नई दिल्ली. डिजिटल पेमेंट करने वाले लोगों के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने बैंकों और पेमेंट सिस्टम प्रोवाइडर्स को UPI के जरिए 2,000 रुपये तक के लेनदेन और RuPay डेबिट कार्ड से किए जाने वाले भुगतान पर किसी भी तरह का शुल्क लगाने से रोक दिया है। वित्त मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना में Payment and Settlement Systems Act, 2007 में किए गए बदलावों को स्पष्ट किया गया है।
2,000 रुपये तक UPI पेमेंट रहेगा फ्री
सरकार की नई अधिसूचना के अनुसार, 2,000 रुपये तक के UPI लेनदेन पर बैंक या पेमेंट सिस्टम प्रोवाइडर सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से कोई चार्ज नहीं लगा सकेंगे। इसका फायदा UPI से भुगतान करने और भुगतान प्राप्त करने वाले दोनों लोगों को मिलेगा।
सरकार ने RuPay से जुड़े डेबिट कार्ड और 2,000 रुपये तक के UPI लेनदेन को इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट के तौर पर वर्गीकृत किया है। इसके तहत इन माध्यमों से भुगतान करने वाले व्यक्ति पर किसी तरह का अतिरिक्त शुल्क लगाने की अनुमति नहीं होगी।
RuPay डेबिट कार्ड पेमेंट पर भी नहीं लगेगा चार्ज
नई व्यवस्था के तहत RuPay डेबिट कार्ड से किए जाने वाले भुगतान को भी शुल्क से मुक्त रखा गया है। यानी बैंक या संबंधित पेमेंट सिस्टम कंपनी RuPay डेबिट कार्ड से भुगतान करने या प्राप्त करने वाले व्यक्ति से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कोई चार्ज नहीं ले सकेगी।
सरकार का यह कदम डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने और आम लोगों के लिए इलेक्ट्रॉनिक भुगतान को आसान बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
2,000 रुपये से ज्यादा के UPI ट्रांजैक्शन का क्या होगा?
नई व्यवस्था में खास तौर पर 2,000 रुपये तक के UPI लेनदेन पर शुल्क लगाने पर रोक लगाई गई है। ऐसे में 2,000 रुपये से अधिक के कुछ UPI मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर भविष्य में शुल्क लगाए जाने की संभावना बनी हुई है। हालांकि, फिलहाल UPI पेमेंट पर Merchant Discount Rate यानी MDR लागू नहीं है।
अगस्त में सरकार ने संकेत दिया था कि एक निश्चित सीमा से अधिक कुछ UPI मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर मामूली MDR लागू करने पर विचार किया जा सकता है। साथ ही सरकार ने स्पष्ट किया था कि आम उपभोक्ता और व्यक्ति-से-व्यक्ति यानी P2P भुगतान को मुफ्त रखने की व्यवस्था जारी रहेगी।
सरकार के अनुसार, यह बदलाव भारत के डिजिटल पेमेंट सिस्टम को लंबे समय तक टिकाऊ, प्रतिस्पर्धी और देश की तेजी से बढ़ती डिजिटल अर्थव्यवस्था के अनुरूप मजबूत बनाने की व्यापक कोशिश का हिस्सा है।
अगस्त में UPI ने बनाया नया रिकॉर्ड
इसी बीच UPI के इस्तेमाल में लगातार बढ़ोतरी देखने को मिली है। NPCI के आंकड़ों के मुताबिक, अगस्त 2026 में UPI के जरिए रिकॉर्ड 24.51 अरब यानी 2451 करोड़ ट्रांजैक्शन हुए। इन लेनदेन की कुल वैल्यू करीब 29.8 लाख करोड़ रुपये रही।
जुलाई 2026 में UPI ट्रांजैक्शन की संख्या 23.66 अरब थी, जबकि जून में यह आंकड़ा 22.72 अरब और मई में 23.2 अरब रहा था। अगस्त में ट्रांजैक्शन वॉल्यूम ने इन सभी आंकड़ों को पीछे छोड़ दिया।
सालाना आधार पर भी तेजी से बढ़ा UPI
NPCI के आंकड़ों के अनुसार, अगस्त 2026 में UPI के जरिए हुए लेनदेन की कुल वैल्यू 29.82 लाख करोड़ रुपये रही। पिछले साल अगस्त में यह करीब 24.85 लाख करोड़ रुपये थी। इस तरह सालाना आधार पर ट्रांजैक्शन वैल्यू में करीब 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
वहीं, अगस्त 2026 में UPI ट्रांजैक्शन की संख्या 24.51 अरब रही, जो पिछले साल इसी महीने के 19.63 अरब के मुकाबले करीब 22 प्रतिशत अधिक है। इससे साफ है कि देश में डिजिटल भुगतान का इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है।
NPCI यानी National Payments Corporation of India भारत में रिटेल पेमेंट और सेटलमेंट सिस्टम के संचालन से जुड़ी प्रमुख संस्था है। यह भारतीय रिजर्व बैंक और Indian Banks’ Association की पहल है।
