नई दिल्ली. केंद्र सरकार ने देश की ग्राम पंचायतों को अधिक मजबूत और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। नई दिल्ली में पंचायती राज मंत्रालय ने 16वें वित्त आयोग की सिफारिशों के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर राज्यों के पंचायती राज मंत्रियों की राष्ट्रीय कार्यशाला आयोजित की। इस दौरान पंचायतों को वर्ष 2026-27 से 2030-31 के बीच मिलने वाली वित्तीय सहायता, डिजिटल व्यवस्था और स्थानीय स्तर पर राजस्व बढ़ाने के उपायों पर विस्तार से चर्चा हुई।
कार्यशाला की अध्यक्षता केंद्रीय पंचायती राज, मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने की। केंद्रीय राज्य मंत्री प्रो. एस.पी. सिंह बघेल भी इसमें मौजूद रहे। देश के 18 राज्यों के पंचायती राज मंत्रियों ने बैठक में हिस्सा लिया, जबकि अन्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों का प्रतिनिधित्व वरिष्ठ अधिकारियों ने किया।
पंचायतों को मिलेंगे 4.35 लाख करोड़ रुपये
कार्यशाला में बताया गया कि 16वें वित्त आयोग ने ग्रामीण स्थानीय निकायों यानी पंचायतों के लिए वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक 4 लाख 35 हजार 236 करोड़ रुपये देने की सिफारिश की है। यह राशि 15वें वित्त आयोग की तुलना में करीब 84 प्रतिशत अधिक है।
इस राशि में मूल अनुदान (Basic Grants), प्रदर्शन आधारित अनुदान (Performance Grants) और बंधित एवं अबंधित अनुदान (Tied और Untied Grants) शामिल हैं। सरकार का मानना है कि इससे पंचायतों के विकास कार्यों को नई गति मिलेगी और गांवों में बुनियादी सुविधाओं का विस्तार होगा।
‘विकसित पंचायत ही विकसित भारत की नींव’
केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह ने कहा कि विकसित भारत का सपना तभी पूरा होगा, जब देश की पंचायतें मजबूत और आत्मनिर्भर बनेंगी। उन्होंने कहा कि 16वें वित्त आयोग द्वारा पंचायतों के लिए दी गई बढ़ी हुई वित्तीय सहायता गांवों के विकास के लिए एक ऐतिहासिक अवसर है।
उन्होंने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से अपील की कि वे अभी से पूरी तैयारी करें, ताकि वित्त आयोग की सिफारिशों का अधिकतम लाभ पंचायतों तक पहुंच सके और धन का सही उपयोग हो।
राजस्व बढ़ाने पर रहेगा विशेष फोकस
कार्यशाला में पंचायतों की अपनी आय (Own Source Revenue-OSR) बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि केवल सरकारी अनुदान पर निर्भर रहने के बजाय पंचायतों को अपने स्तर पर भी आय बढ़ाने के प्रयास करने चाहिए।
उन्होंने बताया कि पंचायती राज मंत्रालय इसके लिए एक मॉडल ओन सोर्स रेवेन्यू नियमावली (Model OSR Rules Framework) तैयार कर रहा है, जिससे राज्यों को अपनी पंचायतों की आय बढ़ाने में मदद मिलेगी।
डिजिटल पंचायतों को मिलेगा बढ़ावा
बैठक में पंचायतों के लिए डिजिटल व्यवस्था को मजबूत करने पर भी चर्चा हुई। केंद्रीय मंत्री ने बताया कि समर्थ पंचायत पोर्टल (SAMARTH Panchayat Portal) पंचायतों के वित्तीय प्रबंधन को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाएगा।
इसके अलावा eGramSwaraj, AuditOnline, PFMS और SVAMITVA जैसी डिजिटल प्रणालियों को भी आपस में जोड़कर पंचायतों की योजना, लेखा-जोखा, ऑडिट और राजस्व संग्रह की प्रक्रिया को और मजबूत किया जाएगा।
प्रदर्शन के आधार पर मिलेगा अतिरिक्त अनुदान
केंद्रीय राज्य मंत्री प्रो. एस.पी. सिंह बघेल ने कहा कि 16वें वित्त आयोग के तहत पंचायतों को अब तक का सबसे अधिक प्रति व्यक्ति वित्तीय आवंटन मिला है। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन आधारित अनुदान (Performance Grants) पंचायतों को बेहतर काम करने और वित्तीय अनुशासन अपनाने के लिए प्रोत्साहित करेगा।
उन्होंने कहा कि स्वामित्व योजना (SVAMITVA), ई-ग्राम स्वराज और पंचायत एडवांसमेंट इंडेक्स जैसी योजनाओं ने ग्रामीण प्रशासन को मजबूत किया है।
राज्यों ने रखे अपने सुझाव
कार्यशाला के दौरान विभिन्न राज्यों ने अपने अनुभव साझा किए और कई सुझाव भी दिए। राज्यों ने कहा कि पहाड़ी, जनजातीय और आपदा प्रभावित क्षेत्रों के लिए नियमों में कुछ लचीलापन होना चाहिए। साथ ही वित्त आयोग की राशि समय पर जारी की जाए और स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखकर प्रदर्शन आधारित प्रोत्साहन दिया जाए।
राज्यों ने डिजिटल प्लेटफॉर्म को और बेहतर बनाने, पंचायतों की संपत्तियों के रखरखाव, क्षमता निर्माण और अनुपालन संबंधी प्रक्रियाओं को आसान बनाने की भी मांग की।
देशभर में 2.62 लाख से ज्यादा पंचायतें
सरकार के अनुसार देश में वर्तमान में 2 लाख 62 हजार 738 पंचायती राज संस्थाएं कार्यरत हैं। इनमें 2 लाख 55 हजार 308 ग्राम पंचायतें, 6 हजार 756 ब्लॉक पंचायतें और 674 जिला पंचायतें शामिल हैं।
केंद्र सरकार का कहना है कि 16वें वित्त आयोग की सिफारिशों के प्रभावी क्रियान्वयन से पंचायतें आर्थिक रूप से अधिक सक्षम होंगी, स्थानीय विकास को गति मिलेगी और गांवों में बेहतर शासन व्यवस्था स्थापित होगी।

