नई दिल्ली. दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण एक बार फिर बढ़ने लगा है। बारिश के बाद साफ हुई हवा अब दोबारा जहरीली होती जा रही है। सोमवार, 2 नवंबर की सुबह दिल्ली और नोएडा का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 300 के पार पहुंच गया, जिसके बाद दोनों शहरों की हवा ‘बेहद खराब’ श्रेणी में दर्ज की गई। राजधानी के कई इलाकों में धुंध की मोटी परत दिखाई दी। चिंता की बात यह है कि प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए वाहनों की आवाजाही से जुड़े प्रतिबंध लागू होने के बावजूद वायु गुणवत्ता में गिरावट दर्ज की गई है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के समीर ऐप के अनुसार, सोमवार सुबह 8:05 बजे दिल्ली का AQI 310 दर्ज किया गया। रविवार को यह 277 था। यानी एक दिन में राजधानी की हवा की गुणवत्ता और खराब हो गई। वहीं, नोएडा का AQI 311 तक पहुंच गया, जो दिल्ली से भी थोड़ा अधिक रहा।
दिल्ली-एनसीआर के शहरों में कितना रहा AQI?
सोमवार सुबह दिल्ली और नोएडा की हवा सबसे खराब स्थिति में रही। दोनों शहरों का AQI 300 के पार पहुंचने के कारण इन्हें ‘बेहद खराब’ श्रेणी में रखा गया। वहीं, गाजियाबाद और गुरुग्राम में वायु गुणवत्ता ‘खराब’ श्रेणी में दर्ज की गई। फरीदाबाद की स्थिति तुलनात्मक रूप से बेहतर रही।
शहरों के AQI का विवरण इस प्रकार है:
नोएडा: 311 — बेहद खराब
दिल्ली: 310 — बेहद खराब
गाजियाबाद: 278 — खराब
गुरुग्राम: 230 — खराब
फरीदाबाद: 116 — मध्यम
ये आंकड़े 2 नवंबर की सुबह 8:05 बजे के हैं। अलग-अलग निगरानी केंद्रों पर प्रदूषण का स्तर अलग हो सकता है और AQI में दिनभर बदलाव भी संभव है।
बारिश से मिली राहत ज्यादा दिन नहीं टिकी
अक्टूबर के आखिरी दिनों में हुई बारिश ने दिल्ली-एनसीआर की हवा को कुछ समय के लिए साफ कर दिया था। 30 अक्टूबर को दिल्ली का AQI गिरकर 60 पर पहुंच गया था। रिपोर्ट के मुताबिक, अक्टूबर में राजधानी का औसत AQI 167 रहा, जो 2015 के बाद अक्टूबर महीने का सबसे कम औसत बताया गया है।
इसी दौरान दिल्ली में अधिकतम तापमान 20.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जिसे रिपोर्ट में 1951 के बाद अक्टूबर का सबसे कम अधिकतम तापमान बताया गया है।
नोएडा में भी बारिश के बाद वायु गुणवत्ता में सुधार हुआ था। 30 अक्टूबर को यहां AQI 58 दर्ज किया गया। हालांकि, इसके बाद प्रदूषण तेजी से बढ़ने लगा। 31 अक्टूबर को AQI 106 और 1 नवंबर को 248 पहुंच गया। इसके बाद 2 नवंबर की सुबह यह बढ़कर 311 हो गया।
GRAP के प्रतिबंधों के बावजूद क्यों बढ़ा प्रदूषण?
दिल्ली में वायु गुणवत्ता बिगड़ने के बीच 1 नवंबर से संशोधित ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) के तहत वाहनों के प्रवेश पर प्रतिबंध कड़े किए गए हैं। इसका उद्देश्य प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों की आवाजाही सीमित करना और हवा की गुणवत्ता में सुधार लाना है।
नियमों के तहत दिल्ली के बाहर पंजीकृत ऐसे पेट्रोल और डीजल वाहनों के राजधानी में प्रवेश पर रोक लगाई गई है, जो BS-VI उत्सर्जन मानकों को पूरा नहीं करते। यह प्रतिबंध 31 जनवरी 2027 तक लागू रहने की जानकारी दी गई है। इलेक्ट्रिक और CNG वाहनों को इससे छूट दी गई है।
इसके अलावा, निर्धारित उत्सर्जन मानकों को पूरा नहीं करने वाले व्यावसायिक मालवाहक वाहनों और बसों पर भी प्रतिबंध लागू हैं। दिल्ली-एनसीआर के प्रवेश बिंदुओं पर जांच तेज की गई है। नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहनों की पहचान के लिए ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) और रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन (RFID) जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है।
हालांकि, केवल वाहनों पर प्रतिबंध लगाने से प्रदूषण पर तुरंत नियंत्रण पाना मुश्किल हो सकता है। हवा की दिशा, मौसम, स्थानीय उत्सर्जन और अन्य प्रदूषण स्रोत भी AQI को प्रभावित करते हैं।
‘बेहद खराब’ हवा में सांस लेना कितना खतरनाक?
दिल्ली और नोएडा में AQI 300 के पार पहुंचने का मतलब है कि हवा की गुणवत्ता स्वास्थ्य के लिहाज से गंभीर चिंता का विषय बन गई है। लंबे समय तक ऐसी हवा में रहने से सांस संबंधी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है।
गाजियाबाद और गुरुग्राम में भी हवा ‘खराब’ श्रेणी में रही। इस स्तर पर लंबे समय तक प्रदूषित हवा के संपर्क में रहने से कई लोगों को सांस लेने में परेशानी हो सकती है। वहीं, फरीदाबाद में AQI 116 होने के बावजूद फेफड़ों की बीमारी, अस्थमा और हृदय रोग से पीड़ित लोगों को सावधानी बरतने की जरूरत है।
विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार, प्रदूषण बढ़ने पर बच्चों, बुजुर्गों और सांस या हृदय संबंधी बीमारियों से पीड़ित लोगों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। बाहर निकलते समय स्थानीय AQI की स्थिति पर नजर रखना और खुले में लंबे समय तक व्यायाम करने से बचना उपयोगी हो सकता है।
दिल्ली-एनसीआर में बारिश से मिली राहत के बाद प्रदूषण का दोबारा बढ़ना चिंता बढ़ा रहा है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि मौसम में बदलाव और प्रदूषण नियंत्रण के उपाय आने वाले दिनों में वायु गुणवत्ता को कितना बेहतर बना पाते हैं।

