नई दिल्ली. पटना में पीड़ितों के अधिकारों और उन्हें मिलने वाली कानूनी सहायता को अधिक व्यवस्थित बनाने की दिशा में एक नई पहल शुरू हुई है। मुख्य न्यायाधीश भारत (CJI) न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने शनिवार को बिहार राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (BSLSA) के परिसर में देश के पहले पीड़ित अधिकार केंद्र का उद्घाटन किया। यह केंद्र अपराध के पीड़ितों को उनके कानूनी अधिकारों और विभिन्न जरूरी सेवाओं तक पहुंच दिलाने के लिए सिंगल-विंडो व्यवस्था के रूप में काम करेगा। इसका उद्देश्य पीड़ितों को अलग-अलग सरकारी विभागों और संस्थानों के चक्कर लगाने से बचाना और उपलब्ध सहायता को एक समन्वित व्यवस्था के तहत पहुंचाना है।
एक ही केस रिकॉर्ड से कम होगी बार-बार परेशानी
Victim Rights Centre की खास व्यवस्था यह होगी कि प्रत्येक पीड़ित के मामले का एक ही रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा। इसके बाद केंद्र संबंधित विभागों और संस्थानों के साथ समन्वय कर मामले में उपलब्ध अधिकारों और सहायता को दिलाने की प्रक्रिया पर नजर रखेगा। इससे पीड़ितों को अलग-अलग अधिकारियों या संस्थानों के सामने बार-बार अपनी पूरी घटना बताने की जरूरत कम होगी। केंद्र तय समयसीमा के भीतर मामलों की प्रगति की निगरानी करेगा और मामला तब तक खुला रहेगा, जब तक संबंधित राहत या सहायता मिलकर उसका सत्यापन नहीं हो जाता।
कानूनी सहायता के साथ मनोवैज्ञानिक सहयोग पर भी जोर
केंद्र का फोकस केवल कानूनी सहायता तक सीमित नहीं रहेगा। पीड़ितों की जरूरत के अनुसार उन्हें मनोवैज्ञानिक सहायता, काउंसलिंग और अन्य जरूरी सेवाओं से जोड़ने की व्यवस्था भी की जाएगी। केंद्र पुलिस, अस्पतालों, बाल कल्याण समितियों, वन स्टॉप सेंटर, सरकारी विभागों और पीड़ित सहायता से जुड़े अन्य संगठनों के साथ समन्वय करेगा। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कानून के तहत उपलब्ध सहायता और अधिकार पीड़ित तक प्रभावी तरीके से पहुंच सकें।
‘Invisible Victims’ को भी मिलेगा सहयोग
इस पहल में उन लोगों को भी ध्यान में रखा गया है जो सीधे किसी अपराध के पीड़ित न होने के बावजूद किसी मामले के कारण गंभीर सामाजिक या आर्थिक मुश्किलों का सामना करते हैं। परियोजना में ऐसे लोगों को ‘victims of circumstances’ के तौर पर शामिल किया गया है। उदाहरण के तौर पर लंबे समय तक विचाराधीन कैदी के रूप में जेल में रहने वाले परिवार के एकमात्र कमाने वाले सदस्य के परिवार या वर्षों तक हिरासत में रहने के बाद बरी हुए व्यक्ति से जुड़े परिवारों को सहायता की जरूरत हो सकती है। केंद्र ऐसे मामलों की पहचान कर उपलब्ध सहायता और अधिकारों तक पहुंच बनाने में मदद करेगा।
12 महीने का पायलट प्रोजेक्ट, बाद में पूरे बिहार में विस्तार
Victim Rights Centre को फिलहाल पटना जिले में 12 महीने के पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू किया गया है। इस दौरान केंद्र की कार्यप्रणाली और परिणामों का आकलन किया जाएगा। इसके बाद योजना को राज्य के अन्य जिलों में संबंधित जिला विधिक सेवा प्राधिकरणों के माध्यम से लागू करने का प्रस्ताव है। केंद्र के लिए किसी नए वैधानिक निकाय या अलग कानून की जरूरत नहीं होगी। यह बिहार राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के मौजूदा ढांचे, कर्मचारियों और संसाधनों के माध्यम से संचालित किया जाएगा।
ट्रांसजेंडर हेल्पलाइन भी शुरू
कार्यक्रम के दौरान ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए एक समर्पित हेल्पलाइन भी शुरू की गई। इसका उद्देश्य ट्रांसजेंडर लोगों को कानूनी सहायता के साथ पहचान प्रमाणपत्र और आवास, रोजगार, स्वास्थ्य सेवाओं तथा अन्य कल्याणकारी योजनाओं तक पहुंच बनाने में मदद करना है। यह पहल बिहार राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की 2023 की योजना से जुड़ी है, जो ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के पुनर्वास और न्याय तक पहुंच को बढ़ावा देने के लिए बनाई गई है।
दूरदराज के इलाकों तक पहुंच बढ़ाने के लिए वाहन भी रवाना
CJI सूर्यकांत ने कार्यक्रम के दौरान मल्टी-यूटिलिटी वाहनों को भी रवाना किया। इन वाहनों का इस्तेमाल कानूनी सहायता और संबंधित सेवाओं की पहुंच को राज्य के दूरदराज के क्षेत्रों तक मजबूत करने के लिए किया जाएगा। कार्यक्रम में Victim Rights Centre से संबंधित एक प्रकाशन भी जारी किया गया, जिसमें केंद्र की योजना, उसकी Standard Operating Procedure और मामलों के अलग-अलग चरणों को दर्ज करने के लिए निर्धारित प्रारूप शामिल हैं।
पहल के पीछे क्या है उद्देश्य?
Victim Rights Centre की परिकल्पना का मुख्य उद्देश्य पीड़ितों के लिए पहले से मौजूद कानूनी अधिकारों और सहायता सेवाओं को एक-दूसरे से जोड़ना है। अधिकारियों के अनुसार समस्या कई मामलों में अधिकारों की अनुपस्थिति की नहीं, बल्कि अलग-अलग संस्थानों के बीच समन्वय की होती है। नया केंद्र इसी अंतर को कम करने का प्रयास करेगा, ताकि पीड़ित को पुलिस, अस्पताल, अदालत, सरकारी विभाग और अन्य संस्थानों के बीच अपनी सहायता के लिए बार-बार संपर्क न करना पड़े।
इस पहल को पटना हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति वी. कामेश्वर राव और बिहार राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के कार्यकारी अध्यक्ष न्यायमूर्ति सुधीर सिंह के मार्गदर्शन में आगे बढ़ाया गया है। केंद्र के संचालन और नीति संबंधी दिशा के लिए एक स्टीयरिंग कमेटी की व्यवस्था भी की गई है। पायलट प्रोजेक्ट के अनुभव के आधार पर आगे इसे बिहार के अन्य जिलों तक ले जाने की योजना है।

