नई दिल्ली. नीति आयोग की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत का डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) आने वाले वर्षों में अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा ग्रोथ इंजन बन सकता है। फिलहाल यह GDP में करीब 1% योगदान देता है, लेकिन 2030 तक इसके लगभग 4% तक पहुंचने की संभावना जताई गई है।
NITI Aayog ने अपनी “DPI 2.0” रोडमैप रिपोर्ट में कहा है कि डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर का अगला चरण “विकसित भारत” के लक्ष्य को हासिल करने में अहम भूमिका निभाएगा। रिपोर्ट के मुताबिक, DPI 1.0 ने पहले ही सेवाओं की पहुंच बढ़ाने, वित्तीय समावेशन को मजबूत करने और बड़े पैमाने पर आर्थिक गतिविधियों को सक्षम बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि डिजिटल अपनाने (digital adoption) का असर रैखिक (linear) नहीं बल्कि तेज़ी से बढ़ने वाला रहा है। जैसे-जैसे अधिक लोग, व्यवसाय और संस्थान इस सिस्टम से जुड़ते गए, इसके फायदे तेजी से बढ़ते गए।
DPI 2.0 का फोकस क्या होगा?
नीति आयोग के अनुसार, अगला चरण उन संरचनात्मक बाधाओं (structural barriers) को दूर करने पर केंद्रित होगा, जो खासकर निम्न और मध्यम आय वर्ग के लोगों की आर्थिक भागीदारी को सीमित करती हैं। इसका उद्देश्य डिजिटल सेवाओं की पहुंच और उपयोगिता को और व्यापक बनाना है।
AI की बड़ी भूमिका
रिपोर्ट में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को एक महत्वपूर्ण स्तंभ बताया गया है। Artificial Intelligence को DPI के साथ जोड़ने से उत्पादकता, नवाचार और सेवा वितरण में बड़ा सुधार संभव है। इससे छोटे व्यापारियों, स्टार्टअप्स और आम नागरिकों को उन्नत डिजिटल टूल्स का फायदा मिलेगा।
भारत की डिजिटल नींव
भारत की डिजिटल क्रांति कुछ प्रमुख प्लेटफॉर्म्स पर आधारित रही है, जैसे, Aadhaar, जनधन बैंक खाते और मोबाइल कनेक्टिविटी, इनके जरिए Direct Benefit Transfer (DBT) प्रणाली विकसित हुई, जिसे दुनिया की सबसे बड़ी सरकारी भुगतान प्रणाली माना जाता है। इससे सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता आई और लीकेज कम हुआ।
UPI ने बदली अर्थव्यवस्था की तस्वीर
2016 में शुरू हुआ Unified Payments Interface भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था के लिए टर्निंग पॉइंट साबित हुआ। यह आज दुनिया के सबसे बड़े रियल-टाइम पेमेंट सिस्टम्स में से एक है, जिसने डिजिटल भुगतान को आम लोगों तक पहुंचाया। अन्य बड़े सुधार Goods and Services Tax (GST), FASTag इन सुधारों ने लॉजिस्टिक्स को बेहतर बनाया, बाजार को एकीकृत किया और छोटे व्यवसायों को औपचारिक अर्थव्यवस्था में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित किया।
आगे का रास्ता
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की अगली आर्थिक छलांग इस बात पर निर्भर करेगी कि डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि, मोबिलिटी और MSME फाइनेंस जैसे क्षेत्रों में कितनी प्रभावी तरीके से लागू किया जाता है। कुल मिलाकर, DPI 2.0 के जरिए सरकार भारत के डिजिटल ढांचे को एक दीर्घकालिक “मल्टीप्लायर” में बदलना चाहती है, जो न केवल GDP बढ़ाए बल्कि समावेशी विकास (inclusive growth) को भी गति दे।
