नई दिल्ली. केंद्र सरकार ने मैसेजिंग प्लेटफॉर्म Telegram के खिलाफ बड़ा कदम उठाया है। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (I&B Ministry) ने पायरेटेड फिल्मों और OTT प्लेटफॉर्म के कॉपीराइट वाले कंटेंट के प्रसार को लेकर Telegram को नोटिस जारी किया है। सरकार ने कंपनी को 15 दिनों के भीतर कार्रवाई रिपोर्ट (Action Taken Report) सौंपने का निर्देश दिया है।
सरकार ने साफ कहा है कि Telegram को तुरंत ऐसे सभी चैनल, ग्रुप, बॉट और अकाउंट्स के खिलाफ कार्रवाई करनी होगी, जो बिना अनुमति फिल्मों, वेब सीरीज और अन्य कॉपीराइट सामग्री को साझा कर रहे हैं।
क्रिएटर इकोनॉमी और फिल्म इंडस्ट्री की सुरक्षा पर जोर
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय का कहना है कि यह कदम भारत की क्रिएटर इकोनॉमी, फिल्म उद्योग, टीवी ब्रॉडकास्टर्स, OTT प्लेटफॉर्म, फिल्म निर्माताओं और कंटेंट वितरकों के हितों की रक्षा के लिए उठाया गया है।
सरकार का मानना है कि ऑनलाइन पायरेसी से कंटेंट बनाने वालों को भारी आर्थिक नुकसान होता है। इसलिए अब केवल अलग-अलग चैनलों को हटाने के बजाय पूरे प्लेटफॉर्म की जवाबदेही तय करने की दिशा में काम किया जा रहा है।
3,142 Telegram चैनलों की हुई पहचान
सरकार को कई OTT प्लेटफॉर्म और कंटेंट मालिकों से शिकायतें मिली थीं कि उनकी फिल्मों और वेब सीरीज को Telegram पर बिना अनुमति साझा किया जा रहा है।
इन शिकायतों की जांच के बाद मंत्रालय ने 3,142 Telegram चैनलों की पहचान की है, जहां कथित तौर पर पायरेटेड फिल्में, वेब सीरीज और अन्य कॉपीराइट सामग्री उपलब्ध कराई जा रही थी।
सरकार ने Telegram को इन सभी चैनलों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने और भविष्य में ऐसी गतिविधियों को रोकने के लिए मजबूत व्यवस्था बनाने को कहा है।
बार-बार नियम तोड़ने वालों पर भी होगी कार्रवाई
नोटिस में Telegram को यह भी निर्देश दिया गया है कि वह केवल कंटेंट हटाने तक सीमित न रहे, बल्कि बार-बार नियम तोड़ने वाले चैनलों, ग्रुप्स, बॉट्स, अकाउंट्स, एडमिन और उनसे जुड़े अन्य लोगों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई करे।
सरकार ने कहा कि किसी भी प्लेटफॉर्म की जिम्मेदारी केवल शिकायत मिलने पर कार्रवाई करने तक सीमित नहीं है, बल्कि उसे खुद भी ऐसे मामलों पर निगरानी रखनी चाहिए।
आईटी कानून के तहत जारी हुआ नोटिस
यह नोटिस सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 (IT Act, 2000) और आईटी (इंटरमीडियरी गाइडलाइंस एवं डिजिटल मीडिया एथिक्स कोड) नियम, 2021 के तहत जारी किया गया है।
इन नियमों के अनुसार किसी भी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म को सरकार या अदालत के आदेश मिलने के बाद गैरकानूनी सामग्री को हटाना अनिवार्य होता है। मंत्रालय ने Telegram को याद दिलाया कि एक इंटरमीडियरी के तौर पर उसे कानून के तहत निर्धारित सभी जिम्मेदारियों का पालन करना होगा।
पहले भी Telegram पर हो चुकी है कार्रवाई
पिछले कुछ महीनों से Telegram भारत में कई मामलों को लेकर जांच के दायरे में रहा है। प्लेटफॉर्म पर धोखाधड़ी, फर्जी पहचान, संवेदनशील सामग्री और अन्य गैरकानूनी गतिविधियों को लेकर सरकार लगातार निगरानी रख रही है।
इससे पहले NEET परीक्षा के कथित लीक पेपर, फर्जी जानकारी और परीक्षा से जुड़े भ्रामक कंटेंट को रोकने में विफल रहने के आरोप में केंद्र सरकार ने Telegram और उससे जुड़ी वेब सेवाओं पर एक सप्ताह का प्रतिबंध भी लगाया था। बाद में प्रतिबंध की अवधि समाप्त होने के बाद प्लेटफॉर्म की सेवाएं फिर से बहाल कर दी गई थीं।
प्लेटफॉर्म की जवाबदेही तय करने की दिशा में बड़ा कदम
सरकार का यह कदम इस बात का संकेत माना जा रहा है कि अब ऑनलाइन पायरेसी के मामलों में केवल कंटेंट हटाने की कार्रवाई नहीं होगी, बल्कि संबंधित डिजिटल प्लेटफॉर्म की जिम्मेदारी भी तय की जाएगी।
यदि Telegram तय समय के भीतर संतोषजनक जवाब और कार्रवाई रिपोर्ट नहीं देता है, तो सरकार आगे और कड़े कदम उठा सकती है। इससे ऑनलाइन पायरेसी पर रोक लगाने और डिजिटल कंटेंट निर्माताओं के अधिकारों की सुरक्षा को और मजबूती मिलने की उम्मीद है।
