नई दिल्ली. हिमाचल प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव से करीब एक साल पहले हुए नगर निगम चुनावों में भाजपा को बड़ी सफलता मिली है। चार नगर निगमों में से तीन—मंडी, धर्मशाला और सोलन—पर भाजपा ने कब्जा जमाया, जबकि कांग्रेस केवल पालमपुर नगर निगम बचाने में सफल रही।
इन नतीजों को भाजपा अपने पक्ष में जनमत का संकेत बता रही है, वहीं कांग्रेस के भीतर संगठनात्मक मजबूती और शहरी क्षेत्रों में पकड़ को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
मुख्यमंत्री सुक्खू ने बताया स्थानीय नेताओं का असर
मुख्यमंत्री Sukhvinder Singh Sukhu ने चुनाव परिणामों की अलग व्याख्या करते हुए कहा कि मंडी और धर्मशाला में भाजपा की जीत के पीछे पार्टी संगठन से ज्यादा स्थानीय विधायकों का प्रभाव रहा।
उनका कहना है कि मंडी के विधायक Anil Sharma और धर्मशाला के विधायक Sudhir Sharma अपने-अपने क्षेत्रों में मजबूत जनाधार रखते हैं, जिसका सीधा असर चुनाव परिणामों पर पड़ा।
सुक्खू ने दावा किया कि स्थानीय निकाय चुनावों में 30 से 40 प्रतिशत वोट संबंधित विधायक के व्यक्तिगत प्रभाव से प्रभावित होते हैं।
मंडी में अनिल शर्मा फैक्टर पर सियासी बहस
मुख्यमंत्री ने मंडी में भाजपा की जीत का श्रेय पूर्व केंद्रीय मंत्री Pandit Sukhram की राजनीतिक विरासत और उनके बेटे अनिल शर्मा के प्रभाव को दिया। उन्होंने कहा कि मंडी में भाजपा की सफलता का श्रेय विपक्ष के नेता Jai Ram Thakur को नहीं बल्कि स्थानीय नेतृत्व को जाता है।
हालांकि जय राम ठाकुर ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि यह जीत भाजपा की नीतियों और संगठन की मजबूती का परिणाम है। उनके अनुसार मुख्यमंत्री अपनी सरकार के खिलाफ बढ़ती नाराजगी से ध्यान हटाने की कोशिश कर रहे हैं।
सोलन में कांग्रेस को सबसे बड़ा झटका
नगर निगम चुनावों में कांग्रेस के लिए सबसे बड़ा झटका सोलन से आया। सोलन जिले की सभी पांच विधानसभा सीटों पर कांग्रेस के विधायक हैं, फिर भी पार्टी नगर निगम चुनाव जीतने में नाकाम रही।
मुख्यमंत्री सुक्खू ने भी स्वीकार किया कि सोलन में कांग्रेस से कुछ रणनीतिक गलतियां हुईं। उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद थी कि पार्टी कम से कम सोलन और पालमपुर में जीत दर्ज करेगी, लेकिन सोलन में परिणाम उम्मीद के मुताबिक नहीं रहे।
इस जीत से भाजपा प्रदेश अध्यक्ष Rajeev Bindal की स्थिति भी और मजबूत हुई है, जिन्हें जिले में भाजपा संगठन को मजबूत करने का श्रेय दिया जाता है।
पालमपुर में कांग्रेस को मिली राहत
कांग्रेस के लिए राहत की खबर पालमपुर से आई, जहां पार्टी ने 15 में से 11 वार्ड जीतकर नगर निगम पर कब्जा बरकरार रखा। पार्टी नेताओं का मानना है कि स्थानीय विधायक Ashish Butail के प्रभाव ने कांग्रेस की जीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
क्यों अहम हैं ये नतीजे?
इन चुनावों का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि चारों नगर निगमों में भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला हुआ था। सोलन में भाजपा ने 17 में से 10 वार्ड, मंडी में 14 में से 12 वार्ड और धर्मशाला में 17 में से 11 वार्ड जीते। वहीं पालमपुर में कांग्रेस ने 15 में से 11 वार्ड अपने नाम किए।
हालांकि मुख्यमंत्री सुक्खू का कहना है कि पूरे राज्य में हुए 53 शहरी निकाय चुनावों में कांग्रेस ने 29 निकायों में बढ़त हासिल की, जबकि भाजपा 21 निकायों तक सीमित रही। लेकिन भाजपा का तर्क है कि सीधे पार्टी चिन्ह पर लड़े गए नगर निगम चुनाव ज्यादा राजनीतिक महत्व रखते हैं।
2027 चुनाव से पहले बढ़ेगा सियासी मुकाबला
नगर निगम चुनावों के नतीजों ने हिमाचल की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। भाजपा इन्हें 2027 विधानसभा चुनाव से पहले अपने पक्ष में जनमत का संकेत बता रही है, जबकि कांग्रेस स्थानीय कारणों और संगठनात्मक सुधार की जरूरत पर जोर दे रही है। आने वाले महीनों में दोनों दल इन नतीजों के आधार पर अपनी चुनावी रणनीति को और धार देने की कोशिश करेंगे।

