नई दिल्ली. लंबे समय से अटकी किशाऊ बहुउद्देशीय बांध परियोजना को अब आगे बढ़ाने का रास्ता साफ होता दिखाई दे रहा है। मंगलवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ हुई बैठक में उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, दिल्ली और हरियाणा के मुख्यमंत्रियों ने परियोजना को लेकर सहमति जताई। करीब 15 हजार करोड़ रुपये की इस बहुउद्देशीय परियोजना को जल्द ही मंजूरी के लिए केंद्रीय कैबिनेट के सामने रखा जा सकता है।
इस बैठक में छह राज्यों के मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव और अन्य वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। गृह मंत्रालय की ओर से भी वरिष्ठ अधिकारी बैठक में मौजूद रहे। इससे पहले 16 जून को अमित शाह की अध्यक्षता में हुई बैठक में भी राज्यों ने परियोजना को लागू करने के लिए MoU की दिशा में आगे बढ़ने पर सहमति जताई थी।
किशाऊ बहुउद्देशीय बांध परियोजना क्या है?
Kishau Multipurpose Dam Project उत्तराखंड में टोंस नदी पर प्रस्तावित एक बहुउद्देशीय जल भंडारण और जलविद्युत परियोजना है। टोंस नदी, यमुना की प्रमुख सहायक नदियों में से एक है।
परियोजना के तहत Kishau Reservoir में पानी का भंडारण किया जाएगा। इसका इस्तेमाल सिंचाई, जलविद्युत उत्पादन और पेयजल की जरूरतों को पूरा करने के लिए किया जाना है। इसके अलावा नियंत्रित तरीके से पानी छोड़ने से यमुना में पानी का प्रवाह बढ़ाने और नदी के पुनर्जीवन में भी मदद मिलने की उम्मीद है।
छह राज्यों के लिए क्यों अहम है यह परियोजना?
Kishau Dam Project का असर छह राज्यों पर पड़ेगा। इसमें हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली शामिल हैं। पानी के बंटवारे, बिजली उत्पादन और परियोजना की लागत से जुड़े मुद्दों के कारण यह परियोजना लंबे समय से आगे नहीं बढ़ पा रही थी।
अब राज्यों के बीच बनी सहमति से इन पुराने मतभेदों को दूर करने का रास्ता खुला है। खासतौर पर हिमाचल प्रदेश के पानी के हिस्से को लेकर एक व्यवस्था पर सहमति बनने को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
परियोजना का खर्च कैसे उठाया जाएगा?
राज्यों के बीच बनी सहमति के अनुसार परियोजना के वॉटर कंपोनेंट की लागत का 90 प्रतिशत हिस्सा केंद्र सरकार केंद्रीय सहायता के रूप में वहन करेगी। बाकी 10 प्रतिशत लागत छह राज्यों के बीच साझा की जाएगी।
हिमाचल प्रदेश के पानी के हिस्से को लेकर भी एक विशेष व्यवस्था तय की गई है। हिमाचल को आवंटित पानी का हिस्सा दिल्ली और राजस्थान को दिया जाएगा। इसके बदले दिल्ली और राजस्थान, हिमाचल प्रदेश के हिस्से के पावर कंपोनेंट की लागत में योगदान करेंगे।
माना जा रहा है कि इस व्यवस्था से परियोजना को लेकर राज्यों के बीच लंबे समय से चले आ रहे प्रमुख विवादों को सुलझाने में मदद मिलेगी।
हरियाणा, यूपी, राजस्थान और दिल्ली को कितना पानी मिलेगा?
परियोजना पूरी होने के बाद कई राज्यों और दिल्ली को अतिरिक्त पानी उपलब्ध होने की उम्मीद है। करीब 15 हजार करोड़ रुपये की इस परियोजना से हरियाणा को 836 क्यूसेक, उत्तर प्रदेश को 543.2 क्यूसेक, राजस्थान को 163.52 क्यूसेक और दिल्ली को 105.28 क्यूसेक पानी मिलने का अनुमान है।
इस अतिरिक्त जल उपलब्धता से संबंधित क्षेत्रों में सिंचाई और पेयजल की जरूरतों को पूरा करने में मदद मिल सकती है। परियोजना के जरिए पानी का नियंत्रित भंडारण और वितरण किया जाएगा।
यमुना को भी मिलेगा फायदा
Kishau Project का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य यमुना में पानी के प्रवाह को बढ़ाना है। Reservoir में पानी का भंडारण कर जरूरत के अनुसार उसे नियंत्रित तरीके से यमुना में छोड़ा जाएगा। इससे नदी में पानी की उपलब्धता और प्रवाह बेहतर होने की उम्मीद है।
केंद्र और संबंधित राज्यों ने इस परियोजना को यमुना के पुनर्जीवन से जुड़े व्यापक प्रयासों के साथ भी जोड़ा है। अतिरिक्त पानी के प्रवाह से यमुना में अपेक्षाकृत साफ पानी की उपलब्धता बढ़ाने में मदद मिल सकती है। साथ ही परियोजना सिंचाई, पेयजल और बिजली उत्पादन जैसे कई उद्देश्यों को पूरा करेगी।
अब आगे क्या होगा?
छह राज्यों के बीच सहमति बनने के बाद अब परियोजना के अगले चरण में जाने की उम्मीद है। Kishau Multipurpose Dam Project को केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरी के लिए पेश किया जाएगा। कैबिनेट से स्वीकृति मिलने के बाद इसके कार्यान्वयन की प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी।
लंबे समय से लंबित इस परियोजना पर बनी नई सहमति को जल सुरक्षा, सिंचाई, जलविद्युत उत्पादन और यमुना के पुनर्जीवन के लिहाज से महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। छह राज्यों के बीच पानी और लागत से जुड़े मुद्दों पर सहमति बनने के बाद करीब 15 हजार करोड़ रुपये की इस परियोजना के धरातल पर उतरने की उम्मीद बढ़ गई है।
