नई दिल्ली. सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों को मिलने वाली राशि के भुगतान के तरीके में बदलाव हो सकता है। केंद्रीय पंचायती राज, मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने कहा है कि आने वाले समय में लाभार्थियों को भुगतान के लिए आधार कार्ड की जगह बायोमेट्रिक पहचान और वोटर आईडी (EPIC) नंबर का इस्तेमाल किया जाएगा। हालांकि, मंत्री ने यह स्पष्ट नहीं किया कि यह व्यवस्था किन योजनाओं में और कब से लागू होगी।
ललन सिंह ने यह बात पिछले शुक्रवार को पंचायती राज मंत्रालय की ओर से आयोजित नेशनल वर्कशॉप ऑन पीपुल्स प्लान कैंपेन 2026-27 में कही। उन्होंने कहा कि अब आधार कार्ड लाभार्थियों को भुगतान करने का आधार नहीं रहेगा। इसके बजाय भुगतान के लिए लाभार्थियों के बायोमेट्रिक विवरण और वोटर आईडी के EPIC नंबर को आधार बनाया जाएगा।
‘आधार कार्ड बनवाना अब बहुत आसान’
कार्यशाला को संबोधित करते हुए मंत्री ने कहा कि आधार कार्ड बनवाने की सुविधा अब लगभग हर जगह उपलब्ध है। उनके मुताबिक, आधार नामांकन केंद्र आसानी से मिल जाते हैं और कुछ ही मिनटों में आधार कार्ड बनवाया जा सकता है। उन्होंने इसी संदर्भ में कहा कि लाभार्थियों को भुगतान देने के लिए अब आधार कार्ड पर निर्भर रहने के बजाय दूसरी पहचान व्यवस्था अपनाई जाएगी।
हालांकि, मंत्री ने अपने बयान में इस नई व्यवस्था की तकनीकी प्रक्रिया, लागू होने की तारीख या इससे जुड़ी योजनाओं के नाम नहीं बताए। इसलिए फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि प्रस्तावित बदलाव सभी सरकारी योजनाओं पर लागू होगा या कुछ चुनिंदा योजनाओं तक सीमित रहेगा।
किन योजनाओं में अभी आधार से होता है भुगतान?
पंचायती राज मंत्रालय की ऐसी कोई योजना नहीं है, जिसके तहत सीधे किसी व्यक्तिगत लाभार्थी के बैंक खाते में पैसा भेजा जाता हो। हालांकि, ललन सिंह के पास मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय की जिम्मेदारी भी है। इस मंत्रालय की कुछ योजनाओं में भुगतान के लिए आधार अनिवार्य है।
उदाहरण के तौर पर, राष्ट्रीय पशुधन मिशन (National Livestock Mission) के उद्यमिता विकास कार्यक्रम के तहत लाभ लेने वाले पात्र आवेदकों को आधार नंबर होने का प्रमाण देना या आधार प्रमाणीकरण कराना जरूरी होता है।
इसके अलावा केंद्र सरकार की कई प्रमुख योजनाओं में भी आधार से जुड़े बैंक खातों के माध्यम से भुगतान किया जाता है। इनमें ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्यक्रम VB-G RAM G, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-Kisan), प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण और राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम के तहत मिलने वाली वृद्धावस्था, विधवा और दिव्यांग पेंशन शामिल हैं।
आत्मनिर्भर पंचायतों पर भी दिया जोर
कार्यशाला में ललन सिंह ने आत्मनिर्भर पंचायतों और विकसित पंचायतों के लक्ष्य को पूरा करने के लिए सभी संबंधित पक्षों की भागीदारी पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि ग्राम पंचायतों को अपनी आय के स्रोत बढ़ाने की दिशा में काम करना चाहिए।
मंत्री के अनुसार, ग्राम पंचायतों को प्रदर्शन के आधार पर मिलने वाले अनुदान (Performance Grants) का पात्र बनने के लिए अपने संसाधनों से राजस्व जुटाने की क्षमता बढ़ानी होगी। इससे पंचायतें आर्थिक रूप से मजबूत बन सकेंगी और स्थानीय विकास के कामों के लिए संसाधन जुटा पाएंगी।
