोटर के अधिकार पर जोर
मतदाता सूची को सही और अपडेट रखना चुनाव प्रक्रिया का अहम हिस्सा है। Form 7 के माध्यम से गलत या दोहराई गई प्रविष्टियों को चुनौती देने की सुविधा दी गई है, लेकिन इसका इस्तेमाल वास्तविक मतदाताओं को मनमाने ढंग से सूची से हटाने के लिए नहीं किया जा सकता।
ECI की नई व्यवस्था में मतदाता सूची की शुद्धता बनाए रखने और मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा करने के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की गई है। अब इन नियमों का प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों में निर्वाचन अधिकारी इन्हें किस तरह लागू करते हैं और प्रत्येक आपत्ति की कितनी सावधानी से जांच की जाती है।
