नई दिल्ली. पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के संगठनात्मक विवाद के बीच चुनाव आयोग के अंतरिम आदेश के बाद राजनीतिक और चुनावी गतिविधियां तेज हो गई हैं। ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले तृणमूल कांग्रेस गुट ने आयोग के निर्देश के तहत नए नाम और चुनाव चिन्ह के विकल्प भेज दिए हैं। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, यह जवाब गुरुवार रात 11 बजकर 36 मिनट पर भेजा गया और इसे ‘सबसे कड़े विरोध’ के साथ प्रस्तुत किया गया।
यह घटनाक्रम 6 अक्टूबर को होने वाले पश्चिम बंगाल के नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा उपचुनाव से पहले सामने आया है। चुनाव आयोग ने फिलहाल दोनों प्रतिद्वंद्वी गुटों को मूल पार्टी नाम All India Trinamool Congress (AITC) और उसके आरक्षित ‘फूल और घास’ चुनाव चिन्ह के इस्तेमाल से रोक दिया है।
चुनाव आयोग ने क्यों फ्रीज किया TMC का नाम और चिन्ह?
चुनाव आयोग के मुताबिक, AITC के प्रतिनिधित्व और संगठनात्मक नियंत्रण को लेकर दो गुटों के बीच विवाद चल रहा है। इस स्थिति में आयोग ने अंतरिम व्यवस्था के तौर पर दोनों पक्षों को अलग-अलग नाम और अलग-अलग मुक्त चुनाव चिन्ह देने का फैसला किया है, ताकि आगामी उपचुनावों में दोनों को समान आधार पर चुनाव लड़ने का अवसर मिले।
आयोग ने स्पष्ट किया है कि यह व्यवस्था अंतिम फैसला नहीं है। पार्टी के नाम और चुनाव चिन्ह पर अंतिम निर्णय Election Symbols (Reservation and Allotment) Order, 1968 के पैरा 15 के तहत चलने वाली प्रक्रिया के बाद किया जाएगा।
दोनों गुटों से मांगे गए थे तीन-तीन विकल्प
आयोग ने दोनों पक्षों को अपने लिए तीन वैकल्पिक नाम और तीन मुक्त चुनाव चिन्ह प्राथमिकता के क्रम में देने को कहा था। इन नामों में AITC से जुड़ा संदर्भ रखने का विकल्प भी दिया गया था, जबकि चुनाव चिन्ह ECI की उपलब्ध ‘free symbols’ सूची में से चुने जाने हैं।
ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने तय समयसीमा के भीतर अपने विकल्प आयोग को भेज दिए। पार्टी की ओर से इसे विरोध के साथ भेजा जाना बताता है कि वह आयोग की अंतरिम व्यवस्था से सहमत नहीं है, हालांकि यह अभी अंतिम निर्णय नहीं है।
दूसरे गुट ने भी भेजे अपने विकल्प
विवाद में शामिल दूसरे गुट ने भी आयोग के निर्देश का पालन करते हुए अपने पसंदीदा नाम और चुनाव चिन्ह के विकल्प जमा किए हैं। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, इस गुट की ओर से ‘Nationalized Trinamool Congress’ और ‘Democratic Trinamool Congress’ जैसे नाम विकल्प के तौर पर बताए गए हैं।
अब आयोग इन विकल्पों पर विचार कर प्रत्येक गुट के लिए चुनाव में इस्तेमाल होने वाला नाम और चिन्ह तय करेगा।
6 अक्टूबर को नंदीग्राम और रेजीनगर में उपचुनाव
दोनों सीटों पर 6 अक्टूबर को उपचुनाव होना है। नाम और चुनाव चिन्ह को लेकर आयोग की अंतरिम व्यवस्था का सीधा असर इन चुनावों की प्रक्रिया पर पड़ेगा, क्योंकि दोनों गुटों को फिलहाल मूल AITC नाम और आरक्षित चिन्ह के बजाय अलग पहचान के साथ मैदान में उतरना होगा।
TMC के भीतर विवाद का मामला आयोग तक कैसे पहुंचा?
यह विवाद 2026 के विधानसभा चुनावों के बाद तृणमूल कांग्रेस के भीतर उभरे संगठनात्मक मतभेदों से जुड़ा है। इसके बाद पार्टी के भीतर अलग-अलग नेतृत्व दावों और प्रतिनिधित्व को लेकर विवाद बढ़ा और मामला चुनाव आयोग तक पहुंचा।
आयोग ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फिलहाल किसी एक गुट को मूल नाम या आरक्षित चुनाव चिन्ह देने के बजाय अंतरिम व्यवस्था लागू की है। आयोग का अंतिम फैसला आगे की सुनवाई और दस्तावेजों की जांच के बाद होना है।
ममता बनर्जी के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह मामला?
AITC का नाम और ‘फूल-घास’ चुनाव चिन्ह तृणमूल कांग्रेस की चुनावी पहचान का हिस्सा रहे हैं। ऐसे में उपचुनाव के दौरान मूल नाम और चिन्ह का इस्तेमाल नहीं कर पाना दोनों गुटों के लिए संगठनात्मक और चुनावी तौर पर महत्वपूर्ण स्थिति पैदा करता है।
फिलहाल चुनाव आयोग का आदेश केवल आगामी उपचुनावों के लिए अंतरिम व्यवस्था के रूप में लागू है। पार्टी के नाम और चुनाव चिन्ह पर अंतिम अधिकार किसे मिलेगा, यह निर्णय पैरा 15 के तहत होने वाली आगे की प्रक्रिया के बाद स्पष्ट होगा।

