नई दिल्ली. लोकसभा में स्पीकर Om Birla को हटाने के विपक्ष के प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah ने बुधवार को उनका जोरदार बचाव किया। उन्होंने कहा कि स्पीकर सदन के निष्पक्ष संरक्षक होते हैं और संसद किसी पार्टी के नियमों से नहीं, बल्कि संसदीय परंपराओं और नियमों से चलती है।
चर्चा में हस्तक्षेप करते हुए अमित शाह ने विपक्ष के इस प्रस्ताव को “असाधारण और खेदजनक” बताया। उन्होंने कहा कि करीब चार दशक बाद ऐसा कदम उठाया गया है और यह संसदीय परंपराओं पर सीधा हमला है। शाह ने कहा कि स्पीकर की निष्पक्षता पर सवाल उठाना देश की लोकतांत्रिक संस्थाओं की कार्यप्रणाली पर संदेह करने जैसा है।
सदन की कार्यवाही आपसी विश्वास पर चलती है
उन्होंने कहा कि इस सदन की कार्यवाही आपसी विश्वास पर चलती है। स्पीकर सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों का प्रतिनिधित्व करते हैं और सदन के निष्पक्ष संरक्षक होते हैं।
अमित शाह ने यह भी कहा कि भारतीय जनता पार्टी ने लंबे समय तक विपक्ष में रहने के बावजूद कभी किसी स्पीकर के खिलाफ हटाने का प्रस्ताव नहीं लाया। उन्होंने विपक्षी दलों पर संसदीय परंपराओं को कमजोर करने का आरोप लगाया।
नेता Rahul Gandhi पर भी निशाना साधा
इस दौरान शाह ने विपक्ष के नेता Rahul Gandhi पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जब संसद में कोई महत्वपूर्ण विधेयक या गंभीर चर्चा होती है, तब राहुल गांधी अक्सर अनुपस्थित रहते हैं। शाह ने कहा कि कई बार ऐसे मौकों पर वे विदेश में होते हैं, जिससे उनकी संसदीय प्रतिबद्धता पर सवाल उठते हैं।
अमित शाह ने राहुल गांधी के आचरण पर भी टिप्पणी करते हुए कहा कि वे संसद की गरिमा को कम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब कोई नेता आंख मारता है, प्रधानमंत्री को गले लगाता है और फ्लाइंग किस देता है, तो यह उकसावे जैसा व्यवहार लगता है। इस टिप्पणी पर विपक्षी सांसदों ने कड़ा विरोध जताया और इसे “असंसदीय भाषा” बताया।
विरोध के बीच शाह ने कहा कि सदस्य स्पीकर के फैसलों से असहमत हो सकते हैं, लेकिन उन पर संदेह नहीं किया जा सकता। उन्होंने जोर देकर कहा कि सदन की कार्यवाही संसद के नियमों के अनुसार चलेगी, किसी राजनीतिक दल के नियमों के अनुसार नहीं।
भाजपा और न ही एनडीए ने कभी ऐसा कदम उठाया
गृह मंत्री ने यह भी याद दिलाया कि भारत के संसदीय इतिहास में अब तक स्पीकर के खिलाफ केवल तीन बार ही ऐसा प्रस्ताव लाया गया है और न तो भाजपा और न ही एनडीए ने कभी ऐसा कदम उठाया है।
उन्होंने कहा कि पिछले 75 वर्षों में संसद के दोनों सदनों ने भारत के लोकतांत्रिक ढांचे को मजबूत किया है, लेकिन विपक्ष के इस कदम ने उसकी विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। शाह ने कहा कि स्पीकर किसी पार्टी के नहीं, बल्कि पूरे सदन के होते हैं और उनकी निष्पक्षता पर सवाल उठाना लोकतंत्र की गरिमा पर सवाल उठाने जैसा है।
साथ ही उन्होंने स्पीकर के उस अधिकार का भी बचाव किया, जिसके तहत सदन की कार्यवाही से असंसदीय टिप्पणियों को रिकॉर्ड से हटाया जा सकता है। शाह ने कहा कि संसद में होने वाली बहसें तय नियमों और परंपराओं के अनुसार ही होनी चाहिए।
