नई दिल्ली. केंद्र सरकार अगले एक साल में चार सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में अपनी हिस्सेदारी घटाकर 75 प्रतिशत तक लाने पर विचार कर रही है। इसका उद्देश्य शेयर बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) के न्यूनतम सार्वजनिक शेयरधारिता नियमों का पालन करना है। द इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, जिन बैंकों पर यह योजना केंद्रित है, उनमें सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, यूको बैंक, पंजाब एंड सिंध बैंक और इंडियन ओवरसीज बैंक शामिल हैं।
इसके साथ ही सरकार सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के अगले दौर के विलय और एकीकरण की योजना पर भी काम कर रही है। रिपोर्ट के अनुसार, इस प्रक्रिया में दो और बैंकों को निजीकरण के लिए चुने जाने की संभावना पर विचार किया जा सकता है। हालांकि, अभी तक इस संबंध में कोई अंतिम फैसला सामने नहीं आया है।
ऑफर फॉर सेल के जरिए बेची जा सकती है हिस्सेदारी
सरकार चारों बैंकों में अपनी हिस्सेदारी कम करने के लिए ऑफर फॉर सेल (OFS) का रास्ता अपना सकती है। शेयरों की बिक्री का समय और मात्रा बाजार की परिस्थितियों तथा सरकार के फैसले पर निर्भर करेगी। इसके अलावा बैंक अपनी जरूरतों और योजनाओं के अनुसार बाजार से पूंजी जुटाने पर भी विचार कर सकते हैं।
रिपोर्ट में एक सरकारी अधिकारी के हवाले से कहा गया है कि पहला कदम अगले एक साल में इन चारों बैंकों में सार्वजनिक हिस्सेदारी बढ़ाना है। हिस्सेदारी में कमी आने से बाजार में आम निवेशकों के लिए उपलब्ध शेयरों की संख्या बढ़ेगी। इससे बैंकों के शेयरों के मूल्यांकन में सुधार की उम्मीद भी जताई जा रही है।
हालांकि, हिस्सेदारी घटाने और बैंक का निजीकरण करने के बीच अंतर है। सरकार की हिस्सेदारी 75 प्रतिशत तक लाने की योजना अपने आप में निजीकरण का फैसला नहीं है। निजीकरण के लिए अलग प्रक्रिया और जरूरी कानूनी बदलावों की आवश्यकता हो सकती है।
चारों बैंकों में सरकार की कितनी हिस्सेदारी?
रिपोर्ट में दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, इन चार सरकारी बैंकों में केंद्र सरकार की हिस्सेदारी इस प्रकार है।
इंडियन ओवरसीज बैंक: 92.44 प्रतिशत
सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया: 81.19 प्रतिशत
यूको बैंक: 90.95 प्रतिशत
पंजाब एंड सिंध बैंक: 93.85 प्रतिशत
सरकार की हिस्सेदारी 75 प्रतिशत तक लाने के लिए इंडियन ओवरसीज बैंक, यूको बैंक और पंजाब एंड सिंध बैंक में सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की तुलना में अधिक शेयर बेचने की जरूरत होगी। हालांकि, वास्तविक बिक्री कितनी होगी और इसे कब अंजाम दिया जाएगा, यह बाजार की स्थिति और सरकार की मंजूरी पर निर्भर करेगा।
अगस्त 2026 तक मिली थी न्यूनतम सार्वजनिक हिस्सेदारी नियम से छूट
SEBI के नियमों के तहत सूचीबद्ध कंपनियों में न्यूनतम 25 प्रतिशत सार्वजनिक शेयरधारिता बनाए रखने का प्रावधान है। केंद्र सरकार ने सरकारी कंपनियों और वित्तीय संस्थानों को अगस्त 2026 तक इस शर्त से छूट दी थी।
