नई दिल्ली. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गुरुवार को Vande Mataram को लेकर कांग्रेस के प्रस्ताव पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कांग्रेस पर राष्ट्रविरोधी राजनीति करने और अपने Vote Bank को साधने के लिए तुष्टिकरण की राजनीति अपनाने का आरोप लगाया। तमिलनाडु के चेंगलपट्टू में आयोजित 31वीं Southern Zonal Council Meeting से इतर समाचार एजेंसी से बातचीत में अमित शाह ने कांग्रेस के उस फैसले की आलोचना की, जिसमें पार्टी ने अपने कार्यक्रमों में ‘वंदे मातरम’ के केवल पहले दो अंतरों को गाने के अपने 1937 के प्रस्ताव को जारी रखने की बात कही है।
1937 के प्रस्ताव को लेकर कांग्रेस पर निशाना
अमित शाह ने कहा कि कांग्रेस ने 1937 में ‘वंदे मातरम’ के केवल शुरुआती दो अंतरों को गाने का प्रस्ताव स्वीकार किया था। उनके मुताबिक, इसी फैसले ने देश के विभाजन की नींव रखने का काम किया। शाह ने आरोप लगाया कि कांग्रेस अब राहुल गांधी के नेतृत्व में अपने उसी पुराने फैसले को आगे बढ़ा रही है। उन्होंने कहा कि केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने कथित तौर पर उस ऐतिहासिक गलती को सुधारने का प्रयास किया है।
‘वंदे मातरम’ के पूरे संस्करण को लेकर विवाद
केंद्र सरकार की ओर से सभी आधिकारिक सरकारी कार्यक्रमों में ‘वंदे मातरम’ के पूर्ण संस्करण को अनिवार्य किए जाने के बाद इस मुद्दे पर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। कांग्रेस ने केंद्र के इस फैसले की आलोचना की है। बुधवार को हुई Congress Working Committee (CWC) की बैठक में पार्टी ने कहा कि वह 1937 में लिए गए अपने प्रस्ताव का पालन करेगी और पार्टी के कार्यक्रमों में राष्ट्रीय गीत के केवल पहले दो अंतरे ही गाए जाएंगे।
अमित शाह ने बैंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय का किया जिक्र
गृह मंत्री ने कांग्रेस के फैसले को ‘वंदे मातरम’ के रचयिता Bankim Chandra Chattopadhyay और स्वतंत्रता संग्राम में बलिदान देने वाले लोगों का अपमान बताया। उन्होंने कहा कि देश पहले ‘वंदे मातरम’ को दो हिस्सों में बांटने की गलती का परिणाम भुगत चुका है और अब लोगों को कांग्रेस के इस फैसले के खिलाफ एकजुट होना चाहिए।
अमित शाह ने कांग्रेस और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस 1937 के अपने प्रस्ताव को लागू कर रही है, जबकि संसद द्वारा बनाए गए कानून को स्वीकार नहीं कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस एक बार फिर Appeasement Politics को आगे बढ़ा रही है।
कांग्रेस ने 1937 के प्रस्ताव का किया बचाव
कांग्रेस की ओर से कहा गया है कि पार्टी 1937 में कांग्रेस कार्यसमिति द्वारा पारित प्रस्ताव के अनुरूप ही अपने कार्यक्रमों में ‘वंदे मातरम’ के पहले दो अंतरे गाएगी। उस समय हुई CWC बैठक में Mahatma Gandhi, Jawaharlal Nehru, Subhas Chandra Bose, Sardar Vallabhbhai Patel और Maulana Azad जैसे प्रमुख नेता मौजूद थे।
BJP और Congress के बीच बढ़ा राजनीतिक टकराव
‘वंदे मातरम’ को लेकर कांग्रेस और भाजपा के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। भाजपा नेताओं ने कांग्रेस के फैसले को तुष्टिकरण की राजनीति से जोड़ते हुए निशाना साधा है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन समेत कई नेताओं ने कांग्रेस पर तीखी टिप्पणी की है। वहीं कांग्रेस अपने 1937 के प्रस्ताव का बचाव कर रही है। ऐसे में ‘वंदे मातरम’ का मुद्दा अब राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है।

