नई दिल्ली. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने कहा कि देश के मंदिरों की आय का बड़ा हिस्सा Public Welfare Activities में लगाया जाना चाहिए।
वे लखनऊ में RSS के 100 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आयोजित एक जन संवाद कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। यह कार्यक्रम इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित हुआ, जहां विभिन्न क्षेत्रों से आए प्रबुद्धजनों ने उनसे सवाल पूछे।
“संघ की सबसे बड़ी चुनौती हिंदू समाज”
एक प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा कि संघ के सामने सबसे बड़ी चुनौती Hindu Society Awakening की है। उनका कहना था कि समाज को जागरूक और संगठित करने के लिए निरंतर प्रयास की आवश्यकता है।
उन्होंने संकेत दिया कि सामाजिक समरसता और राष्ट्र निर्माण के लिए व्यापक जनजागरण जरूरी है।
Temple Revenue का उपयोग जनकल्याण में हो
मंदिरों की आय को लेकर पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा कि Temple Revenue Utilization का बड़ा हिस्सा समाज के कल्याण में लगाया जाना चाहिए।
उन्होंने स्पष्ट किया कि मंदिरों की आय का प्रबंधन सरकार के नियंत्रण में न होकर जिम्मेदार और ईमानदार भक्तों के हाथ में होना चाहिए।
उनके अनुसार, प्रमुख मंदिरों के संचालन और आय के उपयोग में Transparency and Accountability अनिवार्य होनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि इस दिशा में संघ तैयारी कर रहा है और भविष्य में इसके परिणाम दिखाई देंगे।
“सरकार हम चलाते हैं, यह भ्रम”
एक अन्य सवाल में यह पूछा गया कि क्या भाजपा सरकार को RSS संचालित करता है। इस पर उन्होंने कहा कि यह धारणा एक भ्रम है।
उन्होंने कहा कि RSS के पास कोई “Remote Control” नहीं है। सरकार चलाना एक जटिल और जिम्मेदार कार्य है, और संघ अपनी सामाजिक भूमिका निभाता है।
हालांकि उन्होंने यह माना कि संघ सुझाव दे सकता है, लेकिन शासन संचालन सरकार की जिम्मेदारी है।
अवसरवादियों पर भी बोले
कार्यक्रम के दौरान यह सवाल भी उठा कि सत्ता परिवर्तन के बाद कुछ लोग स्वार्थवश संघ से जुड़ जाते हैं।
इस पर उन्होंने कहा कि संघ की कार्यप्रणाली (Organizational Structure) ऐसी है कि केवल समर्पित कार्यकर्ता ही लंबे समय तक टिक पाते हैं।
उनके मुताबिक, संघ राष्ट्र निर्माण के लिए कार्य करता है और व्यक्तिगत लाभ की अपेक्षा रखने वालों के लिए यहां कोई स्थान नहीं है।
