नई दिल्ली. भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत ने कहा है कि बदलते समय के साथ वकीलों को भी आधुनिक तकनीकों को अपनाना होगा, क्योंकि न्यायपालिका में टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है और अपराधों की प्रकृति भी बदलती जा रही है।
वे हरियाणा के हिसार जिले के हांसी में बार एसोसिएशन द्वारा आयोजित एक सम्मान समारोह को संबोधित कर रहे थे। यह कार्यक्रम स्थानीय न्यायिक परिसर में आयोजित किया गया था, जिसमें बड़ी संख्या में न्यायिक अधिकारी और अधिवक्ता मौजूद रहे।
बदल रही है अपराधों और विवादों की प्रकृति
CJI सूर्यकांत ने कहा कि देश की अर्थव्यवस्था मजबूत होने से विदेशी निवेश में इजाफा हुआ है, जिसके चलते वाणिज्यिक (Commercial Disputes) मामलों की संख्या भी बढ़ी है। ऐसे मामलों में तकनीकी समझ और डिजिटल टूल्स की भूमिका पहले से कहीं अधिक अहम हो गई है।
साइबर अपराध और डिजिटल अरेस्ट के मामले बढ़े
मुख्य न्यायाधीश ने चिंता जताते हुए कहा कि साइबर क्राइम (Cyber Crime) के मामलों में लगातार वृद्धि हो रही है। साथ ही, डिजिटल अरेस्ट (Digital Arrest) जैसे नए तरीकों से जुड़े मामले भी सामने आ रहे हैं। ऐसे में वकीलों और न्यायिक अधिकारियों को तकनीक के प्रति अपडेट रहना बेहद जरूरी है।
वकीलों को खुद को तकनीकी रूप से सक्षम बनाने की जरूरत
CJI ने वकीलों से आह्वान किया कि वे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डिजिटल साक्ष्य (Digital Evidence) और ऑनलाइन कोर्ट प्रोसीडिंग्स जैसी आधुनिक प्रणालियों को समझें और अपनाएं। इससे न केवल न्यायिक प्रक्रिया तेज होगी, बल्कि बदलते अपराधों से प्रभावी ढंग से निपटा भी जा सकेगा।
न्यायपालिका में टेक्नोलॉजी की बढ़ती भूमिका
उन्होंने कहा कि आने वाले समय में न्याय व्यवस्था और अधिक टेक्नोलॉजी-ड्रिवन होने वाली है। ऐसे में जो वकील समय के साथ खुद को अपडेट करेंगे, वही भविष्य की चुनौतियों का सफलतापूर्वक सामना कर पाएंगे।