रिपोर्ट के अनुसार, इस छूट को आगे बढ़ाने की अधिसूचना जारी होने की उम्मीद थी। ऐसे में चारों बैंकों में सरकारी हिस्सेदारी कम करने की योजना को बाजार नियामक के निर्धारित मानकों के अनुरूप बनने की दिशा में एक कदम माना जा रहा है।
सार्वजनिक हिस्सेदारी बढ़ने से इन बैंकों के शेयरों में आम निवेशकों की भागीदारी बढ़ सकती है। साथ ही, बाजार में उपलब्ध शेयरों की संख्या बढ़ने से इनके शेयर कारोबार और मूल्यांकन पर भी असर पड़ सकता है।
सेंट्रल बैंक और इंडियन ओवरसीज बैंक के निजीकरण पर भी चर्चा
सरकार सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के व्यापक एकीकरण की रणनीति पर भी काम कर रही है। इसका दीर्घकालिक उद्देश्य देश में तीन से चार बड़े सरकारी बैंकों को बनाए रखना बताया गया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, नीति आयोग ने पहले सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया और इंडियन ओवरसीज बैंक को निजीकरण के संभावित उम्मीदवारों के तौर पर शॉर्टलिस्ट किया था। हालांकि, इन दोनों बैंकों के निजीकरण पर अंतिम निर्णय लिए जाने की पुष्टि नहीं हुई है।
बैंकों के विलय या एकीकरण पर विचार करते समय उनकी तकनीकी प्रणालियों की अनुकूलता, भौगोलिक पहुंच और कारोबार की प्रकृति जैसे पहलुओं को ध्यान में रखा जा सकता है। अधिकारियों के मुताबिक, इस प्रक्रिया में संबंधित बैंकों से भी सुझाव लिए जाने की जरूरत होगी।
निजीकरण के लिए कानून में बदलाव जरूरी
सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के निजीकरण के लिए मौजूदा कानूनों में संशोधन करना पड़ सकता है। इनमें बैंकिंग कंपनियां (उपक्रमों का अधिग्रहण और हस्तांतरण) अधिनियम भी शामिल है।
रिपोर्ट में एक अधिकारी के हवाले से बताया गया है कि बैंक एकीकरण की प्रक्रिया के साथ-साथ ऐसे कानूनी संशोधनों पर भी काम किया जा सकता है।
गौरतलब है कि वित्त वर्ष 2021-22 के केंद्रीय बजट में सरकार ने IDBI Bank के अलावा दो सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और एक सामान्य बीमा कंपनी के निजीकरण की योजना की घोषणा की थी।
IDBI Bank सौदे के बाद तेज हुई चर्चा
सरकारी वित्तीय संस्थानों में अपनी हिस्सेदारी घटाने की दिशा में सरकार का ताजा कदम IDBI Bank से जुड़े सौदे के बाद आया है। रिपोर्ट के अनुसार, सरकार ने इसी महीने घोषणा की थी कि कनाडाई अरबपति प्रेम वत्सा द्वारा प्रवर्तित Fairfax Financial Holdings, IDBI Bank में 60.72 प्रतिशत हिस्सेदारी 52,878 करोड़ रुपये में हासिल करेगी।
इस सौदे को सरकारी वित्तीय संस्थानों में निजी पूंजी लाने और सरकारी स्वामित्व कम करने के व्यापक प्रयास का हिस्सा माना जा रहा है।
हालांकि, चार सरकारी बैंकों में प्रस्तावित हिस्सेदारी बिक्री का तत्काल उद्देश्य सार्वजनिक शेयरधारिता बढ़ाना और बाजार नियामक के नियमों का पालन करना है। इसे इन बैंकों के निजीकरण का अंतिम फैसला नहीं माना जा सकता।
सरकार की व्यापक रणनीति में तीन से चार बड़े सरकारी बैंकों को बनाए रखने के साथ-साथ बैंकिंग क्षेत्र में आगे के एकीकरण और संभावित निजीकरण पर विचार करना शामिल है। इन योजनाओं पर अंतिम निर्णय बैंकों की कारोबारी स्थिति, परिचालन अनुकूलता और अन्य संबंधित पहलुओं को ध्यान में रखकर लिया जा सकता है।

