नई दिल्ली: केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शनिवार को राज्यों से Digital Agriculture Mission और Pulses Self-Reliance Mission के तहत 100 प्रतिशत लक्ष्य हासिल करने और योजनाओं को तय समयसीमा में लागू करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सरकारी योजनाओं का फायदा केवल सरकारी रिपोर्टों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उसका सीधा असर किसानों के खेत और उनकी जेब पर दिखाई देना चाहिए।
Farmer ID बनाने की प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश
पुसा में आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए चौहान ने कहा कि जिन राज्यों ने कृषि योजनाओं को गंभीरता से लागू किया, उन्होंने अपने निर्धारित लक्ष्य से भी बेहतर प्रदर्शन किया है, जबकि कुछ राज्य अभी पीछे चल रहे हैं। उन्होंने सभी राज्यों से तय समयसीमा के भीतर काम पूरा करने को कहा।
कृषि मंत्री ने Farmer ID को पारदर्शिता बढ़ाने वाला महत्वपूर्ण कदम बताया। इसके जरिए सरकारी योजनाओं का भुगतान सीधे किसानों के बैंक खातों में किया जा सकता है। उन्होंने महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ का उदाहरण देते हुए कहा कि केंद्र सरकार Farmer ID बनाने और इसके लिए Camps आयोजित करने के लिए पहले ही फंड जारी कर चुकी है। उन्होंने अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए कि एक महीने के भीतर Farmer ID जारी करने के लक्ष्य को पूरा करने के लिए कैंप लगातार संचालित किए जाएं और जारी राशि का किसी अन्य काम में इस्तेमाल न हो।
10.41 करोड़ किसानों की Farmer ID तैयार
सम्मेलन में साझा किए गए आंकड़ों के मुताबिक, अब तक 26 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 10.41 करोड़ Farmer ID बनाई जा चुकी हैं। यह संख्या PM-KISAN के लाभार्थियों का करीब 84.68 प्रतिशत और कुल Operational Landholdings का लगभग 77 प्रतिशत है।
Digital Land Records को मिशन की रीढ़ बताया
शिवराज सिंह चौहान ने Digital Land Records को भी कृषि क्षेत्र में डिजिटल बदलाव के लिए बेहद महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि Map Integration और Data Verification इस मिशन की रीढ़ हैं। हालांकि, कुछ इलाकों में फसल और खेतों की स्थिति में अंतर के कारण आंकड़ों की सटीकता से जुड़ी चुनौतियां अभी बनी हुई हैं।
कृषि मंत्रालय के अनुसार, अब तक 5.9 लाख गांवों, यानी चिन्हित गांवों के 93.05 प्रतिशत हिस्से के Village Maps का Geo-Referencing पूरा किया जा चुका है। वहीं Digital Crop Survey का दायरा 2024-25 में 290 जिलों से बढ़कर Rabi 2025-26 तक 650 जिलों तक पहुंच गया है। इसे Kharif 2026-27 तक 692 जिलों तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है।
Digital Crop Survey का दायरा भी बढ़ेगा
Digital Crop Survey के तहत कवर होने वाला क्षेत्र 2024-25 में 3.87 करोड़ हेक्टेयर था, जो 2025-26 में बढ़कर 9.18 करोड़ हेक्टेयर हो गया। आगामी Kharif Season में इसे बढ़ाकर 13.4 करोड़ हेक्टेयर करने का लक्ष्य रखा गया है। इससे फसलों और कृषि भूमि से जुड़े आंकड़ों को डिजिटल तरीके से बेहतर ढंग से दर्ज करने में मदद मिलेगी।
दालों का उत्पादन बढ़ा, आयात में आई कमी
Pulses Self-Reliance Mission को लेकर चौहान ने कहा कि देश में दालों का उत्पादन बढ़ाने के साथ आयात पर निर्भरता कम करना जरूरी है। उन्होंने राज्यों से उन क्षेत्रों के बेहतर प्रदर्शन को पूरे देश में दोहराने की अपील की, जहां पिछले साल दालों की खेती का रकबा और उत्पादन बढ़ा है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 2025-26 में देश में दालों का उत्पादन बढ़कर 274.09 लाख टन हो गया, जो 2024-25 में 256.83 लाख टन था। वहीं दालों का आयात 72.56 लाख टन से घटकर 59.64 लाख टन रह गया। इसी अवधि में दालों की खेती का रकबा 277.20 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 286.46 लाख हेक्टेयर हो गया, जबकि उत्पादकता 926 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर से बढ़कर 957 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर पहुंच गई।
2026-27 तक 528 Processing Units बनाने का लक्ष्य
केंद्र सरकार ने दालों की पूरी Value Chain को मजबूत करने के लिए 2026-27 तक राज्यों में 528 Processing Units स्थापित करने का लक्ष्य रखा है। कृषि मंत्री ने अधिकारियों को Processing Units, Cold Storage और Market Linkages के निर्माण में तेजी लाने के निर्देश दिए।
उन्होंने Public-Private Partnership यानी PPP Model के जरिए दालों के Processing और Storage Infrastructure को मजबूत करने पर भी जोर दिया। साथ ही किसानों को बुआई, कटाई और फसल बिक्री के दौरान नुकसान से बचाने के लिए समय पर कृषि Inputs और Payments उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।
सम्मेलन में केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी, हरियाणा के कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा, असम के मंत्री पीयूष हजारिका, अरुणाचल प्रदेश के मंत्री गैब्रियल डेनवांग वांगसू, नगालैंड के मंत्री म्हाथुंग यंथन और केंद्रीय कृषि सचिव अतीश चंद्रा समेत राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
