नई दिल्ली. केंद्र सरकार केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय (MoHUA) को दो अलग-अलग विभागों में बांटने पर गंभीरता से विचार कर रही है। प्रस्ताव के मुताबिक, एक विभाग विशेष रूप से दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) से जुड़े मामलों को संभालेगा। दोनों विभागों के लिए अलग-अलग सचिव नियुक्त किए जा सकते हैं।
फिलहाल मंत्रालय एक ही सचिव के अधीन काम करता है, जो दिल्ली डिवीजन की जिम्मेदारी भी संभालते हैं। सूत्रों के अनुसार, दिल्ली डिवीजन को अपग्रेड कर अलग विभाग बनाया जा सकता है, जिसके दायरे में एनसीआर और सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास परियोजना भी शामिल होगी।
सेंट्रल विस्टा और एनसीआर परियोजनाओं पर रहेगा विशेष फोकस
सरकारी सूत्रों का कहना है कि इस प्रस्ताव पर सक्रिय रूप से विचार किया जा रहा है। हालांकि, कैबिनेट सचिव टी. वी. सोमनाथन ने इस पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। यह पहल ऐसे समय में सामने आई है जब फरवरी में MoHUA की अतिरिक्त सचिव डी. थारा को सचिव स्तर पर पदोन्नत किया गया था। इसके बावजूद वह अभी भी अतिरिक्त सचिव के रूप में कार्यरत हैं और सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास, दिल्ली डिवीजन तथा अमृत (AMRUT) जैसी महत्वपूर्ण परियोजनाओं की जिम्मेदारी संभाल रही हैं।
डी. थारा की अहम भूमिका
1995 बैच की गुजरात कैडर की IAS अधिकारी डी. थारा वर्ष 2019 से मंत्रालय में तैनात हैं। वह पहले संयुक्त सचिव और फिर 2021 से अतिरिक्त सचिव के रूप में कार्य कर रही हैं। सेंट्रल विस्टा परियोजना की शुरुआत से ही वह इसकी निगरानी कर रही हैं।
केंद्रीय प्रतिनियुक्ति से पहले वह गुजरात इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन की उपाध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक और अहमदाबाद नगर निगम की आयुक्त भी रह चुकी हैं।
वर्तमान में मंत्रालय के सचिव भी गुजरात कैडर के 1989 बैच के IAS अधिकारी श्रीनिवास काटिकिथला हैं।
दिल्ली को विश्वस्तरीय राजधानी बनाने की तैयारी
सूत्रों के अनुसार, इस बदलाव का उद्देश्य राजधानी के प्रशासन को अधिक समन्वित और प्रभावी बनाना है। दिल्ली में कई सरकारी एजेंसियां और निकाय काम करते हैं, जिनके बीच बेहतर तालमेल की जरूरत लंबे समय से महसूस की जा रही थी।
सूत्रों का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दिल्ली को विश्वस्तरीय राजधानी के रूप में विकसित करना चाहते हैं। इसी रणनीति के तहत दिल्ली और एनसीआर के प्रशासनिक ढांचे को अधिक सक्षम और समन्वित बनाने की योजना तैयार की जा रही है।
बताया जा रहा है कि दिल्ली के उपराज्यपाल को भी शहरी ढांचे, सार्वजनिक परिवहन और पर्यटन क्षेत्र में वैश्विक निवेश बढ़ाने के प्रयास तेज करने के निर्देश दिए गए हैं।
यमुना सफाई और शहरी परियोजनाओं की धीमी रफ्तार बनी चिंता
बीजेपी के अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक, हाल के दिनों में यमुना पुनर्जीवन जैसी महत्वपूर्ण परियोजनाओं की धीमी प्रगति को लेकर चिंता जताई गई थी। ऐसे में सरकार प्रशासनिक ढांचे को मजबूत कर परियोजनाओं की रफ्तार बढ़ाना चाहती है।
पहले भी हो चुका है मंत्रालय का विभाजन
यह पहली बार नहीं होगा जब शहरी विकास मंत्रालय का पुनर्गठन किया जाएगा। वर्ष 1995 में तत्कालीन शहरी मामलों एवं रोजगार मंत्रालय को दो विभागों – शहरी विकास विभाग और शहरी रोजगार एवं गरीबी उन्मूलन विभाग -में बांटा गया था।
इसके बाद कई बार मंत्रालय के स्वरूप में बदलाव हुए और वर्ष 2017 में शहरी विकास मंत्रालय तथा आवासन एवं शहरी गरीबी उन्मूलन मंत्रालय का विलय कर मौजूदा मंत्रालय बनाया गया।
‘मिनिमम गवर्नमेंट, मैक्सिमम गवर्नेंस’ नीति के तहत कदम
मोदी सरकार पहले भी बेहतर समन्वय और प्रशासनिक दक्षता के लिए मंत्रालयों के विलय और पुनर्गठन करती रही है। 2019 लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने अपने घोषणापत्र में ‘मिनिमम गवर्नमेंट, मैक्सिमम गवर्नेंस’ के तहत समान प्रकृति वाले विभागों को एकीकृत करने का वादा किया था।
इसी नीति के तहत 2019 में जल शक्ति मंत्रालय का गठन किया गया था, जिसमें जल संसाधन मंत्रालय और पेयजल एवं स्वच्छता मंत्रालय का विलय किया गया था।
