नई दिल्ली. देश के कई हिस्सों में पिछले कुछ हफ्तों से अंडे और चिकन की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। इससे आम लोगों की रसोई का बजट बढ़ गया है, वहीं होटल, रेस्टोरेंट और कैटरिंग कारोबार की लागत भी बढ़ी है। इस बार केवल सामान्य मौसमी बदलाव नहीं, बल्कि लंबी Heatwave और कमजोर Monsoon ने Poultry Industry को बड़ा झटका दिया है। गर्मी के कारण मुर्गियों की मौत बढ़ी, अंडों का उत्पादन घटा और किसानों का खर्च भी काफी बढ़ गया।
रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचे अंडों के दाम
देश के कई प्रमुख बाजारों में अंडों की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई हैं। पुणे में थोक बाजार में 100 अंडों की कीमत 760 रुपये तक पहुंच गई, जबकि खुदरा बाजार में एक दर्जन अंडों की कीमत 110 से 120 रुपये तक बिक रही है। मुंबई और चेन्नई जैसे बड़े शहरों में भी अंडों के दाम पिछले महीने की तुलना में बढ़ गए हैं। वहीं चिकन की कीमतों में भी तेजी आई है क्योंकि बाजार में सप्लाई कम हो गई है।
Heatwave ने घटाया उत्पादन
विशेषज्ञों के अनुसार, लगातार पड़ रही भीषण गर्मी का सबसे ज्यादा असर Poultry Farms पर पड़ा। अधिक तापमान के कारण मुर्गियां कम खाना खाती हैं और ज्यादा पानी पीती हैं। इसका सीधा असर अंडों के उत्पादन पर पड़ा। कई राज्यों में अंडों का उत्पादन 5 से 7 प्रतिशत तक घटा है, जबकि चूजों की मौत 7 से 10 प्रतिशत तक बढ़ी है। हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के कई इलाकों में स्थिति सबसे ज्यादा खराब रही।
महंगा हुआ Poultry Feed भी बड़ी वजह
Poultry Industry की लागत का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा Feed Cost पर खर्च होता है। मक्का और Soybean Meal की बढ़ती कीमतों ने किसानों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि Soybean Meal की कमी और महंगे चारे के कारण उत्पादन लागत लगातार बढ़ रही है, जिसका असर बाजार कीमतों पर भी दिखाई दे रहा है।
Monsoon की देरी से नहीं मिली राहत
आमतौर पर मानसून आने के बाद तापमान में गिरावट से पोल्ट्री उत्पादन सुधरने लगता है, लेकिन इस बार कई राज्यों में बारिश देर से पहुंची और कई जगह सामान्य से कम हुई। इससे मुर्गियों को गर्मी से राहत नहीं मिल सकी और उत्पादन प्रभावित रहा। विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक दिन और रात का तापमान सामान्य नहीं होगा, तब तक उत्पादन में तेजी से सुधार की उम्मीद कम है।
जल्द सस्ते नहीं होंगे अंडे और चिकन
उद्योग से जुड़े जानकारों का मानना है कि अंडे और चिकन की कीमतों में तुरंत गिरावट की संभावना नहीं है। नई Layer मुर्गियों को अंडे देने में कई महीने लगते हैं, जबकि Broiler Chicken को बाजार तक पहुंचने में भी कई सप्ताह का समय लगता है। ऐसे में सप्लाई सामान्य होने में समय लगेगा। हालांकि श्रावण के दौरान मांग कुछ कम हो सकती है, जिससे कीमतों में थोड़ी राहत मिल सकती है। लेकिन असली राहत तभी मिलेगी जब मौसम पूरी तरह सामान्य होगा और उत्पादन फिर से बढ़ेगा।
Climate Change बढ़ा रहा चुनौती
विशेषज्ञों का मानना है कि Climate Change की वजह से मौसम में लगातार हो रहे बदलाव अब खेती और पशुपालन दोनों पर असर डाल रहे हैं। ऐसे में Poultry Industry को भविष्य में बेहतर तकनीक, आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और Climate-Resilient Farming अपनानी होगी, ताकि मौसम की मार से होने वाले नुकसान को कम किया जा सके।
