नई दिल्ली. भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने नितिन नवीन को राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष (National Working President) नियुक्त कर संगठनात्मक मजबूती और पीढ़ीगत बदलाव का स्पष्ट संदेश दिया है। आगामी बड़े चुनावी मुकाबलों से पहले यह फैसला पार्टी की रणनीतिक सोच को भी दर्शाता है। पार्टी के भीतर नितिन नबीन को एक मेहनती, राजनीतिक रूप से जिज्ञासु और जमीन से जुड़े संगठनात्मक कार्यकर्ता के रूप में जाना जाता है। उनके साथ काम कर चुके नेता उन्हें सहज, सुलभ और “सामंजस्य” यानी समन्वय की क्षमता वाला नेता बताते हैं।
45 साल में सबसे युवा वर्किंग प्रेसिडेंट
45 वर्ष की उम्र में नितिन नबीन बीजेपी के सबसे युवा कार्यकारी अध्यक्ष बने हैं। यह नियुक्ति बीजेपी की उस व्यापक नीति का हिस्सा मानी जा रही है, जिसके तहत पार्टी युवा नेतृत्व को आगे बढ़ा रही है। हाल के दिनों में गुजरात में हर्ष सांघवी को उपमुख्यमंत्री बनाए जाने को भी इसी कड़ी में देखा जा रहा है।
दो दशक का संगठनात्मक अनुभव
कम उम्र के बावजूद नितिन नबीन के पास करीब 20 साल का संगठनात्मक अनुभव है। उन्होंने बिहार में पार्टी के युवा मोर्चे से राजनीति की शुरुआत की और धीरे-धीरे अहम चुनावी जिम्मेदारियों तक पहुंचे। उनके राजनीतिक संस्कार विरासत में मिले हैं—उनके पिता जनसंघ के सदस्य रहे हैं और विधायक भी रह चुके हैं।
तीन वजहें जो बनीं नियुक्ति का आधार
पार्टी सूत्रों के मुताबिक नितिन नवीन के पक्ष में तीन प्रमुख कारण रहे, संगठन और जमीनी चुनावी कामकाज की गहरी समझ, शीर्ष नेतृत्व की कार्यशैली के साथ तालमेल, कठिन राजनीतिक जिम्मेदारियों को सफलतापूर्वक निभाने की क्षमता
अमित शाह की नजर में आए प्रदर्शन
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सबसे पहले छत्तीसगढ़ में उनके काम को नोटिस किया। इसके बाद उन्हें दिल्ली चुनाव अभियान में अहम भूमिका दी गई, जहां बीजेपी ने लगभग तीन दशकों बाद सत्ता में वापसी की। पार्टी सूत्रों का कहना है कि नितिन नबीन नेतृत्व की सीमाओं को समझते हैं, लेकिन पूरी क्षमता से काम करते हैं। एक अन्य नेता के अनुसार, “वे सभी को साथ लेकर चलते हैं, खासकर वरिष्ठ नेताओं को।
सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन
नितिन नबीन कायस्थ समुदाय से आते हैं, जिसे राजनीतिक रूप से अपेक्षाकृत तटस्थ माना जाता है। पार्टी नेताओं का मानना है कि इससे सामाजिक संतुलन बनाने में भी मदद मिलती है। बिहार और छत्तीसगढ़ में निर्णायक भूमिका बिहार में उनकी भूमिका ने पार्टी में उनकी स्थिति और मजबूत की। चुनाव के दौरान अमित शाह का उनके पटना आवास जाना उनके संगठनात्मक योगदान की खुली सराहना माना गया। उन्होंने जीविका दीदी नेटवर्क को सक्रिय करने की जिम्मेदारी भी संभाली, जिसे पार्टी सूत्र सफल मानते हैं। साथ ही, एनडीए समन्वय बैठकों में उनकी सक्रियता ने गठबंधन की एकजुटता को जमीन पर दिखाया। छत्तीसगढ़ में वे केंद्रीय मंत्री मनसुख मंडाविया के साथ चुनाव सह-प्रभारी रहे। एक सूत्र के मुताबिक, उन्होंने चुनाव से करीब डेढ़ साल पहले तक हर हफ्ते चार दिन राज्य में बिताए और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के खिलाफ बीजेपी की रणनीति की मजबूत नींव रखी।
अनुभव और प्रतिनिधित्व का संदेश
45 वर्ष की उम्र में पांच बार विधायक रह चुके और अहम मंत्रालय संभाल चुके नितिन नवीन प्रशासनिक अनुभव भी साथ लाते हैं। वे बिहार और पूर्वी भारत से पहले बीजेपी कार्यकारी अध्यक्ष हैं, जो पार्टी के शीर्ष नेतृत्व में क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व बढ़ाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।उनकी नियुक्ति को अगले साल की शुरुआत में पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी से औपचारिक मंजूरी मिलने की संभावना है।
कार्यकर्ताओं के बीच रहते हुए मिली खबर
दिलचस्प बात यह है कि नियुक्ति की सुबह तक नितिन नबीन को खुद इस फैसले की जानकारी नहीं थी। वे पार्टी की हालिया जीत के बाद कार्यकर्ताओं के सम्मान कार्यक्रम में मौजूद थे।
बीजेपी का सियासी संदेश
बीजेपी इस नियुक्ति को न सिर्फ कार्यकर्ताओं के लिए प्रेरणा, बल्कि एक राजनीतिक संदेश के तौर पर भी पेश कर रही है। पार्टी इसे कांग्रेस से तुलना करते हुए देख रही है, जहां अब भी 84 वर्षीय मल्लिकार्जुन खड़गे शीर्ष पद पर हैं। कुल मिलाकर, नितिन नवीन की ताजपोशी बीजेपी की संगठनात्मक ताकत, युवा नेतृत्व और भविष्य की चुनावी रणनीति—तीनों का संकेत देती है।
