नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क संपर्क को मजबूत बनाने के लिए वित्त वर्ष 2026-27 में बड़ा बजटीय प्रावधान किया है। सरकार ने प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) और अन्य ग्रामीण संपर्क परियोजनाओं के तहत 26,474 किलोमीटर ग्रामीण सड़कों के निर्माण के लिए 18,907 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं। इस कदम का उद्देश्य देश के दूर-दराज और अब तक सड़क संपर्क से वंचित गांवों को बेहतर परिवहन सुविधाएं उपलब्ध कराना है।
यह जानकारी ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा आयोजित एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक के दौरान सामने आई। बैठक की अध्यक्षता ग्रामीण विकास विभाग के सचिव Rohit Kansal ने की, जिसमें विभिन्न राज्यों में चल रही सड़क परियोजनाओं की भौतिक और वित्तीय प्रगति की समीक्षा की गई।
ग्रामीण संपर्क बढ़ाने पर सरकार का विशेष फोकस
समीक्षा बैठक में वर्ष 2026-27 के लिए राज्यों को दिए गए लक्ष्यों और परियोजनाओं की प्रगति पर विस्तार से चर्चा हुई। सरकार का मुख्य लक्ष्य उन ग्रामीण क्षेत्रों तक सड़क संपर्क पहुंचाना है जो अब भी बुनियादी परिवहन सुविधाओं से वंचित हैं।
बैठक में विशेष रूप से उन क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया गया जहां सड़क संपर्क की कमी विकास में बाधा बन रही है। सरकार ने राज्यों को निर्देश दिए कि वे शेष बचे सभी गांवों और बस्तियों को जल्द से जल्द सड़क नेटवर्क से जोड़ने की दिशा में तेजी से काम करें।
सड़कों की गुणवत्ता और टिकाऊपन पर जोर
समीक्षा के दौरान केवल नई सड़कें बनाने पर ही नहीं बल्कि उनकी गुणवत्ता और दीर्घकालिक उपयोगिता पर भी विशेष ध्यान दिया गया। सचिव रोहित कंसल ने कहा कि ग्रामीण सड़कों का निर्माण निर्धारित मानकों के अनुरूप होना चाहिए ताकि लोगों को लंबे समय तक बेहतर परिवहन सुविधा मिल सके।
उन्होंने राज्यों को निर्देश दिए कि सड़क निर्माण के साथ-साथ रखरखाव की व्यवस्था को भी मजबूत किया जाए। उनका कहना था कि यदि सड़कों की समय पर मरम्मत और देखभाल नहीं होगी तो निवेश का पूरा लाभ ग्रामीण आबादी तक नहीं पहुंच पाएगा।
नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सड़क परियोजनाओं को मिलेगी गति
बैठक में वामपंथी उग्रवाद (एलडब्ल्यूई) प्रभावित जिलों में सड़क परियोजनाओं की प्रगति की भी समीक्षा की गई। सरकार का मानना है कि सड़क संपर्क केवल विकास का माध्यम नहीं है, बल्कि सुरक्षा और प्रशासनिक पहुंच को मजबूत करने का भी महत्वपूर्ण साधन है।
इसी को ध्यान में रखते हुए राज्यों को निर्देश दिया गया कि वे संबंधित एजेंसियों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करें और परियोजनाओं को तय समय सीमा में पूरा करें। सरकार चाहती है कि इन क्षेत्रों में सड़क नेटवर्क मजबूत होने से विकास गतिविधियों को नई गति मिले।
जनजातीय और दूरस्थ क्षेत्रों को प्राथमिकता
केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महाअभियान (पीएम-जनमन) के तहत विशेष रूप से अत्यंत कमजोर जनजातीय समूहों (पीवीटीजी) की बस्तियों तक सड़क संपर्क पहुंचाने पर जोर दिया है।
समीक्षा बैठक में राज्यों को निर्देश दिए गए कि वे ऐसे सभी क्षेत्रों में लंबित परियोजनाओं को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करें। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि देश के सबसे दूरस्थ और पिछड़े इलाकों तक भी हर मौसम में उपयोगी सड़कें उपलब्ध हों।
ई-मार्ग प्लेटफॉर्म से होगी निगरानी
ग्रामीण सड़कों के रखरखाव और निगरानी को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए सरकार ने ई-मार्ग (Electronic Maintenance of Rural Roads under PMGSY) प्लेटफॉर्म के व्यापक उपयोग पर भी जोर दिया है।
इस डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से सड़क रखरखाव कार्यों की वास्तविक समय में निगरानी, प्रदर्शन मूल्यांकन और भुगतान ट्रैकिंग की जा सकेगी। सरकार का मानना है कि इससे जवाबदेही बढ़ेगी और सड़क परियोजनाओं के संचालन में पारदर्शिता आएगी।
लंबित परियोजनाओं को समय पर पूरा करने के निर्देश
बैठक के अंत में सचिव रोहित कंसल ने राज्यों को परियोजनाओं के क्रियान्वयन में आने वाली बाधाओं को दूर करने के लिए राज्य-विशिष्ट निर्देश जारी किए। भूमि अधिग्रहण, वन स्वीकृतियों और अन्य प्रशासनिक प्रक्रियाओं को तेजी से पूरा करने पर विशेष जोर दिया गया।
साथ ही राज्यों से कहा गया कि वे परियोजनाओं के तय माइलस्टोन का पालन सुनिश्चित करें और ग्रामीण विकास मंत्रालय, राष्ट्रीय ग्रामीण अवसंरचना विकास एजेंसी तथा राज्य सरकारों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करें।
सरकार को उम्मीद है कि इन प्रयासों के माध्यम से ग्रामीण भारत में सड़क संपर्क का दायरा और मजबूत होगा, जिससे गांवों की अर्थव्यवस्था, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और रोजगार के अवसरों को नई गति मिलेगी।

