नई दिल्ली. भारत के प्रसिद्ध समकालीन चित्रकार और पूर्व राज्यसभा सांसद जोगेन चौधरी का 87 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। उन्होंने कोलकाता के एक निजी अस्पताल में अंतिम सांस ली। बताया गया है कि वह लंबे समय से बीमार चल रहे थे। जोगेन चौधरी भारतीय कला जगत की जानी-मानी हस्तियों में शामिल थे। चित्रकला के क्षेत्र में उनके योगदान के साथ-साथ सार्वजनिक जीवन में उनकी भूमिका भी उल्लेखनीय रही।
बांग्लादेश में हुआ जन्म, विभाजन के बाद कोलकाता आए
जोगेन चौधरी का जन्म वर्ष 1939 में फरीदपुर में हुआ था, जो अब बांग्लादेश में है। भारत के विभाजन के बाद उनका परिवार कोलकाता आ गया। यहीं से उन्होंने कला की पढ़ाई की और आगे चलकर अपनी अलग पहचान बनाई। उनकी कलाकृतियों ने उन्हें देश के प्रमुख समकालीन कलाकारों में स्थान दिलाया।
कोलकाता से पेरिस तक हासिल की कला की शिक्षा
जोगेन चौधरी ने कोलकाता के Government College of Art and Craft से कला की पढ़ाई की। इसके बाद उन्होंने पेरिस में भी प्रशिक्षण प्राप्त किया। भारतीय कला परंपरा और आधुनिक कलात्मक दृष्टिकोण के मेल ने उनके काम को अलग पहचान दी। वह अपने लंबे कलात्मक सफर के दौरान देश के प्रतिष्ठित चित्रकारों में गिने जाते रहे।
कला के क्षेत्र में मिले कई सम्मान
जोगेन चौधरी को कला के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए वर्ष 2001 में प्रतिष्ठित कालिदास सम्मान से नवाजा गया था। उन्होंने राष्ट्रपति भवन में Keeper of Art के रूप में भी काम किया। इसके अलावा, वह पश्चिम बंगाल के शांतिनिकेतन स्थित Visva-Bharati University के Kala Bhavana में प्रोफेसर रहे। इन भूमिकाओं के जरिए उन्होंने कला और कला शिक्षा के क्षेत्र में भी योगदान दिया।
राज्यसभा सांसद के तौर पर भी निभाई जिम्मेदारी
चित्रकला के अलावा जोगेन चौधरी सार्वजनिक जीवन में भी सक्रिय रहे। वह तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सदस्य के रूप में वर्ष 2014 से 2020 तक राज्यसभा में पश्चिम बंगाल का प्रतिनिधित्व करते रहे। इस दौरान उन्होंने एक कलाकार के साथ-साथ जनजीवन से जुड़े मुद्दों में भी अपनी भूमिका निभाई।
जोगेन चौधरी के निधन से भारतीय कला जगत ने एक अनुभवी कलाकार और सार्वजनिक जीवन से जुड़ी शख्सियत को खो दिया है। कला और शिक्षा के क्षेत्र में उनका योगदान लंबे समय तक याद किया जाएगा।

