नई दिल्ली: दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने मुंबई में शिवसेना के अध्यक्ष उद्धव ठाकरे से उनके आवास पर मुलाकात की. इस दौरान, केजरीवाल ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में सेवाओं के नियंत्रण से जुड़े केंद्र के अध्यादेश के खिलाफ आम आदमी पार्टी की लड़ाई में उद्धव का समर्थन मांगा.
आप के दूसरे नेता भी उपस्थित
उद्धव से मुलाकात के दौरान पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान, ‘आप’ के राज्यसभा सदस्य संजय सिंह और राघव चड्ढा तथा दिल्ली सरकार में मंत्री आतिशी भी केजरीवाल के साथ थीं.
सीएम केजरीवाल बुधवार को ही राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के प्रमुख शरद पवार से भी मिलकर केंद्र के अध्यादेश के खिलाफ ‘आप’ की लड़ाई में उनका समर्थन मांगेंगे. इस अध्यादेश के खिलाफ विपक्षी दलों का समर्थन जुटाने के लिए देशभर की यात्रा के तहत केजरीवाल और मान ने मंगलवार को कोलकाता में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से मुलाकात की थी.
विपक्ष का मांगा समर्थन
केजरीवाल ने मंगलवार से देशव्यापी दौरे की शुरुआत की है. केजरीवाल नौकरशाहों के ट्रांसफर और पोस्टिंग पर केंद्र के अध्यादेश के खिलाफ विपक्षी नेताओं का समर्थन मांगने के लिए दौरे कर रहे हैं. दिल्ली के सीएम ने दिल्ली की जनता के अधिकार छीनने का आरोप लगाते हुए कहा कि अध्यादेश को राज्यसभा में पारित करने की अनुमति नहीं दी जा सकती है. राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार अधिनियम, 1991 में संशोधन करने के लिए अध्यादेश लाया गया था. अध्यादेश सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए फैसले को दरकिनार करता है.
ममता ने भी की थी अपील
केजरीवाल से मुलाकात करने के थोड़ी देर बाद ही सीएम ममता बनर्जी ने विपक्षी पार्टियों से अपील की है. उन्होंने कहा कि सभी को अध्यादेश का विरोध करना चाहिए. ममता ने कहा कि देश को सिर्फ सुप्रीम कोर्ट ही बचा सकता है. ममता का कहना है कि केंद्र न्यायपालिका सहित सभी एजेंसियों को नियंत्रित करना चाहता है. मेरी अपील है कि सभी विपक्षी दल से अध्यादेश का विरोध करें, मेरी पार्टी ने अध्यादेश का विरोध करने का फैसला किया है.
इससे एक हफ्ते पहले ही उच्चतम न्यायालय ने पुलिस, लोक सेवा और भूमि से संबंधित विषयों को छोड़कर बाकी सभी मामलों में सेवाओं का नियंत्रण दिल्ली की चुनी हुई सरकार को सौंप दिया था. किसी अध्यादेश को छह महीने के भीतर संसद की मंजूरी मिलना आवश्यक होता है. माना जा रहा है कि केंद्र सरकार संसद के मानसून सत्र में इस अध्यादेश से संबंधित विधेयक पेश कर सकती है.
