नई दिल्ली. हिंदू कुश हिमालय (HKH) क्षेत्र में ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (GLOF) का खतरा लगातार बढ़ रहा है। संयुक्त राष्ट्र से जुड़े विशेषज्ञों की एक नई स्टडी में सामने आया है कि इस क्षेत्र में GLOF की घटनाओं की संख्या के मामले में भारत तीसरे स्थान पर है, लेकिन इन बाढ़ों से होने वाली मौतों के मामले में भारत सबसे आगे है। यह रिपोर्ट ऐसे समय सामने आई है, जब नेपाल में भीषण फ्लैश फ्लड ने भारी तबाही मचाई है और इसके पीछे ग्लेशियल गतिविधियों को संभावित कारण माना जा रहा है।
भारत में 62 GLOF घटनाएं, लेकिन 6,119 लोगों की मौत
UN-led global study के मुताबिक, हिंदू कुश हिमालय क्षेत्र में 1835 से 2025 के बीच ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड की सैकड़ों घटनाएं दर्ज की गईं। इनमें चीन में सबसे ज्यादा 199 GLOF घटनाएं हुईं, जबकि पाकिस्तान में 152, भारत में 62 और नेपाल में 58 घटनाएं दर्ज की गईं।
हालांकि, मौतों का आंकड़ा तस्वीर को पूरी तरह बदल देता है। भारत में इन 62 घटनाओं के कारण 6,119 लोगों की जान गई। वहीं चीन में 625 और पाकिस्तान में 1,991 लोगों की मौत हुई। रिपोर्ट के अनुसार, GLOF से होने वाले विस्थापन के मामले में भी भारत सबसे ज्यादा प्रभावित देशों में शामिल है।
जलवायु परिवर्तन से बढ़ रहा GLOF का खतरा
स्टडी में कहा गया है कि पिछले कुछ दशकों में GLOF की घटनाओं में तेजी से बढ़ोतरी हुई है और इसके पीछे Climate Change को एक महत्वपूर्ण कारण माना जा रहा है। वर्ष 1950 के बाद GLOF की औसत घटनाएं बढ़कर करीब 34 प्रति दशक हो गईं, जो 1950 से पहले की तुलना में लगभग पांच गुना ज्यादा हैं।
विशेषज्ञों के मुताबिक बढ़ता तापमान ग्लेशियरों के पिघलने की प्रक्रिया को तेज कर रहा है। इसके कारण ग्लेशियरों से जुड़े झीलों में पानी की मात्रा बढ़ती है और प्राकृतिक बांधों पर दबाव बढ़ने लगता है। ऐसी स्थिति में अचानक बांध टूटने पर बड़ी मात्रा में पानी नीचे की ओर तेजी से बह सकता है।
गर्मियों और मानसून में ज्यादा खतरा
रिपोर्ट में GLOF के पीछे कई प्राकृतिक कारणों का भी विश्लेषण किया गया है। इसके अनुसार करीब 50 फीसदी घटनाओं के पीछे Ice Avalanche यानी बर्फीले मलबे का गिरना प्रमुख कारण रहा, जबकि लगभग 25 फीसदी घटनाएं भारी बारिश से जुड़ी थीं।
स्टडी के अनुसार करीब 70 फीसदी GLOF घटनाएं गर्मियों और मानसून के महीनों में हुईं। इस दौरान तापमान और बारिश दोनों अधिक होते हैं, जिससे ग्लेशियर और उनसे जुड़ी झीलों पर दबाव बढ़ सकता है।
प्राकृतिक बांध टूटने से आती है तबाही
हिंदू कुश हिमालय क्षेत्र में होने वाली GLOF घटनाओं में करीब 80 फीसदी मामले Moraine-dammed और Ice-dammed lakes से जुड़े पाए गए हैं। ये ऐसी झीलें हैं, जिनका पानी पहाड़ों में मौजूद प्राकृतिक अवरोधों के पीछे जमा रहता है। ये अवरोध चट्टानों, मलबे या बर्फ से बने हो सकते हैं।
जब तापमान बढ़ता है तो ग्लेशियर से लगातार पिघला हुआ पानी और मलबा झील में पहुंचता रहता है। इससे झील का जलस्तर और प्राकृतिक बांध पर पानी का दबाव बढ़ सकता है। इसके बाद हिमस्खलन, भूस्खलन या भूकंपीय गतिविधि जैसी घटनाएं इस प्राकृतिक बांध को तोड़ सकती हैं और अचानक भारी मात्रा में पानी नीचे की ओर बह सकता है।
भारत के लिए क्यों बढ़ रही चिंता?
भारत, नेपाल और पाकिस्तान जैसे देशों के लिए GLOF का खतरा इसलिए भी गंभीर है क्योंकि हिमालयी क्षेत्र भूकंपीय गतिविधियों के लिहाज से संवेदनशील है। इसके अलावा ग्लेशियरों के तेजी से बदलते आकार और Mass Balance को Climate Change का महत्वपूर्ण संकेत माना जाता है।
भारत में कई बड़ी नदियां और जलविद्युत परियोजनाएं हिमालयी क्षेत्रों से जुड़ी हैं। ऐसे में अचानक आने वाली Glacial Flood न केवल जान-माल को नुकसान पहुंचा सकती है, बल्कि सड़कों, पुलों, बिजली परियोजनाओं और दूरदराज के गांवों के लिए भी बड़ा खतरा पैदा कर सकती है।
2023 और 2025 की घटनाओं से नहीं लिया पर्याप्त सबक?
स्टडी ने भारत में GLOF से निपटने के मौजूदा इंतजामों को लेकर भी चिंता जताई है। विशेषज्ञों का कहना है कि वर्ष 2023 में सिक्किम और पश्चिम बंगाल में Teesta Flash Flood तथा 2025 में Chamoli की घटना से पर्याप्त सबक लेने की जरूरत है।
विशेषज्ञों के मुताबिक अगर Glacier Adaptation, Early Warning Systems और Disaster Preparedness को तेजी से मजबूत नहीं किया गया तो भविष्य में हिमालयी क्षेत्रों में इससे भी बड़ी आपदा देखने को मिल सकती है। भारत में कई संवेदनशील इलाकों में आबादी और बुनियादी ढांचे की मौजूदगी अधिक होने के कारण संभावित नुकसान भी काफी बड़ा हो सकता है।
नेपाल की तबाही ने फिर बढ़ाई चिंता
नेपाल में हालिया विनाशकारी फ्लैश फ्लड के बाद GLOF को लेकर चिंता और बढ़ गई है। हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियरों के पिघलने, भारी बारिश और प्राकृतिक झीलों के बढ़ते दबाव के बीच वैज्ञानिक लगातार Early Warning और बेहतर Monitoring Systems की जरूरत पर जोर दे रहे हैं।
भारत के लिए UN-led study का यह निष्कर्ष इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि GLOF की घटनाएं भले ही कुछ अन्य देशों की तुलना में कम दर्ज हुई हों, लेकिन मौतों का आंकड़ा सबसे ज्यादा है। ऐसे में हिमालयी राज्यों में समय रहते निगरानी, चेतावनी और राहत व्यवस्था को मजबूत करना भविष्य की बड़ी आपदाओं से बचाव के लिए बेहद जरूरी माना जा रहा है।

