नई दिल्ली. भारत के मुख्य न्यायाधीश (Chief Justice of India) डी. वाई. गवई (CJI B R Gavai) ने लॉ छात्रों को संदेश देते हुए कहा कि examination results ही जीवन में सफलता का पैमाना नहीं होते। उन्होंने मज़ाकिया अंदाज़ में खुद को “out-standing student” बताया, यानी ज़्यादातर वक्त क्लास के बाहर रहने वाले।
“क्लास में कम, बीच पर ज़्यादा वक्त”
गोवा के मिरामार स्थित VM Salgaocar College of Law की Golden Jubilee समारोह में CJI गवई ने कहा,
“लॉ कॉलेज के पहले दो साल मैंने ज्यादातर दोस्तों पर attendance मार्क करने का भरोसा किया। आखिरी साल जब अमरावती शिफ्ट हुआ, तब भी मैं मुश्किल से आधा दर्जन बार कॉलेज गया। फिर भी merit list में तीसरे स्थान पर आया।”
उन्होंने आगे कहा, “मेरे एक दोस्त जो बाद में हाई कोर्ट जज बने, वे मेरी attendance लगाते थे। पढ़ाई के लिए मैंने ज्यादातर Jhabvala की किताबें और पाँच साल के solved papers पढ़े।”
“Merit Rank Success तय नहीं करती”
गवई ने बताया, “जिस छात्र ने merit list में पहला स्थान पाया, वह आगे चलकर केवल criminal lawyer (bail specialist) बना। दूसरा छात्र district judge होकर High Court judge बना। मैं तीसरे स्थान पर था और आज Chief Justice of India हूं। इसलिए याद रखिए, success आपकी exam rank से नहीं बल्कि determination, hard work और commitment से तय होती है।”
Justice Sonak ने भी बताई Beach वाली यादें
कार्यक्रम में बॉम्बे हाई कोर्ट के जस्टिस महेश सोनक ने भी कहा कि कॉलेज मिरामार बीच से महज़ 200 मीटर दूर था और “हमने क्लास से ज़्यादा वक्त बीच पर बिताया। इसलिए हम भी अपने समय के ‘out-standing students’ थे।”
“NLU ही नहीं, हर लॉ कॉलेज को मिलनी चाहिए मज़बूती”
CJI गवई ने कहा कि आजकल ध्यान ज़्यादातर NLU (National Law Universities) और CLAT exam पर होता है, लेकिन देशभर के अन्य लॉ कॉलेज भी काबिल छात्र तैयार कर रहे हैं। उन्होंने कहा, “NLUs क़ी अहमियत है, लेकिन वे देश की पूरी legal education ecosystem का छोटा हिस्सा हैं। ज़्यादातर छात्र सामान्य विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में पढ़ते हैं, जहां infrastructure, faculty और curriculum design जैसी चुनौतियाँ हैं। इन कॉलेजों को मज़बूत बनाना ज़रूरी है।”
