नई दिल्ली. केंद्र सरकार ने देश की सांख्यिकी व्यवस्था को आधुनिक और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय कैबिनेट ने ‘विकसित भारत इनिशिएटिव फॉर स्टैटिस्टिकल ट्रांसफॉर्मेशन, एनालिटिक्स एंड रिसर्च’ यानी VISTAR Scheme को मंजूरी दे दी है। वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक चलने वाली इस योजना पर 4,371 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए जाएंगे। इसके साथ ही कैबिनेट ने महत्वपूर्ण खनिजों के घरेलू प्रसंस्करण को बढ़ावा देने के लिए 2,814 करोड़ रुपये की एक अन्य योजना को भी स्वीकृति दी है।
क्या है VISTAR Scheme और इसका उद्देश्य?
VISTAR Scheme का मकसद भारत की आधिकारिक सांख्यिकी व्यवस्था को आधुनिक, गतिशील और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप तैयार करना है। इसके तहत ऐसा डिजिटल सिस्टम विकसित किया जाएगा, जो समय पर और अधिक विस्तृत आंकड़े उपलब्ध कराने में सक्षम हो।
योजना में डेटा की गुणवत्ता, अलग-अलग विभागों के बीच जानकारी साझा करने की क्षमता और आधुनिक तकनीकों के इस्तेमाल पर विशेष जोर दिया गया है। इसके लिए एक ऐसा सांख्यिकी ढांचा तैयार किया जाएगा, जिसमें डेटा को एक समान मानकों के अनुसार व्यवस्थित किया जा सके और Artificial Intelligence (AI) के इस्तेमाल के लिए भी तैयार रखा जा सके।
नीति निर्माण में मिलेगी रियल टाइम डेटा की मदद
VISTAR Scheme के जरिए सरकारी आंकड़ों को अधिक समयबद्ध और विस्तृत बनाने का प्रयास किया जाएगा। इससे सरकार को विभिन्न क्षेत्रों की वास्तविक स्थिति समझने और नीतिगत फैसले लेने में मदद मिल सकती है। योजना के तहत बड़े स्तर पर सर्वे कराने, सांख्यिकी से जुड़े शोध, डिजिटल बदलाव और राष्ट्रीय डेटा गवर्नेंस को मजबूत करने पर काम होगा।
इस योजना की एक खास बात यह है कि जरूरत के अनुसार संसाधनों का इस्तेमाल और आवंटन किया जा सकेगा। यानी किसी क्षेत्र में तत्काल आंकड़ों या सर्वे की जरूरत पड़ने पर उपलब्ध संसाधनों को प्राथमिकता के आधार पर वहां लगाया जा सकेगा।
सांख्यिकी मंत्रालय की गतिविधियां होंगी शामिल
VISTAR Scheme के दायरे में सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (Ministry of Statistics and Programme Implementation) की सभी सांख्यिकीय और डेटा प्रबंधन से जुड़ी गतिविधियां आएंगी। इसका उद्देश्य देश की आधिकारिक सांख्यिकी प्रणाली को एक मजबूत और आधुनिक स्वरूप देना है।
सरकार के मुताबिक, यह पहल बड़े सर्वेक्षणों के संचालन से लेकर डेटा प्रबंधन और शोध तक की प्रक्रियाओं को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। इससे सरकारी योजनाओं और नीतियों के मूल्यांकन के लिए अधिक भरोसेमंद आंकड़े उपलब्ध कराने में भी मदद मिल सकती है।
Critical Mineral Processing Scheme को भी मंजूरी
कैबिनेट ने VISTAR Scheme के अलावा ‘Capex Support Scheme to Promote Critical Mineral Processing’ को भी मंजूरी दी है। इस योजना के लिए पांच वर्षों की अवधि में 2,814 करोड़ रुपये का वित्तीय प्रावधान किया गया है।
इस योजना का उद्देश्य देश में महत्वपूर्ण खनिजों के प्रसंस्करण यानी Processing के लिए घरेलू सुविधाएं स्थापित करना और उन्हें चालू करने में आर्थिक सहायता देना है। इसके तहत संबंधित कंपनियों और परियोजनाओं को पूंजीगत खर्च (Capital Expenditure) के लिए लक्षित सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।
दूसरे देशों पर निर्भरता कम करने पर जोर
दुनिया में महत्वपूर्ण खनिजों का प्रसंस्करण फिलहाल कुछ चुनिंदा भौगोलिक क्षेत्रों और देशों में केंद्रित है। ऐसे में वैश्विक तनाव, कीमतों में उतार-चढ़ाव और आपूर्ति पर प्रतिबंध लगने जैसी परिस्थितियों का असर कई देशों पर पड़ सकता है।
भारत के लिए भी यह स्थिति Supply Chain Security और आर्थिक सुरक्षा के लिहाज से चुनौती बन सकती है। महत्वपूर्ण खनिजों की उपलब्धता राष्ट्रीय सुरक्षा, आर्थिक आत्मनिर्भरता और स्वच्छ ऊर्जा से जुड़े लक्ष्यों को पूरा करने के लिए अहम है।
स्वच्छ ऊर्जा और आर्थिक सुरक्षा को मिलेगा समर्थन
Critical Mineral Processing Scheme के जरिए देश के भीतर खनिज प्रसंस्करण की क्षमता विकसित करने पर जोर दिया जाएगा। इससे वैश्विक आपूर्ति में बाधा आने की स्थिति में घरेलू जरूरतों को पूरा करने में मदद मिल सकती है।
महत्वपूर्ण खनिजों का इस्तेमाल इलेक्ट्रिक वाहनों, बैटरी, नवीकरणीय ऊर्जा और कई आधुनिक तकनीकों में होता है। ऐसे में इनके प्रसंस्करण की घरेलू क्षमता बढ़ाना भारत के औद्योगिक विकास और Decarbonisation Targets को हासिल करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
दोनों योजनाओं के जरिए केंद्र सरकार ने एक ओर सरकारी आंकड़ों और डेटा प्रबंधन को आधुनिक बनाने तथा दूसरी ओर महत्वपूर्ण खनिजों की घरेलू प्रसंस्करण क्षमता विकसित करने पर जोर दिया है।
