नई दिल्ली. श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट (Shri Ram Janmabhoomi Teerth Kshetra Trust) में दान राशि (Donation) की कथित चोरी और गबन (Donation Theft Case) के बीच ट्रस्ट के महासचिव Champat Rai ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। सूत्रों के मुताबिक, उन्होंने निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच (Fair Investigation) सुनिश्चित करने के उद्देश्य से यह फैसला लिया है।
बताया जा रहा है कि दान राशि में कथित अनियमितताओं के मामले में FIR दर्ज होने के बाद Champat Rai ने नैतिक आधार (Moral Grounds) पर पद छोड़ने का निर्णय लिया, हालांकि उनके खिलाफ व्यक्तिगत रूप से कोई आरोप नहीं लगाया गया है।
निष्पक्ष जांच के लिए छोड़ा पद
सूत्रों के अनुसार, Champat Rai का मानना है कि जब किसी संस्था को लेकर गंभीर आरोप लग रहे हों, तब जांच पूरी तरह निष्पक्ष हो, इसके लिए पद से अलग हो जाना उचित है। उनके करीबी लोगों का कहना है कि यह कदम किसी दबाव में नहीं बल्कि जांच प्रक्रिया की पारदर्शिता बनाए रखने के लिए उठाया गया है।
मामले में पहले ही FIR दर्ज हो चुकी है और उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) अपनी जांच आगे बढ़ा रहा है।
डोनेशन चोरी के आरोपों से शुरू हुआ विवाद
राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाई गई दान राशि और कीमती सामान के कथित दुरुपयोग और चोरी के आरोप सामने आने के बाद यह मामला चर्चा में आया। इसके बाद मुख्यमंत्री Yogi Adityanath के निर्देश पर गठित SIT ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपी।
रिपोर्ट मिलने के बाद पुलिस ने अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि थाने में मामला दर्ज कर जांच शुरू की।
आठ लोगों के खिलाफ दर्ज हुई FIR
पुलिस ने इस मामले में आठ लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की है। इन पर दान पेटियों से नकदी और कीमती सामान की चोरी, गबन और वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगाए गए हैं।
नामजद आरोपियों में अविनाश शुक्ला, लवकुश मिश्रा, अनुकल्प मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडेय, रामाशंकर मिश्रा, राम शंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव और सुभाष श्रीवास्तव शामिल हैं।
जानकारी के अनुसार, टिन्नू यादव पहले Champat Rai के चालक (Driver) के रूप में कार्य कर चुका है। मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा के बाद से वह मंदिर के कई प्रशासनिक कार्यों से भी जुड़ा हुआ था।
2020 की Audit Report में भी उठे थे सवाल
इस पूरे विवाद के बीच वर्ष 2020 की एक Audit Report भी चर्चा में है। ट्रस्ट के गठन के कुछ ही महीनों बाद हुई इस ऑडिट में ट्रस्ट के कामकाज को “Highly Unprofessional” बताया गया था।
रिपोर्ट में कई सुधारात्मक सुझाव दिए गए थे, लेकिन बताया जा रहा है कि छह वर्ष बाद भी उनमें से कई सिफारिशों को पूरी तरह लागू नहीं किया गया।
Yogi Adityanath बोले- आस्था से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस मामले पर कहा कि राज्य सरकार की मंशा पूरी तरह स्पष्ट है और जांच निष्पक्ष तरीके से की जा रही है। उन्होंने कहा कि यदि किसी के पास आरोपों से जुड़े सबूत हैं तो उन्हें SIT के सामने पेश करना चाहिए, लेकिन बिना तथ्यों के राम भक्तों की आस्था पर सवाल नहीं उठाने चाहिए।
मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर भी निशाना साधते हुए कहा कि कुछ लोग पहले भगवान राम के अस्तित्व और अयोध्या पर भी सवाल उठाते रहे हैं। उन्होंने कहा कि अब भी इस मुद्दे पर राजनीति करने की बजाय तथ्यों के आधार पर बात होनी चाहिए।
जांच पर सभी की नजर
Ram Temple Donation Case अब उत्तर प्रदेश के सबसे चर्चित मामलों में शामिल हो गया है। एक ओर SIT मामले की जांच कर रही है, वहीं दूसरी ओर Champat Rai के इस्तीफे ने पूरे घटनाक्रम को नया मोड़ दे दिया है।
अब सभी की नजर SIT की विस्तृत जांच रिपोर्ट और आगे होने वाली कानूनी कार्रवाई पर टिकी है, जिससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि दान राशि से जुड़े आरोपों में कितनी सच्चाई है और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ क्या कार्रवाई होती है।
