नई दिल्ली. CJI सूर्यकांत ने Due Process of Law और Presumption of Innocence के महत्व पर भी जोर दिया। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले का उल्लेख किया जिसमें कहा गया था कि किसी व्यक्ति की गिरफ्तारी के आधार उसे केवल मौखिक रूप से बताना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें लिखित रूप में उपलब्ध कराया जाना चाहिए।
उन्होंने Arvind Kejriwal vs Central Bureau of Investigation मामले का भी जिक्र किया, जिसका फैसला उन्होंने लिखा था। CJI के अनुसार, कोर्ट ने गिरफ्तारी की वैधता को बरकरार रखते हुए जमानत दी थी, क्योंकि लंबे समय तक मुकदमे से पहले हिरासत में रखना किसी व्यक्ति को अप्रत्यक्ष रूप से सजा देने जैसा नहीं होना चाहिए।
आपराधिक मामले के साथ रिकवरी कार्यवाही भी जारी की जा सकती है
CJI ने Insolvency and Bankruptcy Code (IBC), 2016 का जिक्र करते हुए कहा कि भारत की न्याय व्यवस्था आपराधिक कार्यवाही के साथ-साथ आर्थिक नुकसान की Parallel Recovery Proceedings को भी आगे बढ़ाने में सक्षम है। उन्होंने कहा कि किसी आपराधिक मामले की सुनवाई लंबी चलने के बावजूद संपत्तियों की वसूली की प्रक्रिया जारी रह सकती है।
उन्होंने विदेशों में मौजूद अवैध संपत्तियों को वापस लाने में Mutual Legal Assistance Treaties (MLATs) की भूमिका पर भी प्रकाश डाला। उनके अनुसार, इन व्यवस्थाओं में कुछ कमियां होने के बावजूद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संपत्ति की Recovery में इनका इस्तेमाल महत्वपूर्ण है।
कौटिल्य का उदाहरण उदाहरण आर्थिक अपराध
अपने संबोधन में CJI सूर्यकांत ने प्राचीन भारतीय राजनेता और विद्वान Kautilya का भी उल्लेख किया। उन्होंने Arthashastra में सरकारी खजाने से धन की हेराफेरी करने वाले अधिकारियों से जुड़ी बातों का उदाहरण दिया।
CJI ने Kautilya की उस तुलना का उल्लेख किया जिसमें सरकारी धन संभालने वाले अधिकारी की स्थिति को जीभ की नोक पर रखे शहद या जहर से तुलना की गई है। इसका अर्थ यह था कि धन के बेहद करीब रहने वाले व्यक्ति के लिए उसका दुरुपयोग करने के प्रलोभन से बचना मुश्किल हो सकता है।
साइबर धोखाधड़ी और अवैध धन से लड़ने के लिए वैश्विक सहयोग जरूरी
CJI ने कहा कि Economic Crime और Illicit Wealth की प्रकृति ऐसी है कि यह किसी एक देश की सीमाओं तक सीमित नहीं रहती। इसलिए इससे निपटने के लिए अलग-अलग देशों के बीच सहयोग, सतर्कता और Rule of Law जरूरी है।
उन्होंने वैश्विक स्तर पर Money Laundering की गंभीरता का जिक्र करते हुए कहा कि दुनिया में हर साल अवैध तरीके से बड़ी मात्रा में धन को वैध बनाने की कोशिश होती है। उनके मुताबिक, बरामद होने वाली अवैध संपत्ति कुल अवैध धन की तुलना में बहुत कम है।
सिर्फ चर्चा नहीं, कार्रवाई से तय होगी सफलता
अपने संबोधन के अंत में CJI सूर्यकांत ने कहा कि ऐसे अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों की सफलता केवल इस बात से नहीं मापी जानी चाहिए कि समस्या को कितनी प्रभावी भाषा में बताया गया। असली सफलता इस बात से तय होगी कि अलग-अलग देशों और संस्थाओं में जिम्मेदार लोग अपने अधिकार क्षेत्र में Fraud Prevention, Economic Crime Control और Asset Recovery के लिए कितनी गंभीरता से काम करते हैं। उन्होंने आर्थिक अपराधों से निपटने के लिए कानून, तकनीक, न्यायपालिका और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के बीच बेहतर तालमेल की जरूरत बताई।
