नई दिल्ली. देश में डिजिटल सुशासन और नागरिक सेवाओं के क्षेत्र में पंचायती राज संस्थाओं ने एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस पुरस्कार (NAeG) 2026 में पंचायती राज से जुड़ी चार प्रमुख पहलों को स्वर्ण और रजत पुरस्कारों के लिए चुना गया है। यह सम्मान इस बात का प्रमाण है कि ग्राम पंचायतें अब केवल स्थानीय प्रशासन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि तकनीक आधारित, पारदर्शी और नागरिक-केंद्रित शासन का नया मॉडल प्रस्तुत कर रही हैं।
इन पुरस्कारों का वितरण 1 और 2 जुलाई 2026 को राजस्थान के जयपुर में आयोजित होने वाले 29वें राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस सम्मेलन में किया जाएगा। सम्मेलन का विषय “विकसित भारत 2047 : एआई-सक्षम, डेटा-आधारित और सुरक्षित डिजिटल शासन” रखा गया है। इसका आयोजन प्रशासनिक सुधार एवं लोक शिकायत विभाग (DARPG), इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) तथा राजस्थान सरकार के संयुक्त तत्वावधान में किया जा रहा है।
विजेताओं को मिलेगा आर्थिक प्रोत्साहन
राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस पुरस्कार 2026 के अंतर्गत स्वर्ण पुरस्कार विजेताओं को ट्रॉफी, प्रमाण-पत्र और ₹10 लाख की प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाएगी, जबकि रजत पुरस्कार विजेताओं को ₹5 लाख की राशि दी जाएगी। यह धनराशि संबंधित परियोजनाओं के विस्तार, सार्वजनिक कल्याण कार्यक्रमों तथा संसाधनों की कमी दूर करने के लिए उपयोग की जाएगी।
पंचायती राज मंत्रालय का ‘पंचायत एडवांसमेंट इंडेक्स’ बना राष्ट्रीय मॉडल
पंचायती राज मंत्रालय की प्रमुख पहल पंचायत एडवांसमेंट इंडेक्स (PAI) को “डेटा एनालिटिक्स के माध्यम से डिजिटल परिवर्तन” श्रेणी में स्वर्ण पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। यह प्लेटफॉर्म देशभर की ग्राम पंचायतों के प्रदर्शन का मूल्यांकन करता है और स्थानीय सतत विकास लक्ष्यों (LSDGs) के नौ विषयों के आधार पर पंचायतों की प्रगति को मापता है।
यह प्रणाली ग्राम स्तर पर विकास, सेवा वितरण और शासन की वास्तविक स्थिति का डेटा-आधारित आकलन उपलब्ध कराती है, जिससे नीति निर्माण और संसाधनों के बेहतर उपयोग में सहायता मिलती है। मंत्रालय के अनुसार, यह पहल विकसित भारत के लक्ष्य को ग्राम स्तर तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
महाराष्ट्र की कडेपुर ग्राम पंचायत ने रचा इतिहास
महाराष्ट्र के सांगली जिले की कडेपुर ग्राम पंचायत को जमीनी स्तर पर उत्कृष्ट डिजिटल सेवा वितरण के लिए स्वर्ण पुरस्कार मिला है। पंचायत ने पूरी तरह पेपरलेस ई-ऑफिस व्यवस्था विकसित की है और 1,355 से अधिक सेवाएं ऑनलाइन माध्यम से उपलब्ध कराई हैं, जिनका लाभ 4,300 से अधिक नागरिकों को मिला है।
कडेपुर पंचायत ने प्रशासनिक कार्यों के लिए आठ कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित अनुप्रयोग विकसित किए हैं। इसके अलावा ब्लॉकचेन तकनीक के माध्यम से रिकॉर्ड प्रबंधन तथा जीआईएस आधारित संपत्ति जियो-टैगिंग को भी लागू किया गया है। विशेष बात यह है कि यह देश की पहली ग्राम पंचायत है जिसके पास कृत्रिम बुद्धिमत्ता, ब्लॉकचेन, नैनो टेक्नोलॉजी, बायोटेक्नोलॉजी और रोबोटिक्स से संबंधित औपचारिक रूप से स्वीकृत नीतियां हैं।
