नई दिल्ली. केंद्र सरकार ने अग्निपथ योजना में अहम बदलाव करते हुए अग्निवीरों की सेवा अवधि को लेकर नया प्रावधान घोषित किया है। अब चार साल की सेवा पूरी करने के बाद नियमित सशस्त्र बलों में जगह नहीं पाने वाले अग्निवीरों को दो साल का अतिरिक्त सेवा अवसर दिया जाएगा। चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल एनएस राजा सुब्रमणि ने बुधवार को कैबिनेट ब्रीफिंग के दौरान इसकी जानकारी दी।
25 फीसदी अग्निवीरों का नियमित सेवा में चयन
मौजूदा व्यवस्था के तहत अग्निपथ योजना में भर्ती होने वाले अधिकतम 25 फीसदी अग्निवीरों को योग्यता और प्रदर्शन के आधार पर नियमित सशस्त्र बलों में शामिल किया जाता है। बाकी 75 फीसदी अग्निवीरों को चार साल की सेवा पूरी करने के बाद बाहर होना पड़ता है। हालांकि, नए बदलाव के बाद इन 75 फीसदी अग्निवीरों को दो साल की अतिरिक्त सेवा का विकल्प दिया जाएगा।
सीडीएस जनरल एनएस राजा सुब्रमणि के मुताबिक, अतिरिक्त दो साल की अवधि पूरी होने के बाद नियमित सेवा में बने रहने के इच्छुक अग्निवीरों पर विचार किया जाएगा। उनका चयन तय और वस्तुनिष्ठ मानदंडों के आधार पर होगा। यानी अतिरिक्त सेवा मिलने का मतलब नियमित सेना में स्वतः भर्ती होना नहीं है।
21 नवंबर को बाहर होने वाला था पहला बैच
अग्निपथ योजना के तहत भर्ती अग्निवीरों का पहला बैच 21 नवंबर से चार साल की सेवा पूरी करने के बाद बाहर होने वाला था। भारतीय नौसेना के पहले बैच में करीब 2,100 अग्निवीर शामिल हुए थे। इनमें से लगभग 550 अग्निवीरों को 25 फीसदी की निर्धारित सीमा के तहत नियमित सेवा में शामिल किया जा चुका है। बाकी अग्निवीरों को पहले चार साल बाद सेवा से मुक्त होना था, लेकिन नए फैसले के बाद उन्हें दो साल का अतिरिक्त कार्यकाल देने का प्रस्ताव है।
भारतीय नौसेना के अलावा थल सेना और वायु सेना के पहले बैच के अग्निवीर भी 31 दिसंबर तक चार साल की सेवा पूरी करने वाले थे। तीनों सेनाओं के 18 हजार से अधिक अग्निवीरों के इस साल के अंत तक सेवा से बाहर होने की संभावना थी। अब नए प्रावधान के तहत उन्हें अतिरिक्त दो साल सेवा का अवसर मिलेगा।
क्या है अग्निपथ योजना?
केंद्र सरकार ने वर्ष 2022 में सशस्त्र बलों में भर्ती की प्रक्रिया में बदलाव के उद्देश्य से अग्निपथ योजना शुरू की थी। इसके तहत युवाओं को चार साल के लिए अग्निवीर के रूप में सेना, नौसेना और वायु सेना में भर्ती किया जाता है। भारतीय नौसेना में 10वीं और 12वीं पास युवाओं को अग्निवीर के रूप में मौका दिया जाता है। चयनित युवाओं को ओडिशा के आईएनएस चिल्का सहित विभिन्न प्रशिक्षण केंद्रों में ट्रेनिंग दी जाती है। इसके बाद उन्हें जहाजों, एयर स्क्वाड्रन और तटीय प्रतिष्ठानों में जिम्मेदारियां सौंपी जाती हैं।
कितना मिलता है अग्निवीरों को वेतन?
अग्निवीरों को पहले साल हर महीने 30 हजार रुपये का कस्टमाइज्ड पैकेज मिलता है। चौथे साल तक यह बढ़कर 40 हजार रुपये हो जाता है। इस राशि का 70 फीसदी हिस्सा हर महीने वेतन के रूप में दिया जाता है, जबकि 30 फीसदी अग्निवीर कॉर्पस फंड में जमा होता है। सरकार भी इसमें समान योगदान करती है।
चार साल की सेवा पूरी होने पर चयनित 25 फीसदी अग्निवीरों को नियमित सेवा में शामिल किया जाता है। उन्हें नियमित नौसैनिकों के लिए लागू वेतन और भत्ते मिलते हैं। वहीं, सेवा पूरी करने वाले अन्य अग्निवीरों को पहले से तय प्रावधानों के अनुसार सेवा निधि पैकेज दिया जाता है।
