नई दिल्ली. केंद्र सरकार ने देश को तकनीक, उद्योग और बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में मजबूत बनाने के लिए कई बड़े फैसले लिए हैं। केंद्रीय कैबिनेट ने सेमीकॉन 2.0, मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (MPMS), राष्ट्रीय यूरिया निवेश नीति-2026 (NIPU-2026) और ओडिशा-झारखंड की दो रेलवे परियोजनाओं को मंजूरी दे दी है। इन फैसलों का उद्देश्य निवेश बढ़ाना, रोजगार के नए अवसर पैदा करना और देश को आत्मनिर्भर बनाना है।
सेमीकॉन 2.0 से भारत बनेगा चिप निर्माण का बड़ा केंद्र
कैबिनेट ने सेमीकॉन 2.0 कार्यक्रम के लिए 1 लाख 27 हजार 500 करोड़ रुपये के बजट को मंजूरी दी है। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि यह योजना भारत में सेमीकंडक्टर डिजाइन और निर्माण को नई गति देगी। इससे देश वैश्विक सेमीकंडक्टर बाजार में अपनी मजबूत पहचान बना सकेगा।
उन्होंने कहा कि इस योजना के तहत चिप डिजाइन, मशीनें और कच्चा माल, नए फैब प्लांट, एटीएमपी-ओसैट (ATMP-OSAT) उद्योग और रिसर्च एंड डेवलपमेंट जैसे छह प्रमुख क्षेत्रों पर काम किया जाएगा। सरकार का लक्ष्य है कि भविष्य में देश की जरूरत के चिप भारत में ही डिजाइन और विकसित किए जाएं।
4 लाख करोड़ रुपये के निवेश की उम्मीद
सरकार का अनुमान है कि सेमीकॉन 2.0 के तहत करीब 4 लाख करोड़ रुपये का निवेश आएगा। भारत ने इस क्षेत्र में अमेरिका, जापान, यूरोपीय संघ, नीदरलैंड, सिंगापुर और जर्मनी जैसे देशों के साथ साझेदारी भी की है। सरकार का मानना है कि इससे भारत वैश्विक सप्लाई चेन में मजबूत भूमिका निभाएगा।
मोबाइल निर्माण को बढ़ावा देने के लिए नई योजना
कैबिनेट ने मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (MPMS) को भी मंजूरी दी है। इस योजना के लिए 62 हजार 500 करोड़ रुपये का बजट रखा गया है और इसे अगले पांच वर्षों तक लागू किया जाएगा।
योजना के तहत मोबाइल बनाने वाली कंपनियों को बिक्री के आधार पर 2.25 प्रतिशत से 5 प्रतिशत तक प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। यदि कंपनियां भारत में बने पुर्जों का अधिक इस्तेमाल करेंगी तो उन्हें 1.5 प्रतिशत तक अतिरिक्त प्रोत्साहन भी मिलेगा।
सरकार के अनुसार इस योजना से पांच वर्षों में 39 लाख करोड़ रुपये के मोबाइल फोन का उत्पादन होगा। वहीं मोबाइल निर्यात बढ़कर 15 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने की उम्मीद है। इससे करीब 60 हजार प्रत्यक्ष रोजगार भी पैदा होंगे।
नई यूरिया नीति से बढ़ेगा घरेलू उत्पादन
कैबिनेट ने राष्ट्रीय यूरिया निवेश नीति-2026 (NIPU-2026) को भी मंजूरी दे दी है। इस नीति का उद्देश्य देश में गैस आधारित नए यूरिया संयंत्र स्थापित कर घरेलू उत्पादन बढ़ाना और आयात पर निर्भरता कम करना है।
नई नीति में लागत को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए कई बदलाव किए गए हैं। साथ ही निवेशकों के लिए रिटर्न ऑन इक्विटी (RoE) की सीमा 12 से 16 प्रतिशत तय की गई है। सरकार का कहना है कि इससे प्रत्येक नए संयंत्र पर 250 करोड़ रुपये से अधिक की बचत होगी।
रेलवे की दो बड़ी परियोजनाओं को मिली मंजूरी
कैबिनेट ने ओडिशा और झारखंड में रेलवे नेटवर्क को मजबूत करने के लिए दो मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं को भी मंजूरी दी है। इनमें पारादीप-हरिदासपुर डबलिंग और राजखरसावां-डांगोपोसी चौथी रेल लाइन शामिल हैं।
करीब 145 किलोमीटर लंबी इन परियोजनाओं पर 3,907 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। सरकार का लक्ष्य है कि इन्हें 2030-31 तक पूरा कर लिया जाए। इन परियोजनाओं से रेल यातायात तेज होगा और माल ढुलाई की क्षमता भी बढ़ेगी।

