नई दिल्ली: देश के ग्रामीण इलाकों में आय बढ़ने की रफ्तार पिछले दो वर्षों में सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई है। वहीं, लोगों की गैर-औपचारिक स्रोतों (Informal Credit) से कर्ज लेने पर निर्भरता भी रिकॉर्ड स्तर तक बढ़ गई है। यह जानकारी राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (NABARD) के Rural Economic Conditions and Sentiments Survey की जुलाई 2026 रिपोर्ट में सामने आई है। सर्वे के अनुसार, ग्रामीण अर्थव्यवस्था अभी स्थिर बनी हुई है, लेकिन मानसून और कृषि को लेकर बनी अनिश्चितता आने वाले महीनों में चिंता बढ़ा सकती है।
कम लोगों ने आय बढ़ने की बात कही
सर्वे के मुताबिक, जुलाई 2026 में केवल 27.7 फीसदी ग्रामीण परिवारों ने बताया कि उनकी आय पिछले साल की तुलना में बढ़ी है। पिछली रिपोर्ट में यह आंकड़ा 29.6 फीसदी था, जबकि नवंबर 2025 में 42.2 फीसदी परिवारों ने आय बढ़ने की जानकारी दी थी। यह सितंबर 2024 में सर्वे शुरू होने के बाद सबसे कम स्तर है।
वहीं, 52.6 फीसदी परिवारों ने कहा कि उनकी आय में कोई बदलाव नहीं हुआ। यह अब तक का सबसे अधिक प्रतिशत है।
मानसून और खेती को लेकर चिंता
NABARD ने कहा कि वैश्विक स्तर पर बढ़ती कमोडिटी कीमतें, एल-नीनो की आशंका, कई राज्यों में सामान्य से कम बारिश और खरीफ फसलों की धीमी बुवाई का असर ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर दिख रहा है। हालांकि, दक्षिण-पश्चिम मानसून की प्रगति और सरकारी खर्च के कारण हालात पूरी तरह खराब नहीं हुए हैं।
रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि यदि मानसून की स्थिति कमजोर रहती है, तो इसका असर कृषि उत्पादन, किसानों की आय और ग्रामीण बाजार में मांग पर पड़ सकता है।
खर्च और बचत दोनों में आई कमी
सर्वे के अनुसार, जिन परिवारों ने अपने खर्च में बढ़ोतरी की बात कही, उनका प्रतिशत घटकर 74.1 फीसदी रह गया। यह दूसरी बार है जब यह आंकड़ा 75 फीसदी से नीचे आया है।
इसके अलावा, वित्तीय बचत बढ़ने की जानकारी देने वाले परिवारों का प्रतिशत घटकर 17.8 फीसदी रह गया, जो सर्वे शुरू होने के बाद सबसे कम है। इससे साफ है कि ग्रामीण परिवारों की बचत करने की क्षमता भी कमजोर हुई है।
गैर-औपचारिक कर्ज पर बढ़ी निर्भरता
रिपोर्ट के अनुसार, कुल कर्ज लेने वालों की संख्या में थोड़ी कमी आई है, लेकिन गैर-औपचारिक स्रोतों से कर्ज लेने वालों की संख्या बढ़ गई है। अब 23.6 फीसदी परिवार केवल दोस्तों, रिश्तेदारों या अन्य निजी स्रोतों से उधार ले रहे हैं। यह अब तक का सबसे अधिक स्तर है।
दूसरी ओर, 51 फीसदी परिवार केवल बैंकों और अन्य औपचारिक वित्तीय संस्थानों से कर्ज ले रहे हैं। गैर-औपचारिक कर्ज लेने वाले लगभग दो-तिहाई परिवारों ने बताया कि उन्होंने दोस्तों और रिश्तेदारों से उधार लिया।
आने वाले समय को लेकर बढ़ी चिंता
सर्वे में यह भी सामने आया कि ग्रामीण परिवार भविष्य को लेकर पहले की तुलना में ज्यादा सतर्क हैं। अगले तीन महीनों में आय और रोजगार बढ़ने की उम्मीद रखने वाले लोगों की संख्या सर्वे शुरू होने के बाद सबसे कम रही। एक साल आगे की आय को लेकर भी लोगों का भरोसा कमजोर हुआ है।
NABARD का मानना है कि इसका मुख्य कारण मानसून को लेकर अनिश्चितता और आर्थिक परिस्थितियों को लेकर बनी चिंता है।
ग्रामीण महंगाई अब भी शहरी इलाकों से ज्यादा
रिपोर्ट ऐसे समय आई है जब ग्रामीण क्षेत्रों में महंगाई शहरी इलाकों की तुलना में अधिक बनी हुई है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, जून में ग्रामीण खुदरा महंगाई 5 फीसदी रही, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह 4 फीसदी थी।
वित्त मंत्रालय ने संसद में बताया कि ग्रामीण महंगाई अधिक होने का एक बड़ा कारण यह है कि ग्रामीण उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) में खाद्य पदार्थों का हिस्सा ज्यादा है। इसलिए खाद्य वस्तुओं की कीमत बढ़ने का असर ग्रामीण परिवारों पर अधिक पड़ता है।
