नई दिल्ली: भारत में GM Crops (Genetically Modified Crops) और Genome-Edited (GE) फसल को सुरक्षित तरीके से अपनाने के लिए विज्ञान आधारित नियामक सुधार और मंजूरी प्रक्रिया को तेज करने की जरूरत पर जोर दिया गया है। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के अनुसार, कृषि विज्ञान की उन्नति के लिए ट्रस्ट (TAAS),भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) और फेडरेशन ऑफ़ सीड इंडस्ट्री ऑफ़ इंडिया (FSII) द्वारा आयोजित एक उच्चस्तरीय राउंडटेबल बैठक में इस विषय पर व्यापक सहमति बनी।
पारदर्शी और समयबद्ध मंजूरी प्रणाली की सिफारिश
बैठक में विशेषज्ञों ने कहा कि भारत की Biotechnology Regulatory System को अधिक पारदर्शी, प्रभावी और वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाया जाना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि GM और Genome-Edited Crops के लिए Science-Based, Risk-Proportionate और Time-Bound Approval Process तैयार किया जाए, जिससे सरकारी और निजी दोनों क्षेत्रों के शोधकर्ताओं को नवाचार का अवसर मिल सके।
जलवायु परिवर्तन और खाद्य सुरक्षा के लिए जरूरी
बैठक में यह भी कहा गया कि सुरक्षित GM और GE Crops को समय पर अपनाने से Climate Resilience, कृषि उत्पादकता, Nutritional Security, किसानों की आय और भारतीय कृषि की वैश्विक प्रतिस्पर्धा को मजबूती मिलेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक जैव प्रौद्योगिकी कृषि क्षेत्र की कई बड़ी चुनौतियों का समाधान देने में सक्षम है।
मौजूदा नियमों में बदलाव की जरूरत
कृषि मंत्रालय ने बताया कि वर्तमान में भारत में Environment (Protection) Act, 1986 के तहत ट्रांसजेनिक फसलों के लिए बहु-स्तरीय नियामक व्यवस्था लागू है। इसमें Department of Biotechnology की Review Committee on Genetic Manipulation (RCGM), Genetic Engineering Appraisal Committee (GEAC), Food Safety and Standards Authority of India (FSSAI), ICAR और अन्य मंत्रालय शामिल हैं।
हालांकि, CRISPR जैसी नई Genome Editing Technologies के तेजी से विकास, वैश्विक नियामक बदलावों और जलवायु अनुकूल कृषि की बढ़ती आवश्यकता को देखते हुए मौजूदा ढांचे की समीक्षा और आधुनिकीकरण की जरूरत महसूस की गई।
विशेषज्ञों ने क्या कहा?
ICAR के महानिदेशक और DARE के सचिव डॉ. एम.एल. जाट ने कहा कि देश को ऐसी संतुलित नियामक व्यवस्था की जरूरत है, जो आधुनिक जैव प्रौद्योगिकी के सुरक्षित उपयोग को बढ़ावा दे और Food Security, Nutrition Security, Climate Resilience तथा Sustainable Agriculture के लक्ष्यों को हासिल करने में मदद करे।
वहीं TAAS के अध्यक्ष डॉ. आर.एस. परोदा ने कहा कि भारत के पास कृषि जैव प्रौद्योगिकी में वैश्विक नेतृत्व करने की वैज्ञानिक क्षमता है। उन्होंने कहा कि इस बैठक की सिफारिशें ऐसी नीति बनाने में मदद करेंगी, जो जिम्मेदार नवाचार को बढ़ावा देने के साथ-साथ मानव स्वास्थ्य, जैव विविधता और पर्यावरण की सुरक्षा भी सुनिश्चित करे।
सरकार को सौंपी जाएगी नीति संबंधी रिपोर्ट
बैठक में तैयार की गई सिफारिशों को एक Policy Document के रूप में संकलित कर संबंधित मंत्रालयों और नियामक संस्थाओं को भेजा जाएगा। इसका उद्देश्य भारत में GM Crops और Genome-Edited Plants के नियमन एवं मंजूरी प्रक्रिया में Evidence-Based Reforms लागू करने में सहायता देना है।