त्रिपुरा की बिजॉय नगर पंचायत बनी समावेशी विकास का उदाहरण
त्रिपुरा के पश्चिम त्रिपुरा जिले की बिजॉय नगर ग्राम पंचायत को इसी श्रेणी में रजत पुरस्कार प्रदान किया गया है। पंचायत ने सहभागितापूर्ण शासन, वित्तीय पारदर्शिता और डिजिटल समावेशन के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं।
पंचायत का PAI 2.0 स्कोर 88.55 रहा, जो पहले की तुलना में 38 प्रतिशत अधिक है। पंचायत की स्वयं की आय (Own Source Revenue) में लगभग 194 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। यहां 100 से अधिक सेवाएं ऑनलाइन उपलब्ध हैं और “ग्राम बार्ता” प्लेटफॉर्म के माध्यम से प्रत्येक परिवार तक रियल-टाइम वॉयस संचार की सुविधा पहुंचाई गई है। पंचायत ने महिलाओं के बीच 100 प्रतिशत डिजिटल साक्षरता हासिल कर एक नई मिसाल कायम की है।
नंदुरबार की ई-आरोग्य धमनी को भी मिला स्वर्ण सम्मान
महाराष्ट्र के नंदुरबार जिला परिषद के स्वास्थ्य विभाग की पहल ई-आरोग्य धमनी को जिला स्तरीय ई-गवर्नेंस पहल श्रेणी में स्वर्ण पुरस्कार मिला है। यह परियोजना दूरस्थ और आदिवासी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने के लिए आधुनिक डिजिटल तकनीकों का उपयोग कर रही है।
इस पहल के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ी है, उपचार प्रक्रिया में तेजी आई है और ग्रामीण क्षेत्रों के नागरिकों को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध हो रही हैं। सरकार का मानना है कि यह मॉडल ग्रामीण स्वास्थ्य प्रशासन में डिजिटल परिवर्तन का उत्कृष्ट उदाहरण है।
बढ़ती भागीदारी ने दिखाई डिजिटल पंचायतों की ताकत
राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस पुरस्कारों में ग्राम पंचायतों की भागीदारी लगातार बढ़ रही है। वर्ष 2025 में 26 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से 1.45 लाख से अधिक प्रविष्टियां प्राप्त हुई थीं, जबकि 2026 में यह संख्या बढ़कर 30 राज्यों से 1.65 लाख ग्राम पंचायतों तक पहुंच गई।
पंचायती राज मंत्रालय के अनुसार, यह वृद्धि पंचायतों के बीच डिजिटल शासन को बढ़ावा देने, क्षमता निर्माण, प्रशिक्षण और तकनीकी सहयोग के लगातार प्रयासों का परिणाम है। मंत्रालय का कहना है कि अब देश की ग्राम पंचायतें डिजिटल तकनीक के सहारे पारदर्शी, जवाबदेह और नागरिक-केंद्रित प्रशासन की नई पहचान बन रही हैं।
ग्रामीण भारत में डिजिटल सुशासन की नई तस्वीर
राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस पुरस्कार 2026 के परिणाम यह दर्शाते हैं कि भारत में डिजिटल परिवर्तन केवल बड़े शहरों या सरकारी मंत्रालयों तक सीमित नहीं है। ग्राम पंचायतें भी तकनीक का प्रभावी उपयोग कर नागरिक सेवाओं की गुणवत्ता बढ़ा रही हैं और स्थानीय स्तर पर सुशासन के नए मानक स्थापित कर रही हैं। कडेपुर, बिजॉय नगर, पंचायत एडवांसमेंट इंडेक्स और ई-आरोग्य धमनी जैसी पहलें इस बात का प्रमाण हैं कि विकसित भारत का सपना गांवों की डिजिटल प्रगति के बिना पूरा नहीं हो सकता।
