नई दिल्ली. मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ केरल सरकार ने प्रारंभिक जांच के निर्देश दिए हैं। मामला वर्ष 2006 का है, जब ज्ञानेश कुमार केरल में लोक निर्माण विभाग (PWD) के सचिव थे। उन पर आरोप है कि उन्होंने एक सड़क परियोजना के बिल पास कराने के लिए ठेकेदारों से 2 करोड़ रुपये की रिश्वत मांगी थी। इस मामले की जांच सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (VACB) करेगा।
केरल के गृह मंत्री रमेश चेन्निथला के कार्यालय के मुताबिक, यह जांच ठेकेदार साजन की शिकायत के आधार पर कराई जाएगी। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि ज्ञानेश कुमार ने मलेशियाई इंजीनियर ली सी बीन से रिश्वत मांगी थी। ली उस समय भारत और मलेशिया के संयुक्त उपक्रम PATI-BEL की सड़क परियोजना के प्रोजेक्ट मैनेजर थे।
इंजीनियर की आत्महत्या से जुड़ा है मामला
शिकायत के अनुसार, मलेशियाई इंजीनियर ली सी बीन ने नवंबर 2005 में मलेशिया में आत्महत्या कर ली थी। आरोप है कि उन्होंने अपने पीछे एक सुसाइड नोट छोड़ा था, जिसमें PWD अधिकारियों पर रिश्वत की मांग के कारण परियोजना के भुगतान रोकने का आरोप लगाया गया था।
ठेकेदार साजन ने 23 अक्टूबर को गृह मंत्री को दी शिकायत में दावा किया कि वह PATI-BEL परियोजना में सामग्री आपूर्तिकर्ता थे और काम की निगरानी करने वाले दो लोगों में शामिल थे। उन्होंने कहा कि भुगतान समय पर नहीं होने के कारण ली स्थानीय ठेकेदारों और आपूर्तिकर्ताओं को पैसे नहीं दे पा रहे थे।
साजन के मुताबिक, ली ने उन्हें बताया था कि बिल पास कराने के लिए ज्ञानेश कुमार ने 2 करोड़ रुपये की मांग की थी। हालांकि, PATI-BEL कंपनी कथित तौर पर रिश्वत देने के लिए तैयार नहीं थी। साजन ने यह भी दावा किया कि इंजीनियर के परिवार ने कंपनी के कर्मचारियों को बताया था कि उनके सुसाइड नोट में कुमार का नाम था।
शिकायतकर्ता ने कहा है कि यदि सरकार जांच का आदेश देती है तो वह जांच एजेंसी को सबूत और ली के परिवार के सदस्यों के बयान उपलब्ध कराने के लिए तैयार हैं।
पहले भी हो चुकी है मामले की जांच
यह मामला पहली बार जांच के दायरे में नहीं आया है। पिछले महीने कांग्रेस नेता मलयालमकुझी वेणुगोपाल ने गृह मंत्री से शिकायत कर आरोप लगाया था कि मलेशियाई इंजीनियर के सुसाइड नोट में ज्ञानेश कुमार का नाम था। उन्होंने यह भी आरोप लगाया था कि वर्ष 2006 में हुई सतर्कता जांच बाहरी दबाव के कारण प्रभावित हुई थी।
गृह मंत्री के कार्यालय के अनुसार, वेणुगोपाल की शिकायत के बाद VACB ने ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जांच दोबारा खोलने के संबंध में कानूनी राय मांगी थी। अब साजन की नई शिकायत मिलने के बाद प्रारंभिक जांच कराने का फैसला लिया गया है। इस जांच के बाद ही FIR दर्ज करने पर निर्णय होगा।
विधानसभा में गृह मंत्री ने क्या बताया था?
पिछले महीने केरल विधानसभा में गृह मंत्री रमेश चेन्निथला ने बताया था कि वर्ष 2006 के सड़क निर्माण कार्यों से जुड़े आरोपों की VACB जांच पहले ही बंद कर चुकी है। उन्होंने कहा था कि आरोपों की पुष्टि नहीं होने के कारण एजेंसी ने सरकार को आगे कार्रवाई नहीं करने की सिफारिश की थी।
चेन्निथला के मुताबिक, वर्ष 2003 से 2006 के बीच बिना उचित टेंडर प्रक्रिया के 76 कार्य आवंटित किए जाने के आरोपों की भी सतर्कता जांच हुई थी। इनमें ज्ञानेश कुमार से जुड़ा एक मामला भी शामिल था। हालांकि, अनियमितताएं साबित नहीं होने के बाद VACB ने सभी कार्यवाहियां रोक दी थीं।
उन्होंने यह भी बताया था कि वर्ष 2012 में एजेंसी ने आठ मामलों को अदालत में ‘मिस्टेक ऑफ फैक्ट’ यानी तथ्यों की गलती के आधार पर बंद करने की रिपोर्ट दी थी, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया था।
सुसाइड नोट अब तक सार्वजनिक नहीं
इस पूरे मामले में एक अहम पहलू यह है कि मलेशियाई इंजीनियर ली सी बीन का कथित सुसाइड नोट अब तक सार्वजनिक नहीं किया गया है। उसमें ज्ञानेश कुमार का नाम होने का दावा शिकायतकर्ताओं ने किया है, लेकिन इसकी स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।
फिलहाल केरल सरकार ने केवल प्रारंभिक जांच के निर्देश दिए हैं। रिश्वत मांगने के आरोपों की पुष्टि नहीं हुई है और ज्ञानेश कुमार के खिलाफ इस मामले में FIR दर्ज होने की जानकारी भी सामने नहीं आई है।

